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उपलब्धि : युवा जज्बे की दास्तान लिख रहा अमान, 11वीं कक्षा का है छात्र
Sat, 11 Jan 2020 10:39 PM IST
अवधेश कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Published by: अवधेश कुमार
Updated Sat, 11 Jan 2020 10:39 PM IST
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11वीं के छात्र ने लिखी किताब
- फोटो : अमर उजाला
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उम्र के नाजुक मोड़ पर जब युवा अपने सपने पूरे न होते देख भटक जाते हैं, तब 11वीं के छात्र अमान ने अपनी उम्र की कहानी लिख डाली। उनके लेखन ने अब उन्हें पहचान दिला दी है। उनकी किताब अनटिल ही वाज एटीन पाठकों को खूब पसंद आ रही है। 31 दिसंबर को प्रकाशित हुई इस युवा लेखक की किताब को ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल पर भी खूब बुक किया जा रहा है। किताब के जरिए 17 वर्षीय अमान ने अपनी उम्र के युवाओं को तनाव मुक्त रहने का संदेश दिया है।
बकौल अमान अमेरिकी लेखक नेपोलियन हिल की किताब थिंक एंड ग्रो रिच पढ़ कर उन्हें लेखन की प्रेरणा मिली। 18 वर्ष की आयु के युवा किन दिक्कतों से जूझते हैं, उनकी क्या समस्याएं हैं, वह समाज, परिवार, रिश्तेदारों और मित्रों के विषय में क्या सोचते हैं और उनकी क्या इच्छाएं हैं इन सब पर उनकी किताब है। यह 35 छोटे अध्याय और 187 पन्नों की इस किताब में युवाओं को अपनी कहानी ढूंढ़ने का काफी मौका है।
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बकौल अमान अमेरिकी लेखक नेपोलियन हिल की किताब थिंक एंड ग्रो रिच पढ़ कर उन्हें लेखन की प्रेरणा मिली। 18 वर्ष की आयु के युवा किन दिक्कतों से जूझते हैं, उनकी क्या समस्याएं हैं, वह समाज, परिवार, रिश्तेदारों और मित्रों के विषय में क्या सोचते हैं और उनकी क्या इच्छाएं हैं इन सब पर उनकी किताब है। यह 35 छोटे अध्याय और 187 पन्नों की इस किताब में युवाओं को अपनी कहानी ढूंढ़ने का काफी मौका है।
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मनोचिकत्सक बनना है सपना
अमान अमरोहा की आवास विकास-2 में रहले वाले मुस्तकीम सैफी और शबनम के घर जन्मे तीसरे नंबर के बेटे हैं। इस समय गजरौला के सेंट मैरी सीनियर सेकेंड्री स्कूल में पढ़ते हैं। उनका सपना मनोचिकित्सक बनना है। अपनी किताब के अलावा यू-ट्यूब पर प्रेरक वीडियो के लिए भी इन दिनों वह पहचाने जा रहे हैं। जामिया मिल्लिया में कक्षा नौ में दाखिले के लिए प्रयास किया। लेकिन सफलता नहीं मिली। जिसके बाद तनाव में आ गया। इसी बीच उन्हें अमेरिकी लेखक नेपोलियन हिल की किताब मिली। जिसने उसको नई दिशा दी।
पॉकेट खर्च और गुल्लक के रुपये आए काम
किताब के प्रकाशन समेत अन्य खर्च पर लगभग एक लाख रुपये का खर्च आया। यह रुपये उन्होंने घरवालों के अलावा रिश्तेदारों से मिले हैं। उन्होंने गुल्लक में जमा किया था। इसके अलावा दोनो बड़े भाई मोहम्मद शाहजेब और मोहम्मद जावेद ने भी सहयोग दिए।