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गन्ना मूल्य पर भाजपा ने कलक्ट्रेट में डाला डेरा
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Thu, 28 Jan 2016 02:14 AM IST
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गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी न होने के विरोध में बुधवार को भाजपाइयों ने कलक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान भाजपा नेताओं ने प्रदेश सरकार को किसान विरोधी करार देते हुए उसे उखाड़ फेंकने का आह्वान किया। इसके लिए सपा सरकार के खिलाफ आरपार की लड़ाई छेड़ने का एलान किया। साथ ही गन्ना मूल्य 350 रुपये प्रति कुंतल करने की मांग की।
धरनास्थल पर हुई सभा को संबोधित करते हुए कैराना सांसद हुकुम सिंह ने कहा कि धरती पुत्र होने का दावा करने वाले मुलायम सिंह किसानों की ओर से आंखें बंद किए बैठे हैं। सपा सरकार पूंजीपतियों को संरक्षण दे रही है। गन्ना उपज की लागत 305 रुपये प्रति कुंतल से ज्यादा आ रही है, लेकिन गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया जा रहा है।
सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि किसान का लगातार शोषण हो रहा है। केंद्र सरकार ने छह हजार करोड़ रुपये का पैकेज गन्ना भुगतान के लिए दिया, लेकिन प्रदेश ने यह धनराशि ली ही नहीं। आरोप लगाया कि चीनी मिल मालिकों को लाभ पहुंचाने के लिए गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने आह्वान किया कि हम गन्ना मूल्य को लेकर आंदोलन करेंगे, लेकिन किसानों को भी साथ देना होगा। सरधना विधायक ठाकुर संगीत सोम ने कहा कि किसानों को देने के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है, लेकिन रामपुर में जन्मदिन और सैफई महोत्सव के नाम पर करोड़ों रुपये बर्बाद किये जा रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि हम लड़ना-भिड़ना जानते हैं। अगला आंदोलन चीनी मिलों की डिस्टिलरी पर तालाबंदी का होगा। विधायक रविंद्र भड़ाना ने कहा कि गन्ना मूल्य पर अब सरकार से आरपार की लड़ाई होगी। अध्यक्षता जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा और संचालन संदीप प्रधान ने किया। सभा में सतेंद्र भराला, सोमेंद्र तोमर, जितेंद्र वर्मा, डॉ. मीनाक्षी भराला, मुखिया गुर्जर, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अतुल सिंह के अलावा विनीत अग्रवाल शारदा, रोहताश गुर्जर, नरेश गुर्जर, पूर्व विधायक गोपाल काली, अतुल खटीक, रणवीर राणा, सत्यवीर त्यागी, रोबिन गुर्जर, डॉ. चरण सिंह लिसाड़ी, योगेश त्यागी, विमल शर्मा, नैन सिंह तोमर आदि ने विचार रखे।
ये भी रहे धरने में मौजूद
धरना-प्रदर्शन में अजय गुप्ता, डॉ. विशाल सारस्वत, सुनील अग्रवाल, कुंवर बासित अली, हरीश चौधरी, अमित मोहन गुप्ता, समीर चौहान, नीरज जिटौली, संजीव सहदेव, सुरेश सोम, अजीत राठी, हिमांशु त्यागी, संचित गर्ग भोला, देवेंद्र त्यागी, केपी सिंह, राजेश्वर छतरी, संजीव बंसल, विक्की तनेजा, सतपाल प्रधान, दीपक शर्मा, बिजेंद्र लौहरे, राजेंद्र प्रेमी, मंजू सोनी, विमला जाटव, नीरज गोयल, सोनू त्यागी, पंकज भारद्वाज, सुभाष दीक्षित, दिनेश खटीक, नितिन गोस्वामी, लीले सिंह वर्मा, मुनेश बाफर, इंद्रपाल बजरंगी आदि मौजूद रहे।
टिकट, पद के लिए जुटाई भीड़
यह भाजपा का पिछले एक दशक का सबसे प्रभावी धरना-प्रदर्शन रहा। नवनियुक्त जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा का पहला ही आंदोलन उनके लिए यादगार बन गया। धरने में करीब ढाई हजार की भीड़ जुटी। दक्षिण से दावेदारी कर रहे भाजयुमो के राष्ट्रीय मंत्री सोमेंद्र तोमर भी युवाओं की अच्छी भीड़ लेकर धरने में मौजूद रहे। वहीं, सिवालखास विधानसभा क्षेत्र से आई भीड़ जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मीनाक्षी भराला और क्षेत्रीय मंत्री सतेंद्र भराला के नेतृत्व में पहुंची। मीनाक्षी सिवालखास से दावेदारी कर रही हैं।
