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हत्या में10 वर्ष कैद
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Wed, 01 Feb 2017 12:24 AM IST
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कोर्ट
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अपर सत्र न्यायाधीश ईसी एक्ट पीएन श्रीवास्तव ने गैर इरादतन हत्या के आरोपी संदीप तिवारी पुत्र मंशाराम तिवारी निवासी पखवैया थाना चील्ह का दोषसिद्ध पाए जाने पर मंगलवार को दस वर्ष की कड़ी कैद और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
चील्ह थाना क्षेत्र के पखवैया गांव निवासिनी वादिनी मुकदमा बेबी तिवारी पत्नी मिथिलेश तिवारी ने 26 जुलाई 2010 तहरीर दी कि 12 जुलाई 2010 को लगभग साढ़े आठ बजे रात पैसे के लेनदेन को लेकर हुए विवाद के दौरान जेठ मंशाराम तिवारी तथा उनके पुत्र संदीप तिवारी ने बेबी व मिथिलेश के ऊपर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी थी। गंभीर रूप से झुलसे पति मिथिलेश को इलाहाबाद के स्वरूप रानी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था।
मजिस्ट्रेट को बयान देने के बाद मिथिलेश की मौत हो गई थी। पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध गैरइरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर विवेचना के बाद आरोपपत्र दायर किया। अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी केके पांडेय ने आठ गवाह प्रस्तुत किए। संदीप तिवारी के पिता मंशाराम तिवारी के फरार होने के दशा में उनकी पत्रावली अलग कर दी गई। बचाव पक्ष की ओर से कोई मौखिक या अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। न्यायालय ने आरोपी संदीप का दोषी मानते हुए। दस वर्ष सश्रम कारावास व दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
चील्ह थाना क्षेत्र के पखवैया गांव निवासिनी वादिनी मुकदमा बेबी तिवारी पत्नी मिथिलेश तिवारी ने 26 जुलाई 2010 तहरीर दी कि 12 जुलाई 2010 को लगभग साढ़े आठ बजे रात पैसे के लेनदेन को लेकर हुए विवाद के दौरान जेठ मंशाराम तिवारी तथा उनके पुत्र संदीप तिवारी ने बेबी व मिथिलेश के ऊपर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी थी। गंभीर रूप से झुलसे पति मिथिलेश को इलाहाबाद के स्वरूप रानी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था।
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मजिस्ट्रेट को बयान देने के बाद मिथिलेश की मौत हो गई थी। पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध गैरइरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर विवेचना के बाद आरोपपत्र दायर किया। अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी केके पांडेय ने आठ गवाह प्रस्तुत किए। संदीप तिवारी के पिता मंशाराम तिवारी के फरार होने के दशा में उनकी पत्रावली अलग कर दी गई। बचाव पक्ष की ओर से कोई मौखिक या अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। न्यायालय ने आरोपी संदीप का दोषी मानते हुए। दस वर्ष सश्रम कारावास व दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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