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प्रदूषण के चलते जल, जंगल और जमीन को खतरा
ब्यूरो/अमर उजाला, मिर्जापुर।
Updated Sun, 05 Jun 2016 12:34 AM IST
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कई राज्य हैं प्रदुषित
- फोटो : Getty
पर्यावरण प्रदूषण के चलते जल जंगल जमीन के साथ ही मनुष्य एवं अन्य जीव भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। वातावरण में बढ़ते जहरीली गैस के चलते लोगाें को सांस लेने में दिक्कतें हो रही हैं, वहीं शुद्ध पानी भी नहीं मिल रहा है। मिट्टी में रासायनिक तत्व मिल जाने से फलों और अनाजों में जहरीले तत्व पाए जाने लगे है। गंगा में रोज हजारों क्यूसेक मल जल डाले जा रहे हैं।
जिले में लगभग 270 ईट भट्ठे बगैर अनापत्ति प्रमाण पत्र लिए ही संचालित हो रहे हैं।
इनसे निकलने वाला काला धुआं पर्यावरण को काफी दूषित कर रहा है। फिर भी इनपर पाबंदी नहीं लग पा रही है। अधिकारियों की मिलीभगत से भट्ठा मालिक अपने भट्ठों को धड़ल्ले से चला रहे हैं। जिन पर ना खनिज विभाग का ध्यान जा रहा है ना ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कोई कार्रवाई की जा रही। थोड़े से फायदे लोगों के जीवन को खतरे में डालते जा रहे है।
दूषित जल व दूषित पर्यावरण के चलते कोयल, गौरैया, बाझ, गिद्ध, गिलर, सियार, भालू, काला हिरन समेत अन्य पशु पक्षी विलुप्त होते जा रहे हैं। बता दें कि विश्व भर में पर्यावरण को सुरक्षित एवं स्वच्छ बनाने के लिए पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया रहा है। पर्यावरण को कैसे स्वच्छ बनाया जाए इसपर मंथन जारी है।
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जिले में लगभग 270 ईट भट्ठे बगैर अनापत्ति प्रमाण पत्र लिए ही संचालित हो रहे हैं।
इनसे निकलने वाला काला धुआं पर्यावरण को काफी दूषित कर रहा है। फिर भी इनपर पाबंदी नहीं लग पा रही है। अधिकारियों की मिलीभगत से भट्ठा मालिक अपने भट्ठों को धड़ल्ले से चला रहे हैं। जिन पर ना खनिज विभाग का ध्यान जा रहा है ना ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कोई कार्रवाई की जा रही। थोड़े से फायदे लोगों के जीवन को खतरे में डालते जा रहे है।
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दूषित जल व दूषित पर्यावरण के चलते कोयल, गौरैया, बाझ, गिद्ध, गिलर, सियार, भालू, काला हिरन समेत अन्य पशु पक्षी विलुप्त होते जा रहे हैं। बता दें कि विश्व भर में पर्यावरण को सुरक्षित एवं स्वच्छ बनाने के लिए पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया रहा है। पर्यावरण को कैसे स्वच्छ बनाया जाए इसपर मंथन जारी है।
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