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कमिश्नर ने दफ्तर बुलाकर गिरफ्तार कराए एमडीए के तीन अफसर

Sat, 12 Aug 2017 02:14 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Sat, 12 Aug 2017 02:14 PM IST
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Three officers lost their lives, the Commissioner convened in the office and arrested
तीन अधिकारी गिरफ्तार

साइकिल ट्रैक में व्यवधान बनी विद्युत लाइन को शिफ्ट करने के नाम पर एमडीए अधिकारियों ने बड़ा घोटाला किया। काम हुए बिना ही डेढ़ करोड़ का भुगतान कर दिया गया। दोगुनी कीमत पर वायर खरीदा और बिना सत्यापन 18 लाख 80 हजार रुपये सुपरविजन चार्ज के रूप में पीवीवीएनएल को दे दिए। इन सबका खुलासा कमिश्नर की जांच में हुआ।  इसके बाद कमिश्नर ने शुक्रवार को भ्रष्टाचार के आरोपी तीन अभियंताओं को अपने कार्यालय में बुलाकर गिरफ्तार करा दिया।

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साइकिल ट्रैक की लाइन की शिफ्टिंग में खेल की पटकथा टेंडरों में ए प्लस गेम खेलकर लिखी गई थी। इस लाइन की शिफ्टिंग के लिए टेंडर जारी करने को एमडीए अधिकारियों ने ए प्लस कैटगरी ही विशेष रूप से बना डाली थी। अमर उजाला ने इस प्रकरण का भंडाफोड़ किया था। तभी से इस प्रकरण की जांच शुरू हो गई थी।
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घोटाले की इस खेल की शुरुआत 23 सितंबर 2015 को हुई थी। एमडीए में इस लाइन को शिफ्ट करने केलिए निविदायें मांगी थीं। हैरत की बात यह रही कि इसमें बिल्डरों की ए प्लस कैटगरी की शर्त लगा दी गई, जबकि सूबे के किसी अन्य प्राधिकरण में यह कैटगरी लागू नहीं थी। घोटाले को अंजाम देने के लिए इस काम को अंजाम दिया गया था। इसमें सात निविदा दाताओं द्वारा प्रतिभाग किया गया। इस प्रकरण को अमर उजाला ने प्रकाशित किया। यह भंडाफोड़ भी किया कि जान बूझकर यहां ए प्लस कैटेगरी लागू की गई है। इस पर जांच शुरू हो गई थी।

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बिल्डर ने भी की थी शिकायत

Three officers lost their lives, the Commissioner convened in the office and arrested
एमडीए के तीन अफसरों पर गिरी गाज

सामाजिक कार्यकर्ता एवं बिल्डर अरुण कुमार ने भी इसकी शिकायत कर दी। हैरत की बात यह रही कि परिवर्तन का शुद्धिपत्र जारी किया गया पर उसे भी गुपचुप तरीके से लागू किया गया। ऐसे में फिर से 15 जनवरी 2016 को इसे ए प्लस कैटगरी हटाकर संशोधित कर दिया गया। इस तिथि को कुल तीन निविदायें प्राप्त हुईं। इनमें से एक मै. श्याम कंसट्रक्शन को बुलन्दशहर विकास प्राधिकरण में ब्लैक लिस्ट होने के कारण बिड में शामिल नहीं किया गया। शेष दो निविदाओं में मै. आरसीसी डेवलपर्स की निविदा आंगणन से 0.02 प्रतिशत निम्न दर रुपये 02,29,97,206.38 पर स्वीकृत कर दी गई। आरोप लगा कि जानबूझकर आरसीसी डेवलपर को ये टेंडर देने के लिए ड्रामा रचा गया। क्योंकि जब शर्त हटा दी गयी तो मात्र तीन निविदायें प्राप्त हुईं। जबकि सामान्य सिद्धान्त के अनुरूप सात से अधिक निविदायें प्राप्त होनी चाहिए थीं।

इस अवधि में तैनात रहे एक वीसी और तीन सचिव

Three officers lost their lives, the Commissioner convened in the office and arrested
भ्रष्ट अधिकारियों को ले जाती पुलिस

इस पूरे प्रकरण के दौरान यहां वीसी तो राजेश कुमार ही रहे। लेकिन सचिव तीन तीन रहे। सौम्य श्रीवास्तव, कुमार विनीत और अवनीश शर्मा। दरअसल तत्कालीन वीसी और सचिव दोनों पर भी एफआईआर दर्ज हुई है। ऐसे में इसकी भी जांच शुरू होगी कि कौन वीसी और सचिव इस दौरान रहे। दरअसल जब यह टेंडर शुरू हुए और ए प्लस कैटगरी लागू की गई तब यहां कुमार विनीत सचिव थे। इससे पहले यहां सौम्य श्रीवास्तव थे। कुमार विनीत के बाद अवनीश कुमार शर्मा सचिव रहे।

12 जुलाई 2016 को इस पेमेंट के चेक पर साइन हुए। उस समय यहां अवनीश थे। लेकिन उनका कहना है कि उनके चेक पर साइन नहीं थे। चेक सीधा तत्कालीन वीसी राजेश कुमार ने ही साइन किया था। यहां तक कि उनकी रिपोर्ट में भी लिखा है कि इस प्रकरण में गड़बड़झाले की बू है। इसकी जांच की जाए। उधर सौम्य श्रीवास्तव का कहना है कि वह तो इस प्रकरण के शुरू होने से पहले ही यहां से स्थानांतरित हो गए थे। कुमार विनीत कहते हैं कि ए प्लस कैटगरी आला अधिकारियों के कहने पर हुआ था। मेरे आने के बाद भुगतान हुआ। यदि बिना काम भुगतान किया तो वाकई में गलत है। विदित हो कि इन दिनों जहां राजेश कुमार सचिव राजस्व परिषद हैं तो वहीं कुमार विनीत एडीएम गौतमबुद्धनगर और अवनीश कुमार शर्मा नगरायुक्त मुरादाबाद हैं।

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