फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   school students fear from parents rather than condector and driver

स्कूली बच्चों को कंडक्टर और ड्राइवर से ज्यादा अभिभावकों से खतरा

Fri, 15 Sep 2017 06:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 15 Sep 2017 06:39 PM IST
विज्ञापन
school students fear from parents rather than condector and driver
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा में अभिभावकों से ज्यादा डर है। स्कूल प्रबंधन के  अनुसार बच्चे क ी सुरक्षा में अभिभावक बड़ा खतरा हैं। बच्चे को स्कूल में प्रवेश दिलाने से लेकर रोजाना स्कूल लाने-छोड़ने वाले अभिभावक बच्चे के साथ दुर्घटना करा सकते हैं। गुरुग्राम की घटना के बाद शहर के पब्लिक स्कूलों में अभिभावकों की एंट्री पर सख्ती बढ़ा दी है, लेकिन सीबीएसई की गाइडलाइन के अनुसार बस चालक, कंडक्टर का वेरिफिकेशन गायब है। पब्लिक स्कूलों में अभिभावकों को एंट्री के लिए विशेष आईकार्ड जारी किए जा रहे हैं। जबकि अभिभावकों का आधार कार्ड, पहचान पत्र और फोटो जैसे बेहद महत्वपूर्ण कागज विद्यालयों में पहले से ही जमा हैं। इसके बावजूद स्कूलों ने बच्चों की सुरक्षा बढ़ाने के नाम पर स्कूलों में अभिभावकों की एंट्री बंद कर दी है। एंट्री गेट पर डायरी रखकर अभिभावकों को स्कूल में जाने दिया जा रहा है। लेकिन वो बस, ऑटो चालक जो हर रोज आपके बच्चे को ला रहा है, उसका नाम, पता और वेरीफिकेशन कराना किसी स्कूल की जिम्मेदारी नहीं है। 
विज्ञापन

शहर के अधिकांश विद्यालयों में कांट्रेक्ट पर बसें, ऑटो चल रहे हैं। प्राइवेट ऑटो भी बच्चों को लाने-छोड़ने में लगे हैं। स्कूल इन चालकों की जानकारी रखना जरुरी नहीं समझते। उनके मुताबिक इन चालकों का हमारे विद्यालय से संबंध नहीं, अभिभावकों की जिम्मेदारी है। लेकिन जो अभिभावक सालों से हर रोज अपने बच्चे को विद्यालय लेने आ रहे हैं उनके लिए और सख्त नियम बनाए जा रहे हैं। 
विज्ञापन

  
 बस मेरठ में मालिक कहीं ओर
सीबीएसई ने विद्यालयों में प्रिंसिपल, शिक्षक के साथ कर्मचारी, कैंटीन संचालकों व चपरासी तक के सत्यापन का आदेश दिया है। वहीं निजी स्कूलों में बस चालकों, कंडक्टरों का सत्यापन नहीं हैं। उनके स्कूल के बच्चों को कौन सी बस ले जा रही है, उस बस का ड्राइवर, कंडक्टर कौन है प्रबंधन को इससे कोई मतलब नहीं। प्रबंधन केवल उस ठेकेदार को जानता है जिससे उसने बसें ली हैं। वो ठेकेदार जो दूसरे शहर में रहता है और बसें दूसरे शहर में चलती हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

- स्कूली वाहनों से जुड़ी हर अभिभावक की परेशानी
. स्कूलों में कभी भी बच्चों से ड्राइवर, कंडक्टर का फीडबैक नहीं लेते
. बिना नंबर और नाम के नियम विपरीत बसें, मेटाडोर और ऑटो स्कूलो ंमें लगे हैं ये किसके हैं, इनसे होने वाली दुर्घटना का कौन जिम्मेदार होगा इसकी कोई जानकारी अभिभावकों को नहीं
. स्कूल की बसें व यातायात सुविधा कैसी है अभिभावकों से इसकी जानकारी कभी नहंी ली जाती
. अभिभावक बस चालक, कंडक्टर की शिकायत करें तो स्कूल प्रबंधन अनसुनी करता है
. बसों की स्पीड, ड्राइवर का ड्राइविंग लाइसेंस, कैरेक्टर सर्टिफिकेट, फिटनेस की कभी जांच नहंी होती
. स्कूल प्रबंधन रेंडमली कभी भी सड़क पर बस की स्पीड, उसकी सेहत की जांच नहीं करते।
. अधिकांश बस ड्राइवर, कंडक्टर, ऑटो चालक बच्चों के सामने गालियां व अभद्र भाषा बोलते हैं
. अधिकांश बस ड्राइवर, कंडक्टर बस में एंड्रायड मोबाइल चलाते हैं जबकि सीबीएसई ने एंड्रायड सेट रखने को साफ मना किया है
. बस चालक, सहायक व कंडक्टर के  पुलिस वेरिफिकेशन का कुछ पता नहीं, पुलिस और स्कूल प्रबंधन पूरी तरह बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर ढिलाई बरतते हैं। 


