विश्व सिर की चोट जागरूकता दिवस आज : हल्के में न लें सिर की चोट, हो सकता है भारी नुकसान
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सिर की चोट अगर मामूली भी है तो इसे कतई हल्के में न लें, नहीं तो यह भारी नुकसान पहुंचा सकती है। कई बार सिर की चोट (हेड इंजरी) लगने पर खून भी नहीं निकलता। लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। गंभीर बात यह है कि सिर की यह चोट कई दिनों बाद असर दिखाती है। कुछ मामलों में तो यह कई साल बाद असर दिखाती है। ऐसे में ऐसे में इसकी अनदेखी करना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। यह वजह है कि लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 20 मार्च को विश्व सिर की चोट जागरूकता दिवस या वर्ल्ड हेड इंजरी अवेयरनेस डे मनाया जाता है।
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि इमरजेंसी में हर माह 100 से ज्यादा केस सड़क दुर्घटनाओं के आते हैं। इनमें से जिनकी मृत्यु होती है, उनमें 65 फीसदी से ज्यादा सिर में चोट लगने के होते हैं। झगड़े में होने वाले मारपीट में भी मरने वाले लोगों में सिर की चोट के पीड़ित ज्यादा होते हैं।
न्यूरो सर्जन डॉ. अमित बिंदल ने बताया कि सिर पर चोट लगने के बाद अगर खून न निकले तो भी निश्चिंत न हों। यह काफी खतरनाक होता है। कई बार तो इसका असर 48 से 96 घंटे बाद नजर आता है। मरीज को चक्कर आना शुरू होता है, उल्टी होती है और वह कोमा में चला जाता है।
ऐसे में तत्काल न्यूरो सर्जन से इलाज कराना चाहिए। सिर पर चोट लगने के कई दुष्प्रभाव हैं। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि राणा ने बताया कि सिर पर चोट लगने का असर 10 साल बाद तक सामने आता है। खेलते हुए या किसी अन्य कारण से सिर पर चोट लग जाती है। जवानी में ही याददाश्त कमजोर होने की बड़ी वजह सिर की चोट होती है। इसके कारण डिमेंशिया जैसी बीमारी होती है।
सिर पर लगे गंभीर चोट तो करें ये उपाय
- मरीज को करवट से लिटा दें
- सिरहाना ऊंचा कर दें
- खून बह रहा हो तो उस जगह पर रुमाल लगाएं
- प्रेशर से खून का बहाव कम करें
- मरीज को कुछ भी खिलाएं-पिलाएं नहीं
- मरीज को एक जगह से दूसरी जगह पर स्ट्रेचर पर शिफ्ट करें
- मौके पर प्राथमिक उपचार दें
ऐसे करें सिर की चोट से बचाव
- सिर की चोट का प्रमुख कारण सड़क हादसे हैं
- दो पहिया वाहन चलाते समय हेल्मेट जरूर पहनें
- वाहन धीमी गति से चलाएं
- कार चलाते समय सीट बेल्ट लगाएं
- क्रिकेट खेलते समय हेलमेट जरूर पहनें
सिर में गंभीर चोट के लक्षण
- मिर्गी का दौरा आना
- उल्टी होना
- दिमाग में सूजन होना
- दिमाग में पानी का दबाव बढ़ना
- याददाश्त कम होना
- सिरदर्द
- चक्कर आना
- कम सुनाई देना
- नींद न आना
- चलने में परेशानी होना