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जीत मिली पर कलह की पोल खुली
Fri, 24 May 2019 03:47 AM IST
Gaurav sharma
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Gaurav sharma
Updated Fri, 24 May 2019 03:47 AM IST
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राजनीति
- फोटो : अमर उजाला
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लोकसभा चुनाव 2014 और 2019 के आंकड़ों पर अगर गौर करें तो भाजपा संगठन वोट बैंक को कैश नहीं कर पाया। इसके अलावा भाजपा के अंदरूनी झगड़े ने भी कहीं न कहीं झटका दिया। सिर्फ कैंट विधानसभा ही ऐसी रही, जो भाजपा की न केवल इज्जत बचाने में कामयाब रही, बल्कि जीत के द्वार पर भी पहुंचा दिया।
पिछले लोकसभा चुनाव में कुल 1761618 मतदाता थे, जिनमें से 1108171 वोट डाले गए थे। इस बार लोकसभा चुनाव में 18.88 लाख वोट थे, जिनमें 12,12,076 ने मतदान किया था। ऐसे में दोनों चुनाव के मतदान के रुझान पर अगर गौर करें तो भाजपा संगठन मतदान के दिन कहीं न कहीं पूरी तरह फेल नजर आया। अहम बात ये रही कि भाजपा को सबसे बड़ा झटका शहर विधानसभा में लगा, जहां पर पिछले चुनाव की तुलना में गठबंधन प्रत्याशी ने अच्छी बढ़त बनाई। आमने सामने की भिड़ंत में तय था कि मुकाबला करीबी होगा, लेकिन इतना करीबी होगा यह किसी ने नहीं सोचा था। वर्चस्व की लड़ाई में मुस्लिमों के वोट बंटने की उम्मीद संजोए भाजपाइयाें का सपना टूट गया और मुस्लिम मतों का पूरी तरह एकतरफा ध्रुवीकरण रहा। इसके साथ ही अनुसूचित जाति के मतदाताओं ने भी बसपा प्रत्याशी के पक्ष में एकजुट होकर वोट डाले। लेकिन भाजपा अपने वोटरों को घर से निकालने में ही कामयाब नहीं हो सकी। यदि भाजपा के पक्ष में कैंट विधानसभा में थोड़ा भी मतदान और कम हो जाता तो भाजपा को अपनी इज्जत बचानी भारी पड़ जाती। क्योंकि शहर विधानसभा के भाजपा बहुल गढ़ ब्रह्मपुरी जैसे मोहल्लों में भी बसपा के पक्ष में मतदान हुआ। मतगणना के दौरान आए इन तथ्यों से स्पष्ट हो गया कि भाजपा संगठन चुनाव में पूरी तरह फेल नजर आया। यदि भाजपा को यह जीत मिली तो सिर्फ मोदी फैक्टर के कारण ही हासिल हुई।
कैंट ने लगा दी नैया पार
मेरठ। मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी को जीत दिलाने का श्रेय कैंट विधानसभा के मतदाताओं को जाता है। भाजपा के लिए सबसे मजबूत कैंट विधानसभा को ही माना जाता रहा है। इसलिए राजेंद्र अग्रवाल की चुनावी नैया कैंट विधान सभा के मतदाताओं ने ही डूबते-डूबते बचा ली। हालांकि जीत अधिक मतों से नहीं मिली है।
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परतापुर कताई मिल पर बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हुई। शहर, कैंट, मेरठ दक्षिण, किठौर, हापुड़ विधानसभा के मतों की पहले राउंड में हुई गिनती से आए परिणाम में बसपा के याकूब कुरैशी को 21781 मत मिले। वहीं, भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल को 20219 मत मिले। याकूब पहले ही राउंड में 1562 मतों की लीड लेकर आगे बढ़े। द्वितीय राउंड में हापुड़ विधानसभा के मतों की गिनती के आए परिणाम में राजेंद्र अग्रवाल को 10321 मत और याकूब को 7137 मत मिले। राजेंद्र अग्रवाल ने 3184 मत अधिक प्राप्त किए। इसके उपरांत राजेंद्र अग्रवाल 14वें राउंड तक लीड लेते चले गए। दोपहर लगभग 1:30 बजे राजेंद्र अग्रवाल को करीब 11 हजार वोटों की बढ़त मिली। इसके बाद भी बढ़त होती रही। यह बढ़त कैंट के मतदाताओं से मिली। इस दौरान बसपा प्रत्याशी के समर्थकों के चेहरों पर चिंता की लहरें उभरने लगीं।
...होता गया जीत का मार्ग प्रशस्त
