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'सेना करती रही इंतजार और गुजरात जलता रहा, बच सकती थीं कई जान'

Fri, 12 Oct 2018 03:58 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Fri, 12 Oct 2018 03:58 PM IST
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Zameer uddin shah his wrote autobiography the Government Muslim on Gujarat Riots
फाइल फोटो

‘तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध के बावूजद गुजरात दंगों के दौरान वाहनों की प्रतीक्षा करते हुए सेना ने एक महत्वपूर्ण दिन गंवा दिया था। एयरफील्ड पर सेना वाहनों और आवश्यक सामान की प्रतीक्षा करती रही और इस दौरान गुजरात जलता रहा। इस अवधि में कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।’ यह दावा भारतीय सेना के डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ पद से सेवानिवृत्त और तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल जमीरुद्दीन शाह ने अपनी आत्मकथा ‘द सरकारी मुसलमान’ के एक अध्याय में किया है, जो गुजरात दंगों के दौरान सैन्य ऑपरेशन पर केंद्रित है। इसका विमोचन 13 अक्टूबर को दिल्ली में पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी करेंगे। पुस्तक के समर्थन में तत्कालीन जनरल एस. पद्मनाभन ने भी लिखा है।

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अमर उजाला के पास 212 पेज वाली इस पुस्तक की प्रति है, जिसके 7वें अध्याय में 114वें पेज पर ‘ऑपरेशन पराक्रम एंड ऑपरेशन अमन’ में शाह ने गुजरात दंगों के दौरान अपने अनुभव लिखे हैं। शाह ने विशेष बातचीत में कहा कि 2002 में 28 फरवरी से लेकर 1 मार्च की रात तक वे 3000 फौजी जवानों के साथ एयरफील्ड पर वाहनों और आवश्यक संसाधनों का इंतजार करते रहे। वे कहते हैं, ‘हम जैसलमेर के एक इलाके में स्ट्राइक कोर डिविजन में तैनात थे और जोधपुर से 28 फरवरी को 7 बजे से 10 बजे तक वायुसेना की 40 उड़ानों के जरिए अहमदाबाद एयरफील्ड पर पहुंचे थे। विमान जब लैंड कर रहे थे तो आकाश से अहमदाबाद में आग की लपटें नजर आ रही थीं। बकौल शाह, वे 1 मार्च को मुख्यमंत्री आवास पर पहुंचे, जहां नरेंद्र मोदी के साथ तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस भी थे। उनसे आग्रह पर सेना को गाड़ियों के साथ ही अन्य संसाधन उपलब्ध कराए गए। शाह के मुताबिक सेना ने 48 घंटों में दंगों पर पूरी तरह से काबू पा लिया था, जबकि गुजरात पुलिस तमाशाई बनी हुई थी या एकपक्षीय कार्रवाई कर रही थी।
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सरकारी मुसलमान क्यों?
40 साल भारतीय सेना में सेवाएं देने वाले लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) जमीरुद्दीन शाह कहते हैं कि सरकारी नौकरियों में दो तरह के मुसलमान होते हैं। एक वे जो सरकार के इशारे पर जमीर बेचते हैं और दूसरे वे जो नियम कानून के तहत अपना काम करते हैं। ऑपरेशन अमन के दौरान उन पर भी सवाल उठाए गए थे, लेकिन उन्होंने अपना काम ईमानदारी से किया। गुजरात पुलिस जो छह दिन में नहीं कर पाई, वह सेना ने 48 घंटे में कर दिखाया था।

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विवादों से पुराना नाता
एएमयू वीसी रहते हुए शाह के बयानों को लेकर कई बार विवाद हुआ। उन्होंने एक बार कहा था कि अपनी महिलाओं को दास बनाकर रखना मुसलमानों के पिछड़ेपन का कारण है, जो रमजान और नमाज के दौरान काम नहीं करते हैं। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को लेकर भी उन्होंने टिप्पणी की थी, जिसे ईरानी ने ‘बेटियों का अपमान’ बताया था। केंद्रीय लाइब्रेरी में छात्राओं को लेकर उनके बयान पर हाईकोर्ट ने नोटिस भी जारी किया था। एएमयू वीसी पद पर उनकी नियुक्ति भी विवादित हुई थी और इसे चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने भी नोटिस जारी किया था। 

सेना के जूम रहे हैं शाह
- जमीरुद्दीन शाह को सेना में ‘जूम शाह’ के नाम से पुकारा जाता था
- तीन साल 2012 तक सशस्त्र बल ट्रिब्यूनल में प्रशासनिक सदस्य रहे
- पांच साल 2017 तक अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वीसी रह चुके
- परम विशिष्ट सेवा, विशिष्ट सेवा और सेना मेडल से सम्मानित किए गए
- रक्षा विज्ञान में मास्टर डिग्री और पीएचडी की उपाधि भी इन्होंने प्राप्त की
- सऊदी अरब में भारतीय सैन्य अताशे के रूप में राजनयिक मिशन पर रहे
- मेरठ के सरधना में ननिहाल में इनका बचपन गुजरा और पैतृक संपत्ति है
- फिल्म अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के भाई हैं और उनसे दो साल बड़े हैं
- एएमयू वीसी पद पर रहते हुए कई बार विवादित बयानों से सुर्खियों में रहे

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