सामने सजावट क ा सीसीटीवी
शहर के अधिकांश विद्यालयों में सीसीटीवी कैमरा केवल सजावट को लगे हैं। स्कूल के मेन गेट, ऑफिस, प्रिंसिपल कार्यालय और मुख्य कॉरिडोर तक सीसीटीवी लगे हैं। लेकिन ऐसी जगह जहां बच्चों का अधिकांश वक्त बीतता है, जहां बच्चों की सुरक्षा प्रभावित होती है वहां सीसीटीवी गायब हैं। पिछले दिनों शहर के एक प्रमुख विद्यालय में अभिभावकों ने गुंडों के साथ घुसकर छात्रा की हंटर से बेरहमी से पिटाई की थी। इस पूरी घटना में क्लासरूम में जहां छात्रा की पिटाई हुई वहां कोई सीसीटीवी नहीं लगा था। इसके कारण अपराधियों पर कार्रवाई करने में काफी मुश्किल हुई। इसके बाद भी विद्यालयों ने खुद को नहीं सुधारा। वॉशरूम के बाहर, कैंटीन, क्लासरूम, गैलरी, पार्किंग एरिया, किचन, मेस, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लंच रूम और मेन रोड पर कोई सीसीटीवी नहीं है। जबकि यही क्षेत्र सर्वाधिक संवेदनशील हैं। 

नोटच गाइडलाइन मगर कहीं नहीं महिला अटेंडेंट
शहर के किसी भी स्कूली बस में महिला अटेंडेंट को नियुक्त नहीं किया गया है। हर उम्र की छात्राएं स्कूली बस से रोजाना आती-जाती हैं। यात्रा में कोई अनहोनी हो जाए तो जिम्मेदारी किसकी होगी। स्कूल शिक्षिकाओं को एक निर्धारित दूरी के लिए बस में भेज देते हैं, लेकिन स्थायी तौर पर किसी महिला अटेंडेंट की नियुक्ति नहीं है। सीबीएसई ने स्कूलों को नोटच गाइडलाइन का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है। स्कूलों में रोजाना कार्यशालाएं भी हो रही हैं लेकिन बसों में छात्राओं और छोटे बच्चों के साथ कंडक्टर, ड्राइवर क्या सुलूक कर रहा है इसकी परवाह नहीं है। ड्राइवर, कंडक्टर ही बच्चे को बस में चढ़ाते हैं, उसे गलत तरीके से छूते भी हैं, लेकिन बच्चा कुछ नहीं कह पाता।  

 ठेके पर बसें सुविधाएं गायब
शहर के अधिकांश विद्यालयों में अपनी ट्रंासपोर्ट सुविधा नहीं हैं। विद्यालयों में जो बसें लगी हैं वो ठेके पर चल रही हैं। ठेके पर बसें होने के कारण उनमें सुविधाओं की ओर स्कूल प्रबंधन का कभी ध्यान ही नहीं जाता। प्रबंधन कभी भी बस और ड्राइवर कंडक्टर की सुध नहीं लेते। लगातार दुर्घटनाएं होने के बाद भी बसों में जीपीएस, सीसीटीवी गायब हैं। चालक, सहायक कौन हैं प्रबंधन को नहीं पता। 

 फीस बढ़ती है मगर सुविधाएं नहीं
स्कूलों में हर साल बस, ऑटो की फीस बढ़ती है मगर सुविधाएं नहीं। बसें कंडम हैं, ऑटो खराब हैं। बसों में प्रशिक्षित ड्राइवर, कंडक्टर और हेल्पर नहीं हैं। महिला अटेंडेंट गायब है। बसों में कै मरा और जीपीएस नहीं हैं। बस चालक और सहायक का पुलिस वेरिफिकेशन भी नदारद है। 


प्रिंसिपलों का कहना हमारे यहां तो सब ठीक है
स्कूलों की ट्रांसपोर्टेशन सुविधा अभिभावकों के लिए चिंता का विषय है। बच्चे हर रोज परेशान होते हैं खतरा झेलकर विद्यालय पहुंचते हैं, लेकिन प्रिंसिपलों का कहना है कि हमारे यहां तो सब ठीक है। कोई भी स्कूल प्रबंधन अपने यातायात सिस्टम को सुधारने की दिशा में पहल करना नहीं चाहता।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed