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सूरजकुंड शमशान घाट पर व्यू कटर लगवाने की मांग
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कोविड और नॉन कोविड शवों का अलग-अलग हुआ संस्कार
मेरठ। सूरजकुुंड श्मशान में अब कोविड और नॉन कोविड प्रोटोकॉल वाले शवों का अलग-अलग जगह पर अंतिम संस्कार हो रहा है। रविवार को नगर आयुक्त मनीष बंसल ने निरीक्षण किया। उन्होंने गंगा मोटर कमेटी के सदस्यों और आचार्यों को भी पीपीई किट के प्रयोग की सलाह दी। श्मशान घाट में रात साढ़े आठ बजे तक कोविड प्रोटोकॉल वाले 38 और नॉन कोविड प्रोटोकॉल वाले 28 शव पहुंचे।
श्मशान घाट की पार्किग में 34 प्लेटफार्म रविवार को शुरू हुए। शाम चार बजे तक ये सभी फुल हो गए। इनके अलावा पहले से निर्मित 48 प्लेटफार्म पर संस्कार किया गया। लंबे समय बाद यह पहला मौका था जब शाम चार बजे तक जमीन पर किसी शव का अंतिम संस्कार नहीं हुआ। कमेटी के कोषाध्यक्ष अनिल मित्तल ने बताया कि पार्किंग में कोविड शवों को ले जाने के लिए भी अलग रास्ता बनाया गया है। सूरजकुंड रोड पर ही वाहनों की पार्किंग हो रही है।
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सूरजकुंड शमशान घाट पर व्यू कटर लगवाने की मांग
मेरठ। वार्ड नंबर 59 के भाजपा पार्षद अंशुल गुप्ता ने सूरजकुंड शमशान घाट पर सड़क की तरफ व्यू कटर लगवाने की मांग की है। नगर आयुक्त को दिए गए पत्र में अंशुल ने कहा कि नगर निगम ने कोविड सक्रमित शवों के दाह संस्कार के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नए प्लेटफार्मों का निर्माण कराया है। यहां जलने वाली चिताएं आसपास रहने वाले लोगों को घरों से दिखाई देती हैं। इसके चलते लोग इसका विरोध कर रहे हैं। नगर निगम सड़क की तरफ से कम से कम 30 फिट ऊंचे टिन के व्यू कटर लगाएं ताकि जलती चिता दिखाई न दें।
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मेडिकल कॉलेज की सच्चाई छिपा रहे अधिकारी
मेरठ। मेरठ मेडिकल कॉलेज में कोरोना मरीजों के इलाज और मौतों का सच छिपाया जा रहा है। सूरजकुंड पहुंचे कुछ मृतकों के परिजनों ने बताया कि मात्र आधे घंटे पहले पूरी तरह से स्वस्थ बताया जाता है और कुछ देर बात ही मौत हो जाती है। खाना लेकर जाते हैं तो वह कभी मरीज को मिलता है तो कभी नहीं। दवाएं और अन्य आवश्यक वस्तु भी मरीजों तक नहीं पहुंच रहीं है। वहीं, कुछ तीमारदार खाना मरीजों तक न पहुंचाने की परेशानी बताते रहे।
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ऑक्सीजन की कमी से गई जान
- सपा नेता एंव डोनेट स्माइल फाउंडेशन के अध्यक्ष पवन गुर्जर ने बताया कि माधवपुरम निवासी विनोद सैनी की आक्सीजन की कमी के कारण मौत हुई। मेडिकल कॉलेज में कूड़ा नहीं उठता है। लोगों को भोजन तक उपलब्ध नहीं कराया जाता है। आक्सीजन भी उन्हीं खास लोगों को मिल पाती हैं। माधवपुरम निवासी विनोद सैनी और ब्रह्मपुरी निवासी अमित वर्मा की आक्सीजन की कमी के कारण मौत हुई।
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केस तीन: सीए को नहीं मिली चिकित्सा सुविधा
- सूरजकुंड श्मशान में पहुंचे अलीगढ़ निवासी सीएस भारत वार्ष्णेय के परिजनों में विकास ने बताया कि रविवार सुबह तक सब स्वास्थ्य ठीक बताते रहे। इस बीच प्लाज्मा की व्यवस्था कराई गई। सुबह 9:00 बजे तक वार्ड बॉय और डाक्टर भी बताते रहे कि सब कुछ ठीक है। मात्र एक घंटे के अंतराल में बताया कि उसकी मौत हो गई है।
