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शहर से बस अड्डे बाहर न ले जाने के बहाने हजार  

Sat, 08 Apr 2017 12:05 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Sat, 08 Apr 2017 12:05 PM IST
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thousand excuse for not shifting bus stand
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

एनजीटी द्वारा रोडवेज बस अड्डों को शहर से बाहर करने के लिए मांगे गए जवाब के बावजूद रोडवेज और एमडीए गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। 10 अप्रैल को एनजीटी में मामले की सुनवाई होनी है। लेकिन अभी तक दोनों ने अपना जवाब तक दाखिल नहीं किया है। यही नहीं, आरटीआई के जवाब में दोनों विभाग एक-दूसरे के पाले में गेंद डालकर अपना बचाव कर रहे हैं। शुक्रवार को याची लोकेश खुराना ने दोनों विभागों को दस्ती नोटिस तामील करा दिए, ताकि विभाग कोर्ट में नोटिस नहीं मिलने का बहाना न बना सके। 

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शहर के बीच घनी आबादी में संचालित भैसाली और सोहराब गेट बस अड्डों से संचालित रोडवेज बसें न केवल वायु प्रदूषण फैला रही हैं, बल्कि जाम का कारण भी बन रही है। लंबे समय से दोनों बस अड्डों को शहर से बाहर स्थापित करने की मांग चल रही है। एमडीए ने मेरठ महायोजना 2021 के मास्टर प्लान में विभिन्न मार्गों पर बस अड्डे हेतू भू-उपयोग निर्धारित किया। लेकिन आज तक यह कवायद सिरे नहीं चढ़ी। आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना इस मामले को लेकर एनजीटी गए। एनजीटी ने रिट स्वीकार करते हुए गत 28 फरवरी को रोडवेज, एमडीए, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अलावा प्रदूषण नियंत्रण विभाग को एक माह में जवाब दाखिल करने के नोटिस जारी किए थे। लेकिन किसी भी विभाग ने जवाब दाखिल नहीं किया है। अब कोर्ट में 10 अप्रैल को सुनवाई होनी है।  
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एक-दूसरे के पाले में गेंद 
एमडीए को बस अड्डों के लिए जमीन देनी है और रोडवेज को यहां बस अड्डे अमल में लाने हैं। लेकिन दोनों विभाग एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करते हुए एक-दूसरे के पाले में गेंद डाल रहे हैं। आरटीआई के जवाब में रोडवेज का कहना है कि बस अड्डों के लिए जमीन एमडीए को देनी है। जमीन मिलते ही वे बाहर चले जाएंगे। जबकि एमडीए का कहना है कि रोडवेज को आधा दर्जन से ज्यादा जगह पर जमीन दिखाई गई है। रोडवेज हर जमीन में नुक्ताचीनी निकालकर खुद ही बाहर जाने से बच रहा है।  
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बस अड्डों के लिए प्रस्तावित जमीन 
 रुड़की रोड पर करीब 31.50 एकड़, दिल्ली बाईपास पर करीब 34 एकड़, संजय वन के पास करीब 6.06 एकड़, हापुड़ रोड पर करीब 25.26 एकड़, गढ़मुक्तेश्वर रोड पर करीब 28.67 एकड़, मवाना रोड पर करीब 46 एकड़ और किला परीक्षितगढ़ रोड पर 46.47 एकड़ भूमि प्रस्तावित की गई है। इसके अलावा महानगर बस सेवा के लिए लोहिया नगर योजना पाकेट ई के तलपट मानचित्र में 20 हजार 240 वर्गमीटर भूमि आवंटित है।  


बोलते आंकड़े
- 1934 में कैंट बोर्ड ने प्रदेश सरकार को दी भैसाली अड्डे की जमीन
- भैसाली अड्डे का क्षेत्रफल           11671 वर्गमीटर
- 1952 से जमीन पर यूपी रोडवेज काबिज
- मेरठ कार्यशाला का क्षेत्रफल         13430 वर्गमीटर
- सोहराब गेट डिपो का स्थापना वर्ष         1978
- सोहराब गेट बस अड्डे का क्षेत्रफल        4954 वर्गमीटर
- सोहराब गेट कार्यशाला का क्षेत्रफल       12733 वर्गमीटर
- दोनों बस अड्डों से संचालित बसें          करीब 650
- भैसाली अड्डे के यात्रियों की संख्या        करीब 60 हजार प्रतिदिन
- सोहराब गेट अड्डे के यात्रियों की संख्या      करीब 12 हजार प्रतिदिन
- दोनों बस अड्डों को निगम मुख्यालय द्वारा एक श्रेणी में रखा गया है

शासन स्तर पर होगा निर्णय
बस अड्डे पर बनी जर्जर बिल्डिंग को गिरा दिया गया है। अब बस अड्डा खाली मैदान बन चुका है। डिपो कार्यालय को वर्कशॉप में शिफ्ट किया गया है। नई बिल्डिंग बनाने या नहीं बनाने का निर्णय रोडवेज मुख्यालय और शासन स्तर पर लिया जाना है। एनजीटी के नोटिस का जवाब दिया जाएगा। -एसके बनर्जी, आरएम मेरठ रोडवेज रीजन 

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