कोविड के बाद बढ़ी अचानक मौतें: मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव अग्रवाल बोले- स्क्रूटनी नहीं होना चिंताजनक
कोविड महामारी आने के बाद लोगों की हार्ट अटैक होने या हार्ट फेल होने से अचानक मौतों की संख्या बढ़ना चिंताजनक है। ऐसे में मेरठ में कार्डियोलोजिस्ट से जब बात की गई तो उन्होंने इसकी वजह पता लगाने के लिए इस और ध्यान देने की बात कही।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोविड महामारी आने के बाद लोगों की हार्ट अटैक होने या हार्ट फेल होने से अचानक मौतों की संख्या बढ़ी है। साथ ही कई अन्य बीमारियों से जवान उम्र में भी मौतें हो रही हैं। यह बेहद रहस्यमयी बात है, लेकिन चिंताजनक यह है कि कोविड की पूरी स्क्रूटनी (जांच) नहीं हो रही है। इसलिए मौत के कारणों का पता नहीं लग पा रहा है।
सरकार की तरफ से ऐसा कोई प्रयास नहीं है कि कोविड के बाद लोगों की जो इस किस्म की अचानक मौतें हो रही हैं, उनका पोस्टमॉर्टम करवाए या उनकी कोई मेडिकल हिस्ट्री ले। जब तक जांच नहीं होगी इन बातों का सही जवाब नहीं मिल पाएगा। जयपुर में हुई 5वीं सीएसआई कार्डियक प्रीवेंट 2023 कांफ्रेंस में मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव अग्रवाल ने ये बातें कहीं।
विश्व हृदय दिवस के उपलक्ष्य में हुई इस कांफ्रेंस में देशभर से मशहूर हार्ट स्पेशियलिस्ट और कार्डियोलॉजिस्ट शामिल हुए। इस सालाना कांफ्रेंस में हृदय रोगों यानी दिल की बीमारियों की रोकथाम और बचाव के उपायों के साथ ही आधुनिक उपचार की तकनीकों और दवाओं पर भी गहन चिंतन मनन किया गया।
मेरठ से आए सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव अग्रवाल ने एलडीएल कॉलेस्ट्रॉल टारगेट्स फॉर इंडिया एंड इंपॉर्टेंस ऑफ स्टेटिन्स विषय पर अपना लेक्चर दिया। उन्होंने बताया कि हार्ट की बीमारियां जीवन शैली के परिवर्तन से बढ़ रही हैं। आजकल लोगों को ऑनलाइन वर्क करना होता है। ऑड ऑवर काम करना पड़ता है। फास्ट फूड एक रियलिटी बन गया है। बच्चों को स्कूल में प्लेइंग ऑवर्स (खेल का समय) नहीं हैं।
मोबाइल ने बच्चों की फिजिकल एक्टिविटीज का स्पेस ले लिया है। ये सब वजह दिल की बीमारियों की ओर ले जाती हैं। आज कल बच्चे स्कूल में फास्ट फूड, बर्गर और सॉफ्ट ड्रिंग लेते हैं। टिफिन घर से लेकर नहीं जाते हैं। इन सब चीजों का बचपन से ही प्रभाव पड़ रहा है। हार्ट के लिए रिस्क फैक्टर्स निरंतर बढ़ते जा रहे हैं। 30-40 साल की उम्र में युवा शुगर, ब्लड प्रेशर, कॉलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों से घिर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि हम लोग आज प्रोसेस फूड खा रहे हैं। प्रोसेस फूड को लाइफ देने के लिए उसमें केमिकल का लगना जरूरी है। कोई भी ऑयल हो वो घातक है, क्योंकि हम लोगों की इतनी फिजिकल एक्टिविटी नहीं रही है जो ऑयल को डायजेस्ट कर सके। मैं पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हूं जहां चाय में इतनी चीनी डाली जाती है कि चम्मच खड़ी हो जाए और सब्जी में इतना घी डाला जाता है कि चम्मच खड़ी हो जाए, लेकिन उन लोगों को बीमारी नहीं होती थी, क्योंकि सारे दिन शारीरिक श्रम करते थे। गांव में जाने के लिए 5 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। आजकल हमारे किसान कार से खेत पर खड़े होते हैं। किराए की लेबर लेकर काम करते हैं।
पहले रिक्शा चलाने वाले थे, अब इलेक्ट्रिकल रिक्शा शुरू हो गए हैं जो टैक्सी ड्राइवर्स की तरह बढ़ गए हैं। उनके वजन और स्मोकिंग बढ़ गई है। कॉलेस्ट्रॉल नि: संदेह दिल की बीमारियों का बड़ा कारण है। बहुत सारी नई दवाइयां आई हैं। हार्ट स्पेशियलिस्ट डॉक्टर्स की इस कांफ्रेंस में ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ एसएम शर्मा रहे, जबकि जॉइंट ऑर्गेटाइनिंग सेक्रेट्री डॉ दिनेश गौतम, साइंटिफिइक चेयरमैन डॉ. राजीव गुप्ता और ट्रेज़रार सीएसआई राजस्थान डॉ गौरव सिंघल रहे।
रिस्क कम करने की कोशिश
एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर और कांफ्रेंस के आयोजन सचिव डॉ दीपक माहेश्वरी ने बताया कि इस कांफ्रेंस का मकसद दिल की बीमारियों को होने से पहले रोकना है। आजकल अचानक कार्डियक अटैक हो रहे हैं या जवान लोगों की मौत हो रही हैं। हमारे बहुत सारे डॉक्टर्स भी गए हैं जो हेल्थ केयर करते हुए फील्ड में ही चले गए। जितनी रिस्क कम कर पाएं, उसी की कोशिश की जा रही है।