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हनुमान मंदिर के दान-पात्र को लेकर दो पक्षों में बवाल, एक-दूसरे पर लगाए गंभीर आरोप

Thu, 15 Dec 2016 12:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Updated Thu, 15 Dec 2016 12:54 PM IST
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Galigluj presidency two sides, both leveled serious accusations at each
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
मेरठ में सदर व्यापार मंडल में घमासान मचा है। अध्यक्ष पद को लेकर सुनील दुआ और विनोद जायसवाल एक- दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। बुधवार को हनुमान मंदिर के दान पात्र को लेकर दोनों पक्षों में जमकर गालीगलौज हुई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ सदर बाजार थाने में तहरीर दी है।
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सदर व्यापार मंडल चुनाव को लेकर पिछले एक महीने से विवाद चल रहा है। 17 नवंबर को एक गुट ने निर्वाचन प्रक्रिया पूर्ण होने का दावा करते हुए उसमें विनोद जायसवाल को अध्यक्ष और जावेद अहमद को महामंत्री घोषित किया था। सदर व्यापार मंडल के अध्यक्ष रहे सुनील दुआ ने चुनाव प्रक्रिया को एकतरफा और फर्जी बताया था। तब से दोनों पक्षों के बीच विवाद चल रहा है। दो दिन पूर्व विनोद जायसवाल ने अपनी टीम के साथ शिवचौक स्थित मंदिर का दान पात्र खोला और उसमें रखे 57090 रुपये निकालकर बैंक खाते में जमा करा दिए।
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वहीं बुधवार सुबह जब वह एक दर्जन से ज्यादा लोगों के साथ हनुमान चौक स्थित मंदिर का दान पात्र खोलने पहुंचे तो वहां सुनील दुआ भी पहुंच गए और उनका विरोध किया। जिस पर दोनों पक्षों के बीच जमकर गालीगलौज हुई। सुनील दुआ ने विनोद जायसवाल और उनके साथियों पर मारपीट का आरोप लगाते हुए एसएसपी से शिकायत की। वहीं, विनोद जायसवाल ने सुनील दुआ पर रिवाल्वर तानने और धमकी देने का आरोप लगाते थाने में तहरीर दी है।
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अरुण वशिष्ठ बता चुके चुनाव अवैध
संयुक्त व्यापार संघ के महामंत्री अरुण वशिष्ठ ने दो दिन पूर्व सदर व्यापार मंडल के महामंत्री काजी जावेद अहमद को पत्र जारी किया है। उन्होंने विवाद को आपसी वार्ता से सुलझाने के साथ ही निर्वाचन को अवैधानिक बताया है।

फर्जी तरीके से हुआ चुनाव
विनोद जायसवाल ने फर्जी तरीके से चुनाव किया है। हमारे पास इसके सभी सुबूत हैं। अब वे संस्था के रुपयों को खाना चाहते हैं। जिसका मैंने विरोध किया तो मारपीट की गई।- सुनील दुआ


पैसे खाना चाहता है सुनील
हमारा चुनाव पूरी तरह वैधानिक तरीके से हुआ। सुनील दुआ पैसा खाना चाहते हैं, जबकि हमने मंदिरों का पैसा निकालकर बैंक में जमा कराया है, जिसकी रसीद हमारे पास है। अरुण वशिष्ठ ने एक पक्षीय वार्ता से पत्र लिखा है। इसका कोई औचित्य नहीं है। - विनोद जायसवाल
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