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जीरो अमाउंट टिकट मामले की खुलने लगी परत
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 15 Jun 2016 02:19 AM IST
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रोडवेज बस
- फोटो : अमर उजाला
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मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (एमसीटीएसएल) में संविदा परिचालकों द्वारा जीरो अमाउंट टिकट के जरिये किए गए गोलमाल की परतें खुलने लगी हैं। पहली जांच सूची में पकड़े गए 10 परिचालकों ने 25 हजार 440 जीरो अमाउंट टिकटों के जरिये कंपनी को करीब 4 लाख का चूना लगाया है।
यह सूची पांच हजार से ज्यादा का घपला करने वाले परिचालकों की है। दूसरी सूची एक से पांच हजार रुपये का घपला करने वाले परिचालकों की तैयार की जा रही है। कंपनी एमडी ने पकड़े गए परिचालकों को रिकवरी कर संविदा समाप्त के नोटिस जारी कर दिए हैं।
यूपीए सरकार ने वर्ष 2010 में जेएनएनयूआरएम योजना के तहत शहर के लिए 120 सिटी बसें उपलब्ध कराई थीं। नगर विकास विभाग को मिली इन बसों का संचालन एमसीटीएसएल कंपनी बनाकर रोडवेज द्वारा कराया जा रहा है। कंपनी में लगे संविदा परिचालकों ने इलेक्ट्रानिक टिकट मशीन से यात्रियों को जीरो अमाउंट टिकट के जरिये लाखों रुपये का घपला कर लिया।
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अमर उजाला माय सिटी ने गत 6 जून के अंक में ‘जीरो अमाउंट टिकटों से लाखो का फटका’ शीर्षक से खबर छापकर इस घपले का खुलासा किया था। इसके बाद विभाग में खलबली मच गई थी। कंपनी के एमडी संदीप लाहा ने मामले की गहराई से जांच कराई तो घपले की परत खुलने लगी।
कंपनी ने पांच हजार रुपये से अधिक का घपला करने वाले परिचालकों की जांच कराई तो इसमें 10 नाम सामने आए। जनवरी 2015 से मई 2016 तक 17 महीनों के अंदर इन 10 परिचालकों ने 25 हजार 440 टिकट जीरो अमाउंट के देकर 3 लाख 91 हजार 219 रुपये का गोलमाल किया। वहीं इससे पहले मामले में 9 परिचालक और 6 टीआई को रूट से हटा दिया था। इसमें से 4 परिचालकों की संविदा समाप्त की जा चुकी है।
गोलमाल करने वाले संविदा परिचालकों की सूची
परिचालक जीरो अमाउंट टिकट धनराशि
नीरज ढाका 1122 15725
नरेश कुमार 2865 46772
अजय अग्रवाल 535 8865
सचिन 4313 62701
श्रीवेश 737 16375
पुनीत 4313 62701
सचिन कुमार 4883 69463
संतवीर 2525 44417
सचिन शर्मा 2630 49267
रामनरेश 1517 15013
.......................................................................................................
कुल 25440 391219
........................................................................................................
मामले को दबा रहे अधिकारी
मामले की शिकायत करने वाले रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद् के एमसीटीएसएल शाखा अध्यक्ष विकास राणा ने कहा कि अधिकारी मामले की लीपापोती करने में लगे हैं। केवल 10 परिचालकों की सूची निकलवाई गई हैं जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान हैं। घपला इससे कही बड़ा है। अधिकारी मामले को दबाने में लगे हैं क्योंकि इसमें अधिकारी भी शामिल हैं।
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यह सूची पांच हजार से ज्यादा का घपला करने वाले परिचालकों की है। दूसरी सूची एक से पांच हजार रुपये का घपला करने वाले परिचालकों की तैयार की जा रही है। कंपनी एमडी ने पकड़े गए परिचालकों को रिकवरी कर संविदा समाप्त के नोटिस जारी कर दिए हैं।
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यूपीए सरकार ने वर्ष 2010 में जेएनएनयूआरएम योजना के तहत शहर के लिए 120 सिटी बसें उपलब्ध कराई थीं। नगर विकास विभाग को मिली इन बसों का संचालन एमसीटीएसएल कंपनी बनाकर रोडवेज द्वारा कराया जा रहा है। कंपनी में लगे संविदा परिचालकों ने इलेक्ट्रानिक टिकट मशीन से यात्रियों को जीरो अमाउंट टिकट के जरिये लाखों रुपये का घपला कर लिया।
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अमर उजाला माय सिटी ने गत 6 जून के अंक में ‘जीरो अमाउंट टिकटों से लाखो का फटका’ शीर्षक से खबर छापकर इस घपले का खुलासा किया था। इसके बाद विभाग में खलबली मच गई थी। कंपनी के एमडी संदीप लाहा ने मामले की गहराई से जांच कराई तो घपले की परत खुलने लगी।
कंपनी ने पांच हजार रुपये से अधिक का घपला करने वाले परिचालकों की जांच कराई तो इसमें 10 नाम सामने आए। जनवरी 2015 से मई 2016 तक 17 महीनों के अंदर इन 10 परिचालकों ने 25 हजार 440 टिकट जीरो अमाउंट के देकर 3 लाख 91 हजार 219 रुपये का गोलमाल किया। वहीं इससे पहले मामले में 9 परिचालक और 6 टीआई को रूट से हटा दिया था। इसमें से 4 परिचालकों की संविदा समाप्त की जा चुकी है।
गोलमाल करने वाले संविदा परिचालकों की सूची
परिचालक जीरो अमाउंट टिकट धनराशि
नीरज ढाका 1122 15725
नरेश कुमार 2865 46772
अजय अग्रवाल 535 8865
सचिन 4313 62701
श्रीवेश 737 16375
पुनीत 4313 62701
सचिन कुमार 4883 69463
संतवीर 2525 44417
सचिन शर्मा 2630 49267
रामनरेश 1517 15013
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कुल 25440 391219
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मामले को दबा रहे अधिकारी
मामले की शिकायत करने वाले रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद् के एमसीटीएसएल शाखा अध्यक्ष विकास राणा ने कहा कि अधिकारी मामले की लीपापोती करने में लगे हैं। केवल 10 परिचालकों की सूची निकलवाई गई हैं जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान हैं। घपला इससे कही बड़ा है। अधिकारी मामले को दबाने में लगे हैं क्योंकि इसमें अधिकारी भी शामिल हैं।