{"_id":"5b7dcaae42c792465a6a4e3c","slug":"11534970542-moradabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कंपनियों ने हाथ खींचे, दवाओं का संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कंपनियों ने हाथ खींचे, दवाओं का संकट
Updated Thu, 23 Aug 2018 02:12 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुरादाबाद।
सरकारी अस्पतालों में दवा की सप्लाई के लिए कारपोरेशन के अस्तित्व में आने से ही पहले दवा का संकट खड़ा हो गया है। सरकारी अस्पताल अभी तक आनलाइन पोर्टल पर अनुबंधित कंपनियों की दवा खरीदते हैं। कंपनियों ने भुगतान लटकने की डर से अधिकतर दवाओं की सप्लाई रोक दी है। इससे सरकारी अस्पतालों में दवा के लिए मारामारी शुरू होने लगी है।
सरकारी अस्पताल अभी तक अपनी जरूरत के हिसाब से पोर्टल पर आनलाइन दवाओं की खरीद करते हैं। इसके लिए कंपनियों से अनुबंध है। अस्पतालों को दवा खरीद का बजट जारी होता है। पोर्टल पर जरूरत की दवा उपलब्ध नहीं होने पर अस्पताल बाजार से भी दवा खरीद लेते हैं। आगामी तीन महीने के भीतर सरकारी अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई कारपोरेशन से हो जाएगी। अस्पतालों को बजट बंद हो जाएगा। कारपोरेशन अस्पतालों की मांग के अनुरूप दवाओं की सप्लाई करेगा। अस्पतालों को साल में दवा खरीद के लिए चार किश्तों में बजट जारी होता है। इस साल मात्र एक किश्त जारी हुई है। बाकी तीन किश्तें अस्पतालों के बजाए सीधे कारपोरेशन को चली जाएंगी।
कारपोरेशन के अस्तित्व में आने से पहले वर्तमान में दवाओं की सप्लाई करनी वाली कंपनियों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। कंपनियों को भुगतान फंसने का डर है। इसके चलते पोर्टल पर अधिकतर दवाएं गायब हैं। इसका असर सीधे अस्पतालों में मरीजों पर पड़ने लगा है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन दो हजार से अधिक ओपीडी होती है। 142 बेड में मरीज भर्ती रहते हैं। दवाओं की खपत काफी अधिक है। अस्पताल को 37 लाख रुपये की किश्त मिली है। मौसमी बदलाव से संक्रामक मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। दवाओं के संकट को देखते हुए मरीजों को दी जाने वाली दवाओं में कटौती कर दी है। हफ्ते के बजाए पांच दिन की दवाएं दी जा रही हैं। त्वचा रोगियों के लिए क्रीम और लोशन नहीं मिल रहा है। इससे मरीज भटकने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
- दवा की आपूर्ति बाधित होने लगी है। इसका असर मरीजों पर पड़ना शुरू हो गया है। अस्पताल प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था कर जैसे जैसे मरीजों को दवाओं का वितरण कर रहा है। - डा. राजेंद्र कुमार, एमएस
विज्ञापन
सरकारी अस्पतालों में दवा की सप्लाई के लिए कारपोरेशन के अस्तित्व में आने से ही पहले दवा का संकट खड़ा हो गया है। सरकारी अस्पताल अभी तक आनलाइन पोर्टल पर अनुबंधित कंपनियों की दवा खरीदते हैं। कंपनियों ने भुगतान लटकने की डर से अधिकतर दवाओं की सप्लाई रोक दी है। इससे सरकारी अस्पतालों में दवा के लिए मारामारी शुरू होने लगी है।
सरकारी अस्पताल अभी तक अपनी जरूरत के हिसाब से पोर्टल पर आनलाइन दवाओं की खरीद करते हैं। इसके लिए कंपनियों से अनुबंध है। अस्पतालों को दवा खरीद का बजट जारी होता है। पोर्टल पर जरूरत की दवा उपलब्ध नहीं होने पर अस्पताल बाजार से भी दवा खरीद लेते हैं। आगामी तीन महीने के भीतर सरकारी अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई कारपोरेशन से हो जाएगी। अस्पतालों को बजट बंद हो जाएगा। कारपोरेशन अस्पतालों की मांग के अनुरूप दवाओं की सप्लाई करेगा। अस्पतालों को साल में दवा खरीद के लिए चार किश्तों में बजट जारी होता है। इस साल मात्र एक किश्त जारी हुई है। बाकी तीन किश्तें अस्पतालों के बजाए सीधे कारपोरेशन को चली जाएंगी।
विज्ञापन
कारपोरेशन के अस्तित्व में आने से पहले वर्तमान में दवाओं की सप्लाई करनी वाली कंपनियों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। कंपनियों को भुगतान फंसने का डर है। इसके चलते पोर्टल पर अधिकतर दवाएं गायब हैं। इसका असर सीधे अस्पतालों में मरीजों पर पड़ने लगा है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन दो हजार से अधिक ओपीडी होती है। 142 बेड में मरीज भर्ती रहते हैं। दवाओं की खपत काफी अधिक है। अस्पताल को 37 लाख रुपये की किश्त मिली है। मौसमी बदलाव से संक्रामक मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। दवाओं के संकट को देखते हुए मरीजों को दी जाने वाली दवाओं में कटौती कर दी है। हफ्ते के बजाए पांच दिन की दवाएं दी जा रही हैं। त्वचा रोगियों के लिए क्रीम और लोशन नहीं मिल रहा है। इससे मरीज भटकने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
- दवा की आपूर्ति बाधित होने लगी है। इसका असर मरीजों पर पड़ना शुरू हो गया है। अस्पताल प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था कर जैसे जैसे मरीजों को दवाओं का वितरण कर रहा है। - डा. राजेंद्र कुमार, एमएस