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शास्त्रीनगर, जागृति विहार डेंगू की चपेट में
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Fri, 09 Sep 2016 02:31 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में चिकनगुनिया और डेंगू का रोग बेकाबू हो चुका है। खासकर शहर के शास्त्रीनगर और जागृति विहार इलाके इसकी चपेट में हैं। मेडिकल कॉलेज की लैब में कराई गई जांच के बाद डेंगू और चिकनगुनिया के बृहस्पतिवार को 56 नए मामले सामने आये हैं। इससे साफ है कि शहर में एडिस मच्छर को पनपने का पूरा मौका मिल रहा है। इसके अलावा वायरल को जन्म देना वाला बैक्टीरिया भी गंदगी के चलते फैल रहा है। अब जिले में डेंगू से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़कर 55 हो गई है, जबकि चिकनगुनिया के मरीजों की संख्या ने भी सौ का आंकड़ा छू लिया है।
वायरल बुखार से पीड़ित बड़ी संख्या में लोग सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती हैं। वहीं उससे कहीं ज्यादा संख्या उन मरीजों की है, जो चिकित्सकों की सलाह से घरों पर ही इलाज ले रहे हैं। अलर्ट के बीच स्वास्थ्य विभाग थोड़ा एक्टिव हुआ है तो नगर निगम सफाई, कीटनाशक, चूना छिड़काव और फॉगिंग के मोर्चे पर फेल साबित हो रहा है। जिसके कारण वायरल फैलाने वाला बैक्टीरिया तेजी से सक्रिय हो रहा है।
नहीं चल रहा अभियान
जिला मलेरिया विभाग और नगर निगम उन क्षेत्रों को चिन्हित कर अभियान नहीं चला पाया है, जहां एडिस मच्छर सबसे ज्यादा पनप रहा है। जबकि पहले दिन से ही स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम को संकेत मिलने शुरू हो गए थे कि किस क्षेत्र में सबसे ज्यादा लोग डेंगू और चिकनगुनिया के आ रहे हैं।
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खास एरिया चपेट में
शुरूआत में मेडिकल कॉलेज कैंपस व जागृति विहार से चिकनगुनिया और डेंगू के मामले सामने आये थे। उसके बाद इसका दायरा बढ़ा और उसने मेडिकल से सटी अजंता कॉलोनी व उसके बाद जागृति विहार से मिले शास्त्री नगर को घेरा। लेकिन नगर निगम और जिला मलेरिया विभाग ने महज रस्म अदायगी ही की। जिसके कारण डेंगू और चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छर का दायरा बढ़ता चला गया। अब माछरा और परीक्षितगढ़ ब्लॉक के काफी गांव भी इसकी चपेट में है। अकेले परीक्षितगढ़ और माछरा ब्लॉक से चिकनगुनिया के 30 से अधिक केस सामने आने आ चुके हैं। वहीं डेंगू के भी करीब 15 मामले इन्हीं दोनों ब्लॉक से सामने आये हैं।
शहर में गंदगी नहीं दिखती इन्हें
सरकारी अफसरों को शहर में व्याप्त गंदगी नहीं दिखती। जबकि कूड़ा एकत्र करने से लेकर उसके निस्तारण की प्रक्रिया इतनी खराब है कि उसमें बैक्टीरिया जमकर पल रहा है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. योगिता सिंह का कहना है कि वायरल के फैलने के पीछे असली वजह गंदगी है, क्योंकि गंदगी की वजह से बैक्टीरिया पैदा होता है और उसी से फैलता है। लेकिन शहर में जगह-जगह गंदगी है, जिससे वायरल के मामले बढ़ना लाजिमी है।
चूने का छिड़काव नहीं
