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अब ड्रम सीडर से किसानों ने शुरु की धान की खेती
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मिर्जापुर। खेतों में धान की नर्सरी डालने के बजाय अब किसान सीधे ड्रम सीडर के माध्यम से धान की खेतीकर अच्छी पैदावार कर सकते हैं। इससे जहां मजदूरों की कमी से मुक्ति मिलेगी, वहीं समय और पैसे दोनों बचेंगे। इस नई तकनीक का प्रयोग विकास खंड सीटी के ग्राम खुटहा मौनस में एक किसान द्वारा शुरू किया गया है। इस माध्यम से शुरू हुई खेती का उप कृषि निदेशक अशोक उपाध्याय मौके पर पहुंचकर जायजा लिया।
उप कृषि निदेशक से खुटहां मौनस गांव निवासी किसान बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि धान की सियाट्स-1 प्रजाति की बुवाई चार बीघा में ड्रम सीडर खेती कराई गई है। जो काफी किफायती और आसान है। ड्रम सीडर मशीन में बीज भरने के लिए 4 प्लास्टिक के खोखले ड्रम सरीके बने होते हैं। जो कि एक बेलन पर बंधे रहते हैं। बेलन के दोनों किनारे पर पहिए लगे हुए हैं, जिनका व्यास लगभग 60 सेंटीमीटर का होता है। ड्रम में दो पंक्तियों पर लगभग 8-9 मिलीमीटर व्यास के छिद्र बने हुए हैं, जिससे बीज गिरते हैं। इस मशीन के प्रयोग से मजदूरी की काफी बचत हो जाती है। ड्रम सीडर द्वारा एक बीघे की बुवाई करने पर दो मजदूर लगते हैं, जिनकी मजदूरी लगभग 600 रुपये होती है। रोपाई विधि से करने पर एक बीघे में 10 मजदूर लगते हैं, जिनकी मजदूरी लगभग तीन हजार रुपये होता है। इस प्रकार किसान को एक बीघे में 2400 रुपये की मजदूरी में बचत हो जाती है और उत्पादन भी रोपाई विधि के लगभग बराबर ही होता है। इस विधि से 12 से 15 क्विंटल प्रति बीघा धान प्राप्त हो जाता है। इस मौके पर जनपदीय सलाहकार डा. सुधीर श्रीवास्तव, तकनीकी सहायक विजय कुमार और किसान उपस्थित रहे।
इनसेट
बुवाई से पहले दो-तीन बार खेतों का करना पड़ता है पलेवा
मिर्जापुर। ड्रम सीडर मशीन द्वारा धान की बुवाई करने के लिए सबसे पहले खेत में पानी भर कर दो से तीन बार पलेवा करना पड़ता है। खेत में अच्छी तरह पाटा लगाकर समतल कर लेते हैं। इसके बाद पलेवा किए हुए खेत को 8 घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है। धान की बुवाई करने के कम से कम छह घंटे पहले खेत से पानी को निकाल दिया जाता है। बुवाई के समय खेत में केवल एक सेंटीमीटर पानी की पतली परत रहनी चाहिए। इससे खेत में पानी ज्यादा होने पर बीज पानी के साथ बहने ना पाए। बुवाई करने से पूर्व बीज को 10-12 घंटे भिगोकर पानी से निकाल कर रख लिया जाता है। उसके बाद जूट के बोरे में रखकर कपड़े से ढंक दी जाती है। जिससे बीज 10 से 12 घंटे में अंकुरित हो जाते हैं। बीज को ड्रम सीडर के बाक्स में एक तिहाई भरकर बाक्स को बंद करके बाद ड्रम सीडर को सामान्य गति से मैनुअल रूप से खेतों में खींचकर बुवाई की जाती है।
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वर्जन
