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Mirzapur News: महिला अस्पताल में घट गई प्रसव की संख्या, 1516 की कमी
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जिला महिला अस्पताल में बेहतर व्यवस्था न मिलने के कारण प्रसव के मामलों में कमी आ रही है। जिला महिला अस्पताल में अप्रैल 2023 से मार्च 2024 में 7155 प्रसव हुए थे। अप्रैल 2024 से मार्च 2025 में 5639 प्रसव हुए। जो पिछले वर्ष की तुलना में 1516 कम है।
अस्पताल में रात में आपरेशन से प्रसव की समस्या होने के साथ रविवार को भी प्रसव के लिए लोगों को परेशान होना पड़ता है। यही नहीं जिला महिला अस्पताल में अब तक आईसीयू नहीं बन सका है। जिससे गंभीर मरीजाें को वहां रखा जा सके।
आईसीयू न होने से आपरेशन से जिनका प्रसव हो रहा है। उनके भी जान को खतरा बना रहता है। आखिर इतने वर्ष से आईसीयू क्यों नहीं बन सका है।
मां विंध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबंद्ध जिला महिला अस्पताल में प्रसुताओं को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। महिला अस्पताल का नया भवन बनने के लिए जिला महिला अस्पताल एक स्थान से दूरे स्थान पर शिफ्ट हो गया पर व्यवस्थाएं नहीं बदली है।
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अस्पताल में रविवार के दिन और रात के समय आने वाले प्रसुताओं को समस्या का सामना करना पड़ता है। मेडिकल कालेज के अधीन होने के चलते यहां पर जिले की सबसे बेहतर सुविधा होनी चाहिए, पर रात के समय या रविवार को आने वाले मरीजों के कोई न कोई समस्या बताकर रेफर कर दिया जाता है।।
इसके बाद वहां मौजूद लोग मरीजों को बाहर निजी अस्पताल का नाम बताना शुरु कर देते है। निजी अस्पताल में जाने पर जिस मरीज को महिला अस्पताल में प्रसव के लिए मना किया गया रहता है। वहां पर आराम से उसका प्रसव हो जाता है।
इसके चलते ही जिला महिला अस्पताल में प्रसव की संख्या घटती जा रही है। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठकों में जो डाटा दिया गया। उसके मुताबिक जिला महिला अस्पताल में अप्रैल 2023 से मार्च 2024 में 7155 प्रसव हुआ था। अप्रैल 2024 से मार्च 2025 में 5639 प्रसव हुआ। जो पिछले वर्ष की तुलना में 1516 कम है।
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प्रोफेसर का पद है रिक्त
मिर्जापुर। जिला महिला अस्पताल में प्रोफेसर का एक पद है। जो काफी समय से रिक्त चल रहा है। अब तक किसी की तैनाती नहीं हुई है। एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर एसओडी डॉ. वंदना मौर्या है। बाकी दो असिस्टेंट प्रोफेसर है। दो सीनियर रेजिडेंट है। एनएचएम से दो डॉक्टर है। -
आईसीयू न होना बड़ी समस्या
बड़ी बात ये भी है कि जिला महिला अस्पताल में आईसीयू नहीं है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक प्रतिदिन आपरेशन से प्रसव होता है। आपरेशन से प्रसव होने पर आईसीयू की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में आईसीयू न होना स्वास्थ्य व्यवस्था की कमी है।
25 फरवरी को रामनगर सिकरी निवासी आशीष ने बताया कि वह अपनी पत्नी पूनम को लेकर जिला महिला अस्पताल में आया। वहां बताया गया कि डाक्टर नहीं है। काफी इंतजार के बाद भी डॉक्टर नहीं आए तो वह पत्नी को लेकर पास के अस्पताल में गया।
अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधा प्रदान किया जा रहा है। आपरेशन से भी प्रसव हो रहा है। रविवार को भी डाक्टर रहते है। आईसीयू अभी नहीं है। आईसीयू वाले या अन्य गंभीर मरीज को ही रेफर किया जाता है। कोई गड़बड़ी करते मिलेगा तो कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. वंदना मौर्या, एचओडी, जिला महिला अस्पताल
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अस्पताल में रात में आपरेशन से प्रसव की समस्या होने के साथ रविवार को भी प्रसव के लिए लोगों को परेशान होना पड़ता है। यही नहीं जिला महिला अस्पताल में अब तक आईसीयू नहीं बन सका है। जिससे गंभीर मरीजाें को वहां रखा जा सके।
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आईसीयू न होने से आपरेशन से जिनका प्रसव हो रहा है। उनके भी जान को खतरा बना रहता है। आखिर इतने वर्ष से आईसीयू क्यों नहीं बन सका है।
मां विंध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबंद्ध जिला महिला अस्पताल में प्रसुताओं को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। महिला अस्पताल का नया भवन बनने के लिए जिला महिला अस्पताल एक स्थान से दूरे स्थान पर शिफ्ट हो गया पर व्यवस्थाएं नहीं बदली है।
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अस्पताल में रविवार के दिन और रात के समय आने वाले प्रसुताओं को समस्या का सामना करना पड़ता है। मेडिकल कालेज के अधीन होने के चलते यहां पर जिले की सबसे बेहतर सुविधा होनी चाहिए, पर रात के समय या रविवार को आने वाले मरीजों के कोई न कोई समस्या बताकर रेफर कर दिया जाता है।।
इसके बाद वहां मौजूद लोग मरीजों को बाहर निजी अस्पताल का नाम बताना शुरु कर देते है। निजी अस्पताल में जाने पर जिस मरीज को महिला अस्पताल में प्रसव के लिए मना किया गया रहता है। वहां पर आराम से उसका प्रसव हो जाता है।
इसके चलते ही जिला महिला अस्पताल में प्रसव की संख्या घटती जा रही है। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठकों में जो डाटा दिया गया। उसके मुताबिक जिला महिला अस्पताल में अप्रैल 2023 से मार्च 2024 में 7155 प्रसव हुआ था। अप्रैल 2024 से मार्च 2025 में 5639 प्रसव हुआ। जो पिछले वर्ष की तुलना में 1516 कम है।
प्रोफेसर का पद है रिक्त
मिर्जापुर। जिला महिला अस्पताल में प्रोफेसर का एक पद है। जो काफी समय से रिक्त चल रहा है। अब तक किसी की तैनाती नहीं हुई है। एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर एसओडी डॉ. वंदना मौर्या है। बाकी दो असिस्टेंट प्रोफेसर है। दो सीनियर रेजिडेंट है। एनएचएम से दो डॉक्टर है। -
आईसीयू न होना बड़ी समस्या
बड़ी बात ये भी है कि जिला महिला अस्पताल में आईसीयू नहीं है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक प्रतिदिन आपरेशन से प्रसव होता है। आपरेशन से प्रसव होने पर आईसीयू की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में आईसीयू न होना स्वास्थ्य व्यवस्था की कमी है।
25 फरवरी को रामनगर सिकरी निवासी आशीष ने बताया कि वह अपनी पत्नी पूनम को लेकर जिला महिला अस्पताल में आया। वहां बताया गया कि डाक्टर नहीं है। काफी इंतजार के बाद भी डॉक्टर नहीं आए तो वह पत्नी को लेकर पास के अस्पताल में गया।
अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधा प्रदान किया जा रहा है। आपरेशन से भी प्रसव हो रहा है। रविवार को भी डाक्टर रहते है। आईसीयू अभी नहीं है। आईसीयू वाले या अन्य गंभीर मरीज को ही रेफर किया जाता है। कोई गड़बड़ी करते मिलेगा तो कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. वंदना मौर्या, एचओडी, जिला महिला अस्पताल