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Mirzapur News: आठ भ्रूण का एक साथ प्रत्यारोपण, इस बार अधिक बछिया के जन्म की उम्मीद

Wed, 03 Sep 2025 01:59 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 03 Sep 2025 01:59 AM IST
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Eight embryos were transplanted simultaneously, this time more calves are expected to be born
पशु चिकित्सा व पशुपालन विज्ञान संकाय में जन्मी चौथी बछिया। स्रोत- द​क्षिणी परिसर
मिर्जापुर। राजीव गांधी दक्षिणी परिसर के पशु चिकित्सा व पशुपालन विज्ञान संकाय में तीसरी बार अधिक संख्या में आठ भ्रूण का प्रत्यारोपण किया गया है। इससे पहले सात से आठ बार भ्रूण प्रत्यारोपण किया गया है। इसमें एक बार में 12 और 15 भ्रूण का प्रत्यारोपण किया गया था। अब तक चार बछिया का जन्म हो चुका है। इस बार आठ भ्रूण का प्रत्यारोपण किया गया है। इस बार अधिक बछिया के जन्म की उम्मीद है।
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आठ अगस्त को दो उत्कृष्ट देशी साहीवाल गायों से मल्टीपल ओव्यूलेशन एंड एम्ब्रियो ट्रांसफर (एमओईटी) पद्धति द्वारा कुल 31 भ्रूण प्राप्त किए गए थे। इसमें आठ भ्रूण उच्च गुणवत्ता के प्रत्यारोपण करने योग्य पाए गए थे। इन आठ भ्रूण का कम दूध देने वाली सरोगेट गाय में सफल प्रत्यारोपण किया गया। डॉक्टरों की टीम पहले सात बार प्रत्यारोपण कर चुकी है। अधिक संख्या में तीसरी पर प्रत्यारोपण किया गया है। इससे पहले एक बार 12 और 15 भ्रूण का प्रत्यारोपण किया गया था। इसमें 12 प्रत्यारोपण में एक और 15 प्रत्यारोपण में दो बछिया का जन्म हुआ था। परियोजना का नेतृत्व कर रहे डॉ. मनीष कुमार ने बताया कि इस बार आठ भ्रूण का सफल प्रत्यारोपण किया गया है। अभी तक सब सही है। उम्मीद है कि इस बार जो आठ प्रत्योरापण हुआ है। उससे अधिक बछिया के जन्म की उम्मीद है।
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साहीवाल नस्ल की चौथी बछिया ने दिया जन्म
मिर्जापुर। देशी पशुधन नस्लों के संरक्षण के निरंतर प्रयास के पशु चिकित्सा व पशुपालन विज्ञान संकाय में परियोजना के तहत चौथी साहीवाल बछिया का जन्म भ्रूण स्थानांतरण तकनीक से हुआ है। 29 अगस्त को एक सरोगेट गाय ने स्वस्थ 22.2 किलोग्राम वजन की साहीवाल बछिया को जन्म दिया है। इस प्रक्रिया में लिंग-परिक्षित वीर्य का प्रयोग किया गया। जिससे मादा बछिया का जन्म संभव हुआ है।
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प्रमुख अन्वेषक डॉ. मनीष कुमार ने बताया कि इस तकनीक से पूर्व में जन्मे तीनों बछिया स्वस्थ हैं। सामान्य विकास दर से बढ़ रही हैं। अब इस नई बछिया के जन्म से परियोजना की सफलता और निरंतरता स्पष्ट हो रही है। जो यह सिद्ध करता है कि सहायक प्रजनन तकनीक देशी नस्लों की आनुवंशिक क्षमता को और बेहतर बनाने में अत्यंत प्रभावी है। बताया कि डॉ. कौस्तुभ किशोर सराफ और डॉ. अजीत सिंह के सहयोग से उनकी टीम उन्नत प्रजनन तकनीकों को अपनाने और किसानों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत है। जिससे किसानों की आर्थिक उन्नति के साथ-साथ देशी नस्लों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके। इस उपलब्धि पर कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. यूपी सिंह, आचार्य प्रभारी प्रो. वीके मिश्रा, पशु चिकित्सा व पशु विज्ञान संकाय के डीन प्रो. अमित राज गुप्ता ने कार्य को सराहा। कहा कि भ्रूण स्थानांतरण तकनीक से आनुवंशिक सुधार की गति तेज होगी, दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा, लागत घटेगी और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
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