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समर्थन चंद्रशेखर को, मगर वोट केवल बहनजी को ही, शब्बीरपुर के पीड़ितों का बयान

Sat, 22 Sep 2018 01:22 AM IST
जगदीप कुमार, अमर उजाला, सहारनपुर
जगदीप कुमार, अमर उजाला, सहारनपुर Updated Sat, 22 Sep 2018 01:22 AM IST
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Shabbirpur Victims says Support Chandrasekhar but Vote only for mayawati
चंद्रशेखर उर्फ रावण - फोटो : अमर उजाला
भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर के जेल से रिहा होने के बाद तमाम राजनीतिक दलों की नजर उन पर टिकी है। दिल्ली सरकार तक के मंत्री उनसे आकर मिले हैं। स्थानीय स्तर पर कांग्रेस और अन्य दलों के नेता उनसे संपर्क बनाए हुए हैं।
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मीडिया चंद्रशेखर के राजनीतिक कनेक्शन को तलाश रहा है। अटकलों और अफवाहों के बीच शब्बीरपुर के पीड़ितों पर चंद्रशेखर का कितना और क्या असर है? इसकी पड़ताल के लिए अमर उजाला की टीम शुक्रवार को शब्बीरपुर गांव पहुंच गई।
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ग्रामीणों ने हर मुद्दे पर अमर उजाला से खुलकर बात की। चंद्रशेखर और मायावती में से किसी एक को चुनने के सवाल पर उनका साफ कहना था कि उनका हर तरह का सपोर्ट चंद्रशेखर के साथ है, मगर वोट बहनजी का ही रहेगा।  
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दोपहर करीब 12:40 बजे जब अमर उजाला की टीम गांव शब्बीरपुर पहुंची तो गांव के अनुसूचित जाति के लोग चौपाल पर बैठे मिले। अमर उजाला का पहला सवाल यह था कि चंद्रशेखर आपके लिए जेल काटकर आया है और आपके हितों के लिए लड़ाई लड़ रहा है।

ऐसे हालात में यदि वह बसपा को छोड़कर किसी अन्य दल या निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ता है तो क्या आप उसको वोट करेंगे? तपाक से कई लोग बोले, भाई साहब हमारा मरना और जीना बहनजी के साथ है। चंद्रशेखर हमारा भाई है, हम उसके लिए जान दे सकते हैं।

वह समाज की लड़ाई लड़ रहा है। ऐसे में उसे तन, मन और धन से सपोर्ट करेंगे, मगर वोट बहनजी को ही जाएगा। श्रीकांत का कहना था कि बहनजी अनुसूचित जाति के लोगों की शान और अभिमान हैं। उनसे अलग होकर हमारा राजनीतिक अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा।

मीर सिंह ने कहा कि चंद्रशेखर समाज की लड़ाई लड़े। उन्होंने कहा कि यदि चंद्रशेखर बसपा के अलावा किसी अन्य पार्टी को सपोर्ट करेगा तो उसकी ताकत आधी हो जाएगी। अमर कुमार का कहना है कि चंद्रशेखर को राजनीति से दूर रहना चाहिए।

उसे केवल सामाजिक लड़ाई लड़नी चाहिए। यदि वह बहनजी के खिलाफ खड़ा होगा तो ठीक नहीं रहेगा। आंगन की लिपाई करती मिली रीना का भी दो टूक यही कहना था कि चंद्रशेखर उनका भाई है, जिस पर उन्हें गर्व है, मगर उनके लिए सबसे पहले बहनजी ही हैं और वोट भी बहनजी को ही देंगी। 

11 पीड़ित परिवारों को अब भी मदद का इंतजार

ग्रामीणों ने बताया कि पांच मई 2017 को हुई जातीय हिंसा में बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति के लोगों का नुकसान हुआ था। मगर 56 ऐसे परिवार थे, जिनके घर, मवेशी और सामान जला दिया गया था। इन सभी ने प्रशासन से लिखित में अवगत कराया था। प्रशासन ने 45 परिवारों को मदद दिलाई है।

नतीजा यह है कि पांच सितंबर की घटना के बाद जहां जले हुए मकान थे आज उनकी जगह पक्के मकान बन गए हैं। मगर 11 परिवार अब भी ऐसे हैं, जिनको मदद का इंतजार है। इनमें भूरा, प्रमाल, सतपाल, सुलेंद्र, सुरेश, सुशीला, अनुज और धारा आदि शामिल हैं।

अमित की जिंदगी को बर्बादी की ओर धकेल गई हिंसा  
15 वर्षीय अमित पुत्र देशराज शब्बीरपुर में हुई जातीय हिंसा के दौरान सातवीं में पढ़ाई कर रहा था। हिंसा में हथियार और तलवारें लहराती देख तथा घरों और मवेशियों को जलता देख अमित अपना दिमागी संतुलन खो बैठा। अमित के दिल और दिमाग में हिंसा का ऐसा डर बैठा कि वह आज तक अपने होश में नहीं आ सका है।

कभी पढ़ाई लिखाई में होशियार रहा अमित आज अपना एक भी काम खुद नहीं कर पाता है। पिता देशराज ने बताया कि बेटे के इलाज के लिए उन्होंने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई थी, मगर प्रशासन ने हाथ खींच लिए।  

 

गांव को फसाद की नहीं, विकास की जरूरत

शब्बीरपुर गांव जातीय हिंसा की वजह से देश भर में चर्चाओं में रहा। मगर गांव के हालात देखें तो गांव को फसाद की नहीं, बल्कि विकास की जरूरत है। विकलांग जितेंद्र मेहनत और मजदूरी तक करने में सक्षम नहीं है। परिवार की हालत ऐसी है कि दो कच्चे मकान हैं, मगर छत नहीं है।

तिरपाल डालकर किसी तरह परिवार को छिपाए हुए है। इसी प्रकार शब्बीरपुर की घटना के बाद सदमे में मरे अमर सिंह के बेटे अमन के पास भी पक्का मकान तक नहीं है। तिरपाल डालकर गुजारा कर रहे हैं।  

लड़ाई झगड़ों से किसी का कोई लाभ नहीं है। जो हुआ वह एक हादसा था, जिसे हम भूल जाना चाहते हैं। हमारी कोशिश ये ही है कि गांव में अमन और शांति कायम हो। कोई भी किसी का उत्पीड़न न करे। हर कोई अपने त्योहार और खुशियों को मिलकर और अच्छे से मनाए।   
शिव कुमार, ग्राम प्रधान, शब्बीरपुर।  

भीम आर्मी पूरी तरह से अराजनीतिक संगठन है और चुनावी राजनीति से दूर रहेगी। हम भी चाहते हैं कि मायावती प्रधानमंत्री बने। उन्होंने दलित समाज के लिए  बहुत काम किया है। हम अनुसूचित जाति के लोगों को मताधिकार का प्रयोग करने के लिए जागरूक करेंगे।
कमल वालिया, जिलाध्यक्ष भीम आर्मी
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