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Mirzapur News: मुकुट पूजन के साथ आज से शुरू होगी 189 साल पुरानी रामलीला

Sun, 14 Sep 2025 01:24 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 14 Sep 2025 01:24 AM IST
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The 189-year-old Ram Leela will begin today with the crown worship
श्रीराघवेन्द्र रामलीला कमेटी के तत्वावधान में चलने वाले 21 दिवसीय रामलीला का 14 सितंबर को मुकुट पूजन के साथ शुभारंभ होगा। रामनगर की रामलीला से प्रेरणा लेकर नगर में 189 वर्ष पूर्व यहां पर रामलीला का मंचन शुरू हुआ।
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शुरुआत के दिनों में रामलीला गंगेश्वरनाथ मुहल्ले में स्थित राघव जी मंदिर के पास सात दिनों तक व उसके बाद कबीर मठ पर 13 दिनों आयोजित होता रहा।
50 वर्षो तक लीला का मंचन यहां वहां होने के बाद गोला साहबराम में रामलीला के लिए दान में मिली भूमि पर रामलीला मंच तैयार कराकर स्थायी रूप से 21 दिनों तक लीला का मंचन शुरू हुआ जो अब तक निर्बाध रूप से निरंतर होता चला आ रहा है।
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इस लीला में 16 दिन की लीला मंच पर व पांच दिन की लीला जिसमें श्रीराम बारात, काली जी की जूलूस, सनक सनंदन नगर भ्रमण के साथ ही रावण पतला दहन (विजया दशमी) नगर के उसमानपुर स्थित लंका व भरत मिलाप की लीला टेकौर स्थित भरत मिलाप मंच पर होता है।
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मंचीय लीला के साथ ही विजया दशमी व भरत मिलाप की लीला को देखने के लिए आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही स्थानीय लीला प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ती है।
वर्ष 2005 में चुनार के रामबाग में चल रहे श्रीराम कथा के दौरान यहां के पात्रों द्वारा धनुष यज्ञ लीला का मंचन किया गया था। जिसका वर्णन प्रख्यात कथा वाचक संत मोरारी बापू ने मारिशस में किया था।
यह भी उल्लेखनीय है कि साहित्य पुरोधा पांडेय बेचन शर्मा उग्र ने भी इस लीला मंचन में जानकी का अभिनय किया था। कमेटी अध्यक्ष लक्ष्मीकांत पांडेय ने बताया कि 188 वर्षो से निर्बाध रूप से रामलीला का मंचन लीला प्रेमियों के सहयोग से होता चला आ रहा है।
इस बार लीला का आयोजन और भव्य होगा। कमेटी अध्यक्ष ने नगर के लोगों से तन मन धन से सहयोग की अपील किया है। रामलीला कमेटी के डायरेक्टर अविनाश अग्रवाल ने बताया कि पिता के जमाने से ही रामलीला से जुड़कर प्रभु श्रीराम के लीला मंचन के लिए पात्रों के पाठ को पूर्ण कराने का दायित्व निभा रहा हूं।

लीला के सभी पात्र स्थानीय होने के साथ ही सरकारी सेवा व व्यापार से जुड़े हुए हैं। दिन भर अपने व्यवसाय में व्यस्त रहते हैं और अर्द्धरात्रि तक 21 दिनों तक चलने वाले लीला मंचन में निःस्वार्थ भाव से अपना सहयोग प्रदान करते हैं।
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