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ढाई सौ करोड़ का लेनदेन प्रभावित
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद
Updated Sat, 30 Jul 2016 03:05 AM IST
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मुरादाबाद में बैंक हड़ताल करते बैंककमीऱ्
- फोटो : अमर उजाला
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यूनाईटेड फोरम आफ बैंक यूनियन के आह्वान पर महानगर के बैंक कर्मचारी हड़ताल पर रहे। बैंकों की हड़ताल से महानगर में करीब ढाई सौ करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। बैंक कर्मचारियों ने सरकार की बैंकिंग विरोधी नीतियों और एसबीआई के एसोसिएट बैंकों के एसबीआई में विलय के विरोध में हड़ताल की।
सिविल लाइंस स्थित इलाहाबाद बैंक पर आयोजित विरोध प्रदर्शन में यूनियन नेताओं ने कहा कि विलय के नाम पर एसबीआई के पांच एसोसिएट बैंकों को समाप्त करने का प्रस्ताव लाया गया है जो कि बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों दोनों के लिए हानिकारक है। सरकार रिफार्म और बैंकों में 75 प्रतिशत तक निजी पूंजी निवेश के नाम पर बैंकों का निजीकरण करना चाहती है।
पदाधिकारियों ने कहा कि आज बैंकिंग उद्योग एनपीए के कारण संकट में है। एनपीए के कारण बैंकों का लाभ घट गया है। एनपीए के लिए सरकार को सख्त कानून बनाने चाहिए। जिससे जानबूझकर कर्ज वापस न देने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार की सभी बैंक विरोधी नीतियों का हर मोर्चे पर विरोध किया जाएगा।
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प्रदर्शन करने वालों में यूएफबीयू के जिला संयोजक राकेश कपूर, एसपी सिंह, अनिमेष शर्मा, नवनीत कुमार, प्रताप सिंह, एन के राजवंशी, संदीप अग्रवाल समेत सैकड़ों बैंक अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे।
उधर, बैंकों के एक दिवसीय हड़ताल से महानगर में करीब ढाई सौ करोड़ की आर्थिक गतिविध ठप हो गई। क्लीयरेंस हाउस में रोजाना औसतन दो सौ करोड़ रुपये के चेक क्लीयर किये जाते हैं। वहीं पचास करोड़ रुपये का केश ट्रांजेक्शन होता है। ऐसे में कुल ढाई सौ करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित रहा। अभी बैंक अधिकारी इसका आंकलन कर रहे हैं।
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सिविल लाइंस स्थित इलाहाबाद बैंक पर आयोजित विरोध प्रदर्शन में यूनियन नेताओं ने कहा कि विलय के नाम पर एसबीआई के पांच एसोसिएट बैंकों को समाप्त करने का प्रस्ताव लाया गया है जो कि बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों दोनों के लिए हानिकारक है। सरकार रिफार्म और बैंकों में 75 प्रतिशत तक निजी पूंजी निवेश के नाम पर बैंकों का निजीकरण करना चाहती है।
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पदाधिकारियों ने कहा कि आज बैंकिंग उद्योग एनपीए के कारण संकट में है। एनपीए के कारण बैंकों का लाभ घट गया है। एनपीए के लिए सरकार को सख्त कानून बनाने चाहिए। जिससे जानबूझकर कर्ज वापस न देने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार की सभी बैंक विरोधी नीतियों का हर मोर्चे पर विरोध किया जाएगा।
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प्रदर्शन करने वालों में यूएफबीयू के जिला संयोजक राकेश कपूर, एसपी सिंह, अनिमेष शर्मा, नवनीत कुमार, प्रताप सिंह, एन के राजवंशी, संदीप अग्रवाल समेत सैकड़ों बैंक अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे।
उधर, बैंकों के एक दिवसीय हड़ताल से महानगर में करीब ढाई सौ करोड़ की आर्थिक गतिविध ठप हो गई। क्लीयरेंस हाउस में रोजाना औसतन दो सौ करोड़ रुपये के चेक क्लीयर किये जाते हैं। वहीं पचास करोड़ रुपये का केश ट्रांजेक्शन होता है। ऐसे में कुल ढाई सौ करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित रहा। अभी बैंक अधिकारी इसका आंकलन कर रहे हैं।