ड्रम सीडर विधि से खेतों में हुई बुवाई के बाद लगातार खेत में पानी भरने की आवश्यकता नहीं होती है। इससे 20 से 25 प्रतिशत पानी की बचत होती है। रोपाई विधि की तुलना में सीधी बुवाई से धान की खेती करने में बीज की मात्रा भी कम लगती है। सीधी बुवाई द्वारा की गई फसल सामान्यत: एक सप्ताह पूर्व पककर तैयार हो जाती है। - अशोक उपाध्याय, उप कृषि निदेशक
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उप कृषि निदेशक से खुटहां मौनस गांव निवासी किसान बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि धान की सियाट्स-1 प्रजाति की बुवाई चार बीघा में ड्रम सीडर खेती कराई गई है। जो काफी किफायती और आसान है। ड्रम सीडर मशीन में बीज भरने के लिए 4 प्लास्टिक के खोखले ड्रम सरीके बने होते हैं। जो कि एक बेलन पर बंधे रहते हैं। बेलन के दोनों किनारे पर पहिए लगे हुए हैं, जिनका व्यास लगभग 60 सेंटीमीटर का होता है। ड्रम में दो पंक्तियों पर लगभग 8-9 मिलीमीटर व्यास के छिद्र बने हुए हैं, जिससे बीज गिरते हैं। इस मशीन के प्रयोग से मजदूरी की काफी बचत हो जाती है। ड्रम सीडर द्वारा एक बीघे की बुवाई करने पर दो मजदूर लगते हैं, जिनकी मजदूरी लगभग 600 रुपये होती है। रोपाई विधि से करने पर एक बीघे में 10 मजदूर लगते हैं, जिनकी मजदूरी लगभग तीन हजार रुपये होता है। इस प्रकार किसान को एक बीघे में 2400 रुपये की मजदूरी में बचत हो जाती है और उत्पादन भी रोपाई विधि के लगभग बराबर ही होता है। इस विधि से 12 से 15 क्विंटल प्रति बीघा धान प्राप्त हो जाता है। इस मौके पर जनपदीय सलाहकार डा. सुधीर श्रीवास्तव, तकनीकी सहायक विजय कुमार और किसान उपस्थित रहे।
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बुवाई से पहले दो-तीन बार खेतों का करना पड़ता है पलेवा
मिर्जापुर। ड्रम सीडर मशीन द्वारा धान की बुवाई करने के लिए सबसे पहले खेत में पानी भर कर दो से तीन बार पलेवा करना पड़ता है। खेत में अच्छी तरह पाटा लगाकर समतल कर लेते हैं। इसके बाद पलेवा किए हुए खेत को 8 घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है। धान की बुवाई करने के कम से कम छह घंटे पहले खेत से पानी को निकाल दिया जाता है। बुवाई के समय खेत में केवल एक सेंटीमीटर पानी की पतली परत रहनी चाहिए। इससे खेत में पानी ज्यादा होने पर बीज पानी के साथ बहने ना पाए। बुवाई करने से पूर्व बीज को 10-12 घंटे भिगोकर पानी से निकाल कर रख लिया जाता है। उसके बाद जूट के बोरे में रखकर कपड़े से ढंक दी जाती है। जिससे बीज 10 से 12 घंटे में अंकुरित हो जाते हैं। बीज को ड्रम सीडर के बाक्स में एक तिहाई भरकर बाक्स को बंद करके बाद ड्रम सीडर को सामान्य गति से मैनुअल रूप से खेतों में खींचकर बुवाई की जाती है।
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ड्रम सीडर विधि से खेतों में हुई बुवाई के बाद लगातार खेत में पानी भरने की आवश्यकता नहीं होती है। इससे 20 से 25 प्रतिशत पानी की बचत होती है। रोपाई विधि की तुलना में सीधी बुवाई से धान की खेती करने में बीज की मात्रा भी कम लगती है। सीधी बुवाई द्वारा की गई फसल सामान्यत: एक सप्ताह पूर्व पककर तैयार हो जाती है। - अशोक उपाध्याय, उप कृषि निदेशक