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मेरठ। सूरजकुुंड श्मशान में अब कोविड और नॉन कोविड प्रोटोकॉल वाले शवों का अलग-अलग जगह पर अंतिम संस्कार हो रहा है। रविवार को नगर आयुक्त मनीष बंसल ने निरीक्षण किया। उन्होंने गंगा मोटर कमेटी के सदस्यों और आचार्यों को भी पीपीई किट के प्रयोग की सलाह दी। श्मशान घाट में रात साढ़े आठ बजे तक कोविड प्रोटोकॉल वाले 38 और नॉन कोविड प्रोटोकॉल वाले 28 शव पहुंचे।
श्मशान घाट की पार्किग में 34 प्लेटफार्म रविवार को शुरू हुए। शाम चार बजे तक ये सभी फुल हो गए। इनके अलावा पहले से निर्मित 48 प्लेटफार्म पर संस्कार किया गया। लंबे समय बाद यह पहला मौका था जब शाम चार बजे तक जमीन पर किसी शव का अंतिम संस्कार नहीं हुआ। कमेटी के कोषाध्यक्ष अनिल मित्तल ने बताया कि पार्किंग में कोविड शवों को ले जाने के लिए भी अलग रास्ता बनाया गया है। सूरजकुंड रोड पर ही वाहनों की पार्किंग हो रही है।
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सूरजकुंड शमशान घाट पर व्यू कटर लगवाने की मांग
मेरठ। वार्ड नंबर 59 के भाजपा पार्षद अंशुल गुप्ता ने सूरजकुंड शमशान घाट पर सड़क की तरफ व्यू कटर लगवाने की मांग की है। नगर आयुक्त को दिए गए पत्र में अंशुल ने कहा कि नगर निगम ने कोविड सक्रमित शवों के दाह संस्कार के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नए प्लेटफार्मों का निर्माण कराया है। यहां जलने वाली चिताएं आसपास रहने वाले लोगों को घरों से दिखाई देती हैं। इसके चलते लोग इसका विरोध कर रहे हैं। नगर निगम सड़क की तरफ से कम से कम 30 फिट ऊंचे टिन के व्यू कटर लगाएं ताकि जलती चिता दिखाई न दें।
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मेडिकल कॉलेज की सच्चाई छिपा रहे अधिकारी
मेरठ। मेरठ मेडिकल कॉलेज में कोरोना मरीजों के इलाज और मौतों का सच छिपाया जा रहा है। सूरजकुंड पहुंचे कुछ मृतकों के परिजनों ने बताया कि मात्र आधे घंटे पहले पूरी तरह से स्वस्थ बताया जाता है और कुछ देर बात ही मौत हो जाती है। खाना लेकर जाते हैं तो वह कभी मरीज को मिलता है तो कभी नहीं। दवाएं और अन्य आवश्यक वस्तु भी मरीजों तक नहीं पहुंच रहीं है। वहीं, कुछ तीमारदार खाना मरीजों तक न पहुंचाने की परेशानी बताते रहे।
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ऑक्सीजन की कमी से गई जान
- सपा नेता एंव डोनेट स्माइल फाउंडेशन के अध्यक्ष पवन गुर्जर ने बताया कि माधवपुरम निवासी विनोद सैनी की आक्सीजन की कमी के कारण मौत हुई। मेडिकल कॉलेज में कूड़ा नहीं उठता है। लोगों को भोजन तक उपलब्ध नहीं कराया जाता है। आक्सीजन भी उन्हीं खास लोगों को मिल पाती हैं। माधवपुरम निवासी विनोद सैनी और ब्रह्मपुरी निवासी अमित वर्मा की आक्सीजन की कमी के कारण मौत हुई।
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केस तीन: सीए को नहीं मिली चिकित्सा सुविधा
- सूरजकुंड श्मशान में पहुंचे अलीगढ़ निवासी सीएस भारत वार्ष्णेय के परिजनों में विकास ने बताया कि रविवार सुबह तक सब स्वास्थ्य ठीक बताते रहे। इस बीच प्लाज्मा की व्यवस्था कराई गई। सुबह 9:00 बजे तक वार्ड बॉय और डाक्टर भी बताते रहे कि सब कुछ ठीक है। मात्र एक घंटे के अंतराल में बताया कि उसकी मौत हो गई है।
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