{"_id":"5c59d90ebdec2213dd6db523","slug":"81549392142-mirzapur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुप्त नवरात्र के पहले दिन चार लाख दर्शनार्थियों ने किया मां का दर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुप्त नवरात्र के पहले दिन चार लाख दर्शनार्थियों ने किया मां का दर्शन
विज्ञापन
विंध्याचल। गुप्त नवरात्र के प्रथम दिन चार लाख भक्तों ने मां विंध्यवासिनी का दर्शन पूजन किया। आदि शक्ति मां विंध्यवासिनी देवी के दरबार में मंगलवार की भोर में ही मंगला आरती से ही मंदिर में माता के भव्य स्वरूप का दर्शन पूजन करने के लिए श्रद्धालुओं के आने का क्रम शुरू हो गया था जो देर शाम तक जारी रहा।
गंगा स्नान करने के बाद विंध्य दरबार में पहुंचे नरनारियों ने विधिवत दर्शन पूजन कर मंगल कामना की। घंटा घड़ियाल, शंख और पहाड़ा वाली के जयकारे से पूरा वातावरण देवीमय हो रहा था। नारियल, चुनरी, माला-फूल और प्रसाद चढ़ाकर देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने दर्शन पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की। देवी धाम पहुंचने के बाद किसी ने झांकी से तो किसी ने गर्भगृह में जाकर दर्शन पूजन किया। मां का दर्शन पूजन करने के उपरांत भक्तों ने मंदिर के ऊपर गुंबद और हवन कुंड की परिक्रमा कर पुण्य के भागी बने। इसी क्रम में भक्तों ने मंदिर में विराजमान महाकाली, मां दुर्गा, पंचमुखी महादेव, मां सरस्वती देवी, मां शीतला, महालक्ष्मी, दक्षिण मुखी हनुमान, राधा कृष्ण, अन्यपूर्णा देवी, बटुक भैरव सहित मंदिरों में जाकर शीश नवाया। मां का दर्शन पूजन करने के बाद भक्तों ने विंध्य धाम कि गलियों में सजी दुकानों पर जाकर अपने अपने जरूरत के वस्तु की खरीदारी की। पुलिस के जवान के साथ पीएससी सहित श्री विंध्य पंडा समाज के पदाधिकारी सहित श्री विंघ्य पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी और मंत्री भानू पाठक मंदिर सुरक्षा व्यवस्था प्रभारी राघवेंद्र सिंह भक्तों की सेवा में तत्पर रहे।
गुप्त नवरात्र के प्रथम दिन रोडवेज परिसर, रेलवे स्टेशन, प्राइवेट बस स्टैंड एवं समस्त प्राइवेट वाहन स्टैंड सहित होटल धर्मशाला लाज रात से ही भक्तों का सिलसिला शुरू हो गया। कही भी कोई जगह नहीं बचीथी। जो देर रात तक आने का क्रम चलता रहा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई स्थानों पर वाहन स्टैंड बनाए गए थे। बड़े वाहन और छोटे वाहन को स्टैंड पर ही खड़ी करने के लिए पुलिस के जवान चप्पे-चप्पे चौराहे चौराहे पर तैनात किए गए थे।
विज्ञापन
नहीं की गई थी बैरीकेडिंग
विंध्य धाम के गंगा के कई घाट पर बैरिकेडिंग नहीं लगाई गई थी, न ही महिलाओं को वस्त्र बदलने की व्यवस्था की गई थी। गंगा घाटों को सौ वाट के बल्ब से जगमग किया गया था लेकिन गोदारा घाट, अखाड़ा घाट पर सन्नाटा पसरा रहा। वहां प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं थी। बिजली के अंधेरे में भक्तों ने गंगा स्नान किया।
विज्ञापन
गंगा स्नान करने के बाद विंध्य दरबार में पहुंचे नरनारियों ने विधिवत दर्शन पूजन कर मंगल कामना की। घंटा घड़ियाल, शंख और पहाड़ा वाली के जयकारे से पूरा वातावरण देवीमय हो रहा था। नारियल, चुनरी, माला-फूल और प्रसाद चढ़ाकर देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने दर्शन पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की। देवी धाम पहुंचने के बाद किसी ने झांकी से तो किसी ने गर्भगृह में जाकर दर्शन पूजन किया। मां का दर्शन पूजन करने के उपरांत भक्तों ने मंदिर के ऊपर गुंबद और हवन कुंड की परिक्रमा कर पुण्य के भागी बने। इसी क्रम में भक्तों ने मंदिर में विराजमान महाकाली, मां दुर्गा, पंचमुखी महादेव, मां सरस्वती देवी, मां शीतला, महालक्ष्मी, दक्षिण मुखी हनुमान, राधा कृष्ण, अन्यपूर्णा देवी, बटुक भैरव सहित मंदिरों में जाकर शीश नवाया। मां का दर्शन पूजन करने के बाद भक्तों ने विंध्य धाम कि गलियों में सजी दुकानों पर जाकर अपने अपने जरूरत के वस्तु की खरीदारी की। पुलिस के जवान के साथ पीएससी सहित श्री विंध्य पंडा समाज के पदाधिकारी सहित श्री विंघ्य पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी और मंत्री भानू पाठक मंदिर सुरक्षा व्यवस्था प्रभारी राघवेंद्र सिंह भक्तों की सेवा में तत्पर रहे।
विज्ञापन
गुप्त नवरात्र के प्रथम दिन रोडवेज परिसर, रेलवे स्टेशन, प्राइवेट बस स्टैंड एवं समस्त प्राइवेट वाहन स्टैंड सहित होटल धर्मशाला लाज रात से ही भक्तों का सिलसिला शुरू हो गया। कही भी कोई जगह नहीं बचीथी। जो देर रात तक आने का क्रम चलता रहा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई स्थानों पर वाहन स्टैंड बनाए गए थे। बड़े वाहन और छोटे वाहन को स्टैंड पर ही खड़ी करने के लिए पुलिस के जवान चप्पे-चप्पे चौराहे चौराहे पर तैनात किए गए थे।
विज्ञापन
नहीं की गई थी बैरीकेडिंग
विंध्य धाम के गंगा के कई घाट पर बैरिकेडिंग नहीं लगाई गई थी, न ही महिलाओं को वस्त्र बदलने की व्यवस्था की गई थी। गंगा घाटों को सौ वाट के बल्ब से जगमग किया गया था लेकिन गोदारा घाट, अखाड़ा घाट पर सन्नाटा पसरा रहा। वहां प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं थी। बिजली के अंधेरे में भक्तों ने गंगा स्नान किया।