हस्तिनापुर क्षेत्र से पूर्व विधायक गोपाल काली खासी भीड़ लेकर आए तो किठौर से सत्यवीर त्यागी ने भी धरने में भीड़ के साथ पहुंचकर ताकत दिखाई। बिजेंद्र प्रधान भी करीब सौ कार्यकर्ताओं के साथ धरने में पहुंचे। ये सभी विधानसभा के दावेदार हैं। दूसरी तरफ, जिला संगठन के साथ ही मंडल इकाईयों का विस्तार होना है। ऐसे में पद की दौड़ में शामिल कार्यकर्ताओं पर भी अपना वजूद दिखाने का दायित्व था। इसके चलते भी पद के चाहने वाले भीड़ लेकर धरने में पहुंचे।
स्वीकृति पार्क की, धरना डीएम कार्यालय पर
भाजपाइयों का प्रदर्शन कलक्ट्रेट स्थित धरना पार्क में प्रस्तावित था। लेकिन, उन्होंने डीएम कार्यालय के सामने ही माइक लगाकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। माइक बजते देख एडीएम सिटी एसके दूबे मौके पर पहुंचे और वहां मौजूद चौकी इंचार्ज और इंस्पेक्टर सिविल लाइन को हड़काना शुरू कर दिया। इस पर इंस्पेक्टर सिविल लाइन ने धरनारत भाजपा नेताओं से कहा कि वह पार्क में धरना दें, इंस्पेक्टर ने धरने की परमिशन भी मांगी। इसे लेकर हंगामा शुरू हो गया और भाजपाईयों ने नारेबाजी शुरू कर दी। भाजपाइयों की भीड़ और उनके रुख को देखते हुए एडीएम सिटी वहां से चले गए और इंस्पेक्टर ने भी चुप्पी साध ली। इसके बाद एसपी सिटी ओमप्रकाश फोर्स के साथ धरना स्थल पर पहुंचे, लेकिन तब तक कलक्ट्रेट में भीड़ इकट्ठा हो चुकी थी।
धरने में नजर आई खींचतान
भाजपा में खींचतान जारी है। इस धरना प्रदर्शन में भी यह साफ नजर आई। एक तरफ जहां भारी भीड़ जुटने से जिलाध्यक्ष और उनका खेमा उत्साहित था। वहीं विरोधी गुट जो भीड़ लेकर नहीं आया था, वह सकते में नजर आ रहा था। धरने से कई चेहरे जहां नदारद रहे, तो जो निवर्तमान जिला इकाई में शामिल पदाधिकारी हैं, वह भी अकेले या महज चार-पांच लोगों के साथ पहुंचे। इसके अलावा धरने में यह भी चर्चा रही कि जनप्रतिनिधियों के पास कोई भीड़ नहीं है? क्योंकि स्थानीय जनप्रतिनिधि चंद समर्थकों के साथ ही धरना स्थल पर पहुंचे।
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धरनास्थल पर हुई सभा को संबोधित करते हुए कैराना सांसद हुकुम सिंह ने कहा कि धरती पुत्र होने का दावा करने वाले मुलायम सिंह किसानों की ओर से आंखें बंद किए बैठे हैं। सपा सरकार पूंजीपतियों को संरक्षण दे रही है। गन्ना उपज की लागत 305 रुपये प्रति कुंतल से ज्यादा आ रही है, लेकिन गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया जा रहा है।
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सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि किसान का लगातार शोषण हो रहा है। केंद्र सरकार ने छह हजार करोड़ रुपये का पैकेज गन्ना भुगतान के लिए दिया, लेकिन प्रदेश ने यह धनराशि ली ही नहीं। आरोप लगाया कि चीनी मिल मालिकों को लाभ पहुंचाने के लिए गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने आह्वान किया कि हम गन्ना मूल्य को लेकर आंदोलन करेंगे, लेकिन किसानों को भी साथ देना होगा। सरधना विधायक ठाकुर संगीत सोम ने कहा कि किसानों को देने के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है, लेकिन रामपुर में जन्मदिन और सैफई महोत्सव के नाम पर करोड़ों रुपये बर्बाद किये जा रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि हम लड़ना-भिड़ना जानते हैं। अगला आंदोलन चीनी मिलों की डिस्टिलरी पर तालाबंदी का होगा। विधायक रविंद्र भड़ाना ने कहा कि गन्ना मूल्य पर अब सरकार से आरपार की लड़ाई होगी। अध्यक्षता जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा और संचालन संदीप प्रधान ने किया। सभा में सतेंद्र भराला, सोमेंद्र तोमर, जितेंद्र वर्मा, डॉ. मीनाक्षी भराला, मुखिया गुर्जर, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अतुल सिंह के अलावा विनीत अग्रवाल शारदा, रोहताश गुर्जर, नरेश गुर्जर, पूर्व विधायक गोपाल काली, अतुल खटीक, रणवीर राणा, सत्यवीर त्यागी, रोबिन गुर्जर, डॉ. चरण सिंह लिसाड़ी, योगेश त्यागी, विमल शर्मा, नैन सिंह तोमर आदि ने विचार रखे।
