पश्चिमी यूपी के एकमात्र हेपेटाइटिस सी क्लीनिक में पंजीकरण बंद, स्वास्थ्य मंत्रालय करेगा टेकओवर
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अब इस क्लीनिक में तभी पंजीकरण शुरू किए जाएंगे, जब स्वास्थ्य मंत्रालय के राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम की शुरुआत होगी। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय इसे टेकओवर करेगा। अब सिर्फ उन्हीं मरीजों का इलाज होगा, जिनका पहले से चल रहा है।
अभी तक यहां इंटरनेशनल एनजीओ डॉक्टर्स विद्आउट बॉर्डर की टीम मरीजों का निशुल्क इलाज कर रही है। उनका कांट्रेक्ट (अनुबंध) जून 2019 तक का है। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस-सी क्लीनिक की शुरुआत 25 जनवरी 2017 में हुई थी। तब से यहां अब तक करीब 2200 मरीजों का सफल उपचार किया जा चुका है।
करीब 800 मरीजों का इलाज चल रहा है। इस क्लीनिक में तीन डॉक्टर, तीन नर्स, तीन काउंसलर, दो लैब टेक्नीशियन समेत 25 लोगों का स्टाफ है। जिला अस्पताल के कमरा नंबर 17 में चल रहे इस क्लीनिक के इंचार्ज डॉ. हेमंत ने बताया कि यूपी सरकार इस क्लीनिक को टेकओवर कर लेगी। यह तय किया गया है कि वेटिंग में चल रहे मरीजों का इलाज टेकओवर करने केबाद ही शुरू किया जाएगा। लिहाजा पंजीकरण रोक दिया गया है और इसकेलिए नोटिस भी चस्पा कर दिया गया है।
माइक्रोबायोलॉजी लैब में तैयार हो रहा बड़ा केंद्र
उत्तर प्रदेश सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में भी हेपेटाइटिस सी का बड़ा केंद्र बनाया जा रहा है। इसमें हेपेटाइटिस सी के मरीजों का इलाज किया जाएगा। मेरठ केअलावा बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर और गौतमबुद्धनगर आदि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों के मरीज यहां इलाज करा सकेंगे।