दोपहर दो बजे के बाद राउंडवार शुरू हुई मतों की गिनती में याकूब ने बढ़त बनायी। याकूब 39 हजार मतों की लीड लेते दिखे। जिसके बाद भाजपाइयों के चेहरों पर चिंता छाने लगी। हालांकि इस दौरान भाजपाइयों को कैंट विधानसभा के मतदाताओं पर काफी भरोसा रहा। कैंट विधानसभा से भाजपा को एक लाख दो हजार 752 मतों से लीड मिली। जिससे भाजपा प्रत्याशी की जीत का मार्ग प्रशस्त होता गया। इस लीड को कम करने में बसपा मतदाताओं में गिनती के दौरान काफी उत्साह भी सामने आया। भाजपाइयों ने जीत को निश्चित मानते हुए हर-हर मोदी, घर-घर मोदी के नारे लगाने शुरू कर दिए।
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पिछले लोकसभा चुनाव में कुल 1761618 मतदाता थे, जिनमें से 1108171 वोट डाले गए थे। इस बार लोकसभा चुनाव में 18.88 लाख वोट थे, जिनमें 12,12,076 ने मतदान किया था। ऐसे में दोनों चुनाव के मतदान के रुझान पर अगर गौर करें तो भाजपा संगठन मतदान के दिन कहीं न कहीं पूरी तरह फेल नजर आया। अहम बात ये रही कि भाजपा को सबसे बड़ा झटका शहर विधानसभा में लगा, जहां पर पिछले चुनाव की तुलना में गठबंधन प्रत्याशी ने अच्छी बढ़त बनाई। आमने सामने की भिड़ंत में तय था कि मुकाबला करीबी होगा, लेकिन इतना करीबी होगा यह किसी ने नहीं सोचा था। वर्चस्व की लड़ाई में मुस्लिमों के वोट बंटने की उम्मीद संजोए भाजपाइयाें का सपना टूट गया और मुस्लिम मतों का पूरी तरह एकतरफा ध्रुवीकरण रहा। इसके साथ ही अनुसूचित जाति के मतदाताओं ने भी बसपा प्रत्याशी के पक्ष में एकजुट होकर वोट डाले। लेकिन भाजपा अपने वोटरों को घर से निकालने में ही कामयाब नहीं हो सकी। यदि भाजपा के पक्ष में कैंट विधानसभा में थोड़ा भी मतदान और कम हो जाता तो भाजपा को अपनी इज्जत बचानी भारी पड़ जाती। क्योंकि शहर विधानसभा के भाजपा बहुल गढ़ ब्रह्मपुरी जैसे मोहल्लों में भी बसपा के पक्ष में मतदान हुआ। मतगणना के दौरान आए इन तथ्यों से स्पष्ट हो गया कि भाजपा संगठन चुनाव में पूरी तरह फेल नजर आया। यदि भाजपा को यह जीत मिली तो सिर्फ मोदी फैक्टर के कारण ही हासिल हुई।
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कैंट ने लगा दी नैया पार
मेरठ। मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी को जीत दिलाने का श्रेय कैंट विधानसभा के मतदाताओं को जाता है। भाजपा के लिए सबसे मजबूत कैंट विधानसभा को ही माना जाता रहा है। इसलिए राजेंद्र अग्रवाल की चुनावी नैया कैंट विधान सभा के मतदाताओं ने ही डूबते-डूबते बचा ली। हालांकि जीत अधिक मतों से नहीं मिली है।
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परतापुर कताई मिल पर बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हुई। शहर, कैंट, मेरठ दक्षिण, किठौर, हापुड़ विधानसभा के मतों की पहले राउंड में हुई गिनती से आए परिणाम में बसपा के याकूब कुरैशी को 21781 मत मिले। वहीं, भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल को 20219 मत मिले। याकूब पहले ही राउंड में 1562 मतों की लीड लेकर आगे बढ़े। द्वितीय राउंड में हापुड़ विधानसभा के मतों की गिनती के आए परिणाम में राजेंद्र अग्रवाल को 10321 मत और याकूब को 7137 मत मिले। राजेंद्र अग्रवाल ने 3184 मत अधिक प्राप्त किए। इसके उपरांत राजेंद्र अग्रवाल 14वें राउंड तक लीड लेते चले गए। दोपहर लगभग 1:30 बजे राजेंद्र अग्रवाल को करीब 11 हजार वोटों की बढ़त मिली। इसके बाद भी बढ़त होती रही। यह बढ़त कैंट के मतदाताओं से मिली। इस दौरान बसपा प्रत्याशी के समर्थकों के चेहरों पर चिंता की लहरें उभरने लगीं।
...होता गया जीत का मार्ग प्रशस्त
दोपहर दो बजे के बाद राउंडवार शुरू हुई मतों की गिनती में याकूब ने बढ़त बनायी। याकूब 39 हजार मतों की लीड लेते दिखे। जिसके बाद भाजपाइयों के चेहरों पर चिंता छाने लगी। हालांकि इस दौरान भाजपाइयों को कैंट विधानसभा के मतदाताओं पर काफी भरोसा रहा। कैंट विधानसभा से भाजपा को एक लाख दो हजार 752 मतों से लीड मिली। जिससे भाजपा प्रत्याशी की जीत का मार्ग प्रशस्त होता गया। इस लीड को कम करने में बसपा मतदाताओं में गिनती के दौरान काफी उत्साह भी सामने आया। भाजपाइयों ने जीत को निश्चित मानते हुए हर-हर मोदी, घर-घर मोदी के नारे लगाने शुरू कर दिए।