जिला मलेरिया अधिकारी योगेश सारस्वत का कहना है कि नियम कहता है कि जहां पर कूड़ा एकत्र किया जाता है वहां दिन में दो दफा अनिवार्य तौर पर चूना गिरना चाहिये। इस शहर में कूड़ा एक ही टाइम उठाया जाता है, इसलिए कूड़े के ऊपर और बराबर मे चूना गिरना चाहिये, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। वहीं, डंपिंग जोन में भी कूड़े के ऊपर चूने की पूरी परत होनी चाहिये। अगर नगर निगम थोड़ी सक्रियता से काम करे तो वायरल को ज्यादा प्रभावित तरीके से रोक सकता है।
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वायरल बुखार से पीड़ित बड़ी संख्या में लोग सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती हैं। वहीं उससे कहीं ज्यादा संख्या उन मरीजों की है, जो चिकित्सकों की सलाह से घरों पर ही इलाज ले रहे हैं। अलर्ट के बीच स्वास्थ्य विभाग थोड़ा एक्टिव हुआ है तो नगर निगम सफाई, कीटनाशक, चूना छिड़काव और फॉगिंग के मोर्चे पर फेल साबित हो रहा है। जिसके कारण वायरल फैलाने वाला बैक्टीरिया तेजी से सक्रिय हो रहा है।
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नहीं चल रहा अभियान
जिला मलेरिया विभाग और नगर निगम उन क्षेत्रों को चिन्हित कर अभियान नहीं चला पाया है, जहां एडिस मच्छर सबसे ज्यादा पनप रहा है। जबकि पहले दिन से ही स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम को संकेत मिलने शुरू हो गए थे कि किस क्षेत्र में सबसे ज्यादा लोग डेंगू और चिकनगुनिया के आ रहे हैं।
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खास एरिया चपेट में
शुरूआत में मेडिकल कॉलेज कैंपस व जागृति विहार से चिकनगुनिया और डेंगू के मामले सामने आये थे। उसके बाद इसका दायरा बढ़ा और उसने मेडिकल से सटी अजंता कॉलोनी व उसके बाद जागृति विहार से मिले शास्त्री नगर को घेरा। लेकिन नगर निगम और जिला मलेरिया विभाग ने महज रस्म अदायगी ही की। जिसके कारण डेंगू और चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छर का दायरा बढ़ता चला गया। अब माछरा और परीक्षितगढ़ ब्लॉक के काफी गांव भी इसकी चपेट में है। अकेले परीक्षितगढ़ और माछरा ब्लॉक से चिकनगुनिया के 30 से अधिक केस सामने आने आ चुके हैं। वहीं डेंगू के भी करीब 15 मामले इन्हीं दोनों ब्लॉक से सामने आये हैं।
शहर में गंदगी नहीं दिखती इन्हें
सरकारी अफसरों को शहर में व्याप्त गंदगी नहीं दिखती। जबकि कूड़ा एकत्र करने से लेकर उसके निस्तारण की प्रक्रिया इतनी खराब है कि उसमें बैक्टीरिया जमकर पल रहा है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. योगिता सिंह का कहना है कि वायरल के फैलने के पीछे असली वजह गंदगी है, क्योंकि गंदगी की वजह से बैक्टीरिया पैदा होता है और उसी से फैलता है। लेकिन शहर में जगह-जगह गंदगी है, जिससे वायरल के मामले बढ़ना लाजिमी है।
चूने का छिड़काव नहीं
जिला मलेरिया अधिकारी योगेश सारस्वत का कहना है कि नियम कहता है कि जहां पर कूड़ा एकत्र किया जाता है वहां दिन में दो दफा अनिवार्य तौर पर चूना गिरना चाहिये। इस शहर में कूड़ा एक ही टाइम उठाया जाता है, इसलिए कूड़े के ऊपर और बराबर मे चूना गिरना चाहिये, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। वहीं, डंपिंग जोन में भी कूड़े के ऊपर चूने की पूरी परत होनी चाहिये। अगर नगर निगम थोड़ी सक्रियता से काम करे तो वायरल को ज्यादा प्रभावित तरीके से रोक सकता है।