ये भी रहे धरने में मौजूद
धरना-प्रदर्शन में अजय गुप्ता, डॉ. विशाल सारस्वत, सुनील अग्रवाल, कुंवर बासित अली, हरीश चौधरी, अमित मोहन गुप्ता, समीर चौहान, नीरज जिटौली, संजीव सहदेव, सुरेश सोम, अजीत राठी, हिमांशु त्यागी, संचित गर्ग भोला, देवेंद्र त्यागी, केपी सिंह, राजेश्वर छतरी, संजीव बंसल, विक्की तनेजा, सतपाल प्रधान, दीपक शर्मा, बिजेंद्र लौहरे, राजेंद्र प्रेमी, मंजू सोनी, विमला जाटव, नीरज गोयल, सोनू त्यागी, पंकज भारद्वाज, सुभाष दीक्षित, दिनेश खटीक, नितिन गोस्वामी, लीले सिंह वर्मा, मुनेश बाफर, इंद्रपाल बजरंगी आदि मौजूद रहे।
टिकट, पद के लिए जुटाई भीड़
यह भाजपा का पिछले एक दशक का सबसे प्रभावी धरना-प्रदर्शन रहा। नवनियुक्त जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा का पहला ही आंदोलन उनके लिए यादगार बन गया। धरने में करीब ढाई हजार की भीड़ जुटी। दक्षिण से दावेदारी कर रहे भाजयुमो के राष्ट्रीय मंत्री सोमेंद्र तोमर भी युवाओं की अच्छी भीड़ लेकर धरने में मौजूद रहे। वहीं, सिवालखास विधानसभा क्षेत्र से आई भीड़ जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मीनाक्षी भराला और क्षेत्रीय मंत्री सतेंद्र भराला के नेतृत्व में पहुंची। मीनाक्षी सिवालखास से दावेदारी कर रही हैं।
हस्तिनापुर क्षेत्र से पूर्व विधायक गोपाल काली खासी भीड़ लेकर आए तो किठौर से सत्यवीर त्यागी ने भी धरने में भीड़ के साथ पहुंचकर ताकत दिखाई। बिजेंद्र प्रधान भी करीब सौ कार्यकर्ताओं के साथ धरने में पहुंचे। ये सभी विधानसभा के दावेदार हैं। दूसरी तरफ, जिला संगठन के साथ ही मंडल इकाईयों का विस्तार होना है। ऐसे में पद की दौड़ में शामिल कार्यकर्ताओं पर भी अपना वजूद दिखाने का दायित्व था। इसके चलते भी पद के चाहने वाले भीड़ लेकर धरने में पहुंचे।
स्वीकृति पार्क की, धरना डीएम कार्यालय पर
भाजपाइयों का प्रदर्शन कलक्ट्रेट स्थित धरना पार्क में प्रस्तावित था। लेकिन, उन्होंने डीएम कार्यालय के सामने ही माइक लगाकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। माइक बजते देख एडीएम सिटी एसके दूबे मौके पर पहुंचे और वहां मौजूद चौकी इंचार्ज और इंस्पेक्टर सिविल लाइन को हड़काना शुरू कर दिया। इस पर इंस्पेक्टर सिविल लाइन ने धरनारत भाजपा नेताओं से कहा कि वह पार्क में धरना दें, इंस्पेक्टर ने धरने की परमिशन भी मांगी। इसे लेकर हंगामा शुरू हो गया और भाजपाईयों ने नारेबाजी शुरू कर दी। भाजपाइयों की भीड़ और उनके रुख को देखते हुए एडीएम सिटी वहां से चले गए और इंस्पेक्टर ने भी चुप्पी साध ली। इसके बाद एसपी सिटी ओमप्रकाश फोर्स के साथ धरना स्थल पर पहुंचे, लेकिन तब तक कलक्ट्रेट में भीड़ इकट्ठा हो चुकी थी।
धरने में नजर आई खींचतान
भाजपा में खींचतान जारी है। इस धरना प्रदर्शन में भी यह साफ नजर आई। एक तरफ जहां भारी भीड़ जुटने से जिलाध्यक्ष और उनका खेमा उत्साहित था। वहीं विरोधी गुट जो भीड़ लेकर नहीं आया था, वह सकते में नजर आ रहा था। धरने से कई चेहरे जहां नदारद रहे, तो जो निवर्तमान जिला इकाई में शामिल पदाधिकारी हैं, वह भी अकेले या महज चार-पांच लोगों के साथ पहुंचे। इसके अलावा धरने में यह भी चर्चा रही कि जनप्रतिनिधियों के पास कोई भीड़ नहीं है? क्योंकि स्थानीय जनप्रतिनिधि चंद समर्थकों के साथ ही धरना स्थल पर पहुंचे।