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शुल्क प्रतिपूर्ति घोटाले में फंसे प्रोफेेशनल कॉलेज

Fri, 05 Aug 2016 02:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
अमर उजाला ब्यूरों Updated Fri, 05 Aug 2016 02:12 AM IST
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shulk pratipurti
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
 प्रोफेशनल कालेजों में शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति को लेकर एक और बड़ा घोटाला शासन की नजर में आया है। मेरठ के 14 कालेजों ने करीब सवा करोड़ रुपये का घोटाला एक ही साल में कर दिया। निदेशक समाज कल्याण ने पूरे मामले पर जांच बैठाते हुए चार सदस्यीय कमेटी गठित की है।
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ये है मामला
जनपद के व्यावसायिक शिक्षा वाले कालेजों में बीबीए, बीसीए और पीजीडीएम कोर्स के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा हो रहा है। विभागीय साठगांठ से ये कालेज संचालक फर्जी ढंग से अपने यहां प्रवेश दिखाते हैं। जिनमें अधिकांश छात्र अनुसूचित और पिछड़ी जाति के ही होते हैं। इन छात्रों की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के लालच में ये संचालक फर्जी प्रवेश दिखाकर उनके परीक्षा फार्म भरवाते हैं। लेकिन छात्र फर्जी होने के कारण परीक्षा नहीं देते हैं। लेकिन इससे पूर्व ही इनकी छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति कालेज संचालकों की जेबों में पहुंच जाती है।
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ऐसे हुआ घोटाला
बीबीए और बीसीए का शुल्क विश्वविद्यालय द्वारा करीब 20 हजार रुपये सालाना प्रति छात्र निर्धारित किया गया है। इन कालेजों ने 624 फर्जी परीक्षार्थियों के प्रवेश अपने यहां करा दिए और उनकी छात्रवृत्ति हड़प कर ली। जिन 14 कालेजों पर शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति घोटाले का आरोप है, उनके यहां बीबीए कोर्स में 780 छात्र और बीसीए में 650 छात्र पंजीकृत करते हुए उनके परीक्षा फार्म भरवाये गये थे। लेकिन बीबीए परीक्षा में 418 छात्र उपस्थित हुए और 362 अनुपस्थित हो गए। वहीं बीसीए में 388 छात्र परीक्षा में बैठे और 262 छात्र अनुपस्थित हो गए। 20 हजार रुपये प्रति छात्र के हिसाब से यह छात्रवृत्ति घोटाला करीब 1.25 करोड़ रुपये बैठता है।
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जातियों में कर दिया फेरबदल
निदेशक समाज कल्याण ने बताया कि  कुछ ऐसे छात्रों का विवरण भी संलग्न किया गया है, जिन्होंने स्कॉलरशिप डाटाबेस के अनुसार विगत वर्षों में अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्र के रूप में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन किया था। जबकि उन्हीं छात्रों ने वर्ष 2014-15 में अनुसूचित जाति के छात्र के रूप में आवेदन किया है।   तहसील में भी फर्जीवाड़ा
निदेशक समाज कल्याण ने आय और जाति प्रमाणपत्र बनाने में तहसीलों पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा है कि तहसीलों ने बगैर जांच किये प्रमाणपत्र जारी कर दिए। जिसमें बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है।

तीन वर्षों की होगी जांच
निदेशक समाज कल्याण के अनुसार इन 14 कॉलेजों की वर्ष 2013-14, 2014-15 और 2015-16 के स्कॉलरशिप डाटाबेस से विवरण प्राप्त करते हुए छात्रों को भुगतान की गयी छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की जांच होगी। जिसमें इन छात्रों के घर जाकर उसका भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं।


12 बिंदुओं पर जांच
निदेशक समाज कल्याण ने जांच 12 बिंदुओं पर केंद्रित की है। इसके तहत संयुक्त निदेशक समाज कल्याण एमपी सिंह की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। जिसमें वित्त नियंत्रक समाज कल्याण निदेशालय या उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि होगा। शैलेश कुमार श्रीवास्तव, उपनिदेशक पिछड़ा वर्ग कल्याण, अबुल फजल, संप्रेक्षा अधिकारी समाज कल्याण जांच कमेटी के सदस्य होंगे।
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