आरटीओ से भेजे डीएल हो गए लापता
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आरटीओ विभाग से बनवाए गए सैकड़ों ड्राइविंग लाइसेंस लापता हो गए हैं। महीनों तक लाइसेंस घर न पहुंचने पर लोग आरटीओ और डाक विभाग के चक्कर काटकर थक चुके हैं, लेकिन अभी तक यह नहीं पता चल पाया कि आखिर लाइसेंस कहां हैं। वहीं नवीनीकरण वाले डीएल भी नहीं मिल पा रहे हैं। लोगों का कहना है कि शिकायत के बाद भी अधिकारी नहीं सुन रहे। चार साल पहले तक डीएल बनाकर अभ्यर्थी को ऑफिस से ही जारी कर दिया जाता था। इस प्रक्रिया में घर के पते आदि में फर्जीवाड़ा होने पर विभाग ने यह प्रक्रिया बदल दी थी। एड्रेस वैरीफिकेशन के लिए डीएल को डाक द्वारा भेजा जाता है। प्रक्रिया समयबद्ध न होने के कारण एक से दो दिन में बनने वाला डीएल लोगों के घर महीनों बाद भी नहीं पहुंच पा रहा है। लोग अपने डीएल के बारे में पता करने के लिए आरटीओ पहुंचते हैं तो उन्हें डाकखाने भेज दिया जाता है। डाकखाने पहुंचने पर आरटीओ जाने को कह दिया जाता है।
13 माह में भी नहीं हुआ रिन्यूवल
खरखौदा ब्लाक के गांव बिजौली निवासी कुलदीप कुमार पुत्र रतन सिंह ने अपने हैवी डीएल के रिन्यूवल के लिए 1 जनवरी 2016 को फार्म आदि भरकर 250 रुपये फीस जमा कर दी थी। 13 माह बीत गए, लेकिन डीएल का रिन्यूवल नहीं हो सका। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से डीएल की रिन्यूवल डेट निकल गई है। नए सिरे से डीएल रिन्यूवल कराने के लिए अब कुलदीप को 250 रुपये की बजाय लाइसेंस फीस और पेनाल्टी आदि के लिए 2500 रुपये जमा करने पड़ेंगे।
लर्निंग को छोड़कर बाकी लाइसेंस डाक द्वारा न भेजने की मांग
एड्रेस प्रूफ वैरिफिकेशन के लिए लर्निंग लाइसेंस के अलावा परमानेंट, डुप्लीकेट और रिन्यूवल वाले डीएल को भी घर पर डाक द्वारा भेजा जा रहा है। लोगों का कहना है कि लर्निंग लाइसेंस में घर के पते का वैरीफिकेशन हो जाता है तो परमानेंट डीएल को घर भेजने का कोई तुक नहीं है। इसके अलावा रिन्यूवल और डुप्लीकेट डीएल भी तुरंत दिए जाने चाहिए।