मकर में सूर्य का अभिनंदन
शहर और ग्रामीण अंचलाें में स्थित गंगा पर भोर से स्नानार्थियों का रेला लगा रहा। ठंड की परवाह किए बगैर लोगों ने गंगा में डूबकी लगाई। नगर के बरियाघाट, कचहरीघाट, बदलीघाट, बाबाघाट, सुंदरघाट, दाऊजी घाट, पक्काघाट, संकठाघाट, नारघाट पर स्नानार्थियों की जबरदस्त भीड़ उमड़ी। गंगा पार नाव से जाकर स्नान करने की भी होड़ लगी रही। घाटाें पर महिलाआें को वस्त्र बदलने का प्रबंध नहीं होने से महिलाआें को असुविधा का सामना करना पड़ा। विंध्याचल के पक्काघाट, दीवानघाट, गुदाराघाट, अखाड़ाघाट, इमलीघाट, भैरोघाट, बाबूघाट, बलुआघाट और चुनार में मेड़िया घाट, शिवाला घाट, बालूघाट, किला घाट, शीतला घाट पर स्नान- दान किया गया।
मकर संक्रांति पर आसमान साफ रहा और धूप भी निकली। हवा भी चल रही थी। इससे पतंग उड़ाने वाले उत्साहित रहे। आसमान में चाराें तरफ रंगबिरंगी पतंगे अटखेलियां करती रहीं। वा काटा या काटा की आवाज से वातावरण गूंजता रहा। चाइनीज मंझा पर लगे प्रतिबंध के चलते लोगाें ने देशी डोर से ही काम चलाया। पतंग लूटने को लेकर कई जगह बच्चों में कहासुनी भी हुई, लेकिन बड़ों ने समझा बुझाकर मामला शांत कराया। नगर के साथ ही ग्राम्याचलों में भी बच्चाें ने जमकर पतंगबाजी की। शहर के बच्चों ने छत से पतंग उड़ाया वहीं गांव के बच्चे खेत-खलिहानों से अपनी डोर तानते देखे गए।