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पालीथीन पर रोक को जारी होगा आदेश
Updated Sat, 07 Jul 2018 03:04 AM IST
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मुरादाबाद। पालीथीन पर रोक के लिए नगर निकायों के पर्यावरण अधिकारियों ने अपने सुझाव तैयार कर लिए हैं। इनके आधार पर गाइडलाइन बनाकर 10 जुलाई को आदेश जारी कर दिया जाएगा। पर्यावरण के लिए सबसे ज्यादा घातक रंगीन पालीथीन को माना जा रहा है।
पालीथीन पर रोक लगाने का तरीका अभी तक तय नहीं हो पाया है। गाइडलाइन स्पष्ट न होने से अधिकारी कार्रवाई की रणनीति नहीं बना पा रहा है। नगर विकास विभाग ने सभी निकायों से इस संबंध में सुझाव मांगे हैं। इन पर नौ जुलाई को निर्णय लिया जाएगा। उसकेआधार पर 10 जुलाई को पालीथीन बंदी का विधिवत आदेश जारी कर दिया जाएगा। सबसे ज्यादा खतरा रंगीन पालीथीन से है। 50 माइक्रान से कम की पालीथीन को प्रयोग के बाद एकत्रित नहीं किया जा सकता है। ऐसे में उसको रि-साइकिल में नहीं ले जाया जा सकता है। यही कारण है कि सबसे पहले कार्रवाई 50 माइक्रान से कम की पालीथीन पर ही की जाएगी। पर्यावरण नियमों के अनुसार जो कंपनी पालीथीन का प्रयोग अपने पैकिंग में करती है, उसकेनिस्तारण का खर्च भी उसी कंपनी से लिया जाएगा। ऐसे में संभव है कि चिप्स-बिस्कुट, दूध, घी-तेल आदि की पालीथीन के निस्तारण का खर्च संबंधित कंपनियों से वसूला जाए। नगर निगम के पर्यावरण अभियंता आशीष शुक्ला ने बताया कि मुख्यमंत्री के आदेशानुसार हर हाल में 15 जुलाई से पालीथीन पर रोक लगा दी जाएगी। इसकी गाइडलाइन का निर्धारण 10 जुलाई को होगा। निगम स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
पालीथीन से निकाला जा सकता है तेल
चिप्स-बिस्कुट पैकिंग आदि की रंगीन पालीथीन से तेल बनाना भी विकल्प हो सकता है। इसका प्रयोग कई राज्यों में शुरू किया गया है। रंगीन पालीथीन को कबाड़ियों से एकत्र करा लिया जाता है। उसके बाद खास तरह से तैयार किए गए प्लांट मेें पालीथीन का तेल बनाया जाता है। इस तेल को पायरो आयल कहते हैं। इसका प्रयोग उद्योगों में फर्नेस में किया जाता है।
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पालीथीन पर रोक लगाने का तरीका अभी तक तय नहीं हो पाया है। गाइडलाइन स्पष्ट न होने से अधिकारी कार्रवाई की रणनीति नहीं बना पा रहा है। नगर विकास विभाग ने सभी निकायों से इस संबंध में सुझाव मांगे हैं। इन पर नौ जुलाई को निर्णय लिया जाएगा। उसकेआधार पर 10 जुलाई को पालीथीन बंदी का विधिवत आदेश जारी कर दिया जाएगा। सबसे ज्यादा खतरा रंगीन पालीथीन से है। 50 माइक्रान से कम की पालीथीन को प्रयोग के बाद एकत्रित नहीं किया जा सकता है। ऐसे में उसको रि-साइकिल में नहीं ले जाया जा सकता है। यही कारण है कि सबसे पहले कार्रवाई 50 माइक्रान से कम की पालीथीन पर ही की जाएगी। पर्यावरण नियमों के अनुसार जो कंपनी पालीथीन का प्रयोग अपने पैकिंग में करती है, उसकेनिस्तारण का खर्च भी उसी कंपनी से लिया जाएगा। ऐसे में संभव है कि चिप्स-बिस्कुट, दूध, घी-तेल आदि की पालीथीन के निस्तारण का खर्च संबंधित कंपनियों से वसूला जाए। नगर निगम के पर्यावरण अभियंता आशीष शुक्ला ने बताया कि मुख्यमंत्री के आदेशानुसार हर हाल में 15 जुलाई से पालीथीन पर रोक लगा दी जाएगी। इसकी गाइडलाइन का निर्धारण 10 जुलाई को होगा। निगम स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
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पालीथीन से निकाला जा सकता है तेल
चिप्स-बिस्कुट पैकिंग आदि की रंगीन पालीथीन से तेल बनाना भी विकल्प हो सकता है। इसका प्रयोग कई राज्यों में शुरू किया गया है। रंगीन पालीथीन को कबाड़ियों से एकत्र करा लिया जाता है। उसके बाद खास तरह से तैयार किए गए प्लांट मेें पालीथीन का तेल बनाया जाता है। इस तेल को पायरो आयल कहते हैं। इसका प्रयोग उद्योगों में फर्नेस में किया जाता है।
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