इंजेक्शन जरिए दी जाएगी ‘दो बूंद जिंदगी की’, पोलियो वैक्सीन को बताया सुरक्षित
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मेरठ जिले में अब दो साल से कम उम्र के बच्चों को ‘दो बूंद जिंदगी की’ (पोलियो की खुराक) इंजेक्शन के जरिए दी जाएगी। इसे इनेक्टिव पोलियो वायरस वैक्सीन (आईपीवी) कहते हैं। मेरठ में ऐसे बच्चों की तादाद लाखों में है। इस संबंध में शासन के निर्देश सीएमओ कार्यालय में आ गए हैं। इसमें पोलियो वैक्सीन को सुरक्षित बताते हुए इसका प्रचार प्रसार करने की भी सलाह दी गई है।
कार्यवाहक सीएमओ डॉ. एसके शर्मा ने बताया कि पोलियो मुक्त होने के बाद टाइप-2 की वैक्सीन को बंद कर दिया गया है। पोलियो वायरस 1, 2 और 3 स्तर का होता है। टाइप टू वायरस की मौजूदगी अब पूरे विश्व में खत्म हो चुकी है। टाइप वन और टाइप थ्री के भी चुनिंदा केस ही सामने आते हैं। ऐसे में पोलियो मुक्त होने के बाद पी-2 की वैक्सीन को देना बंद कर दिया है। अब सिर्फ पोलियो वायरस पी-1 व पी 3 से बचाव के लिए बायवेलेंट वैक्सीन ही दी जाती है।
पहले ट्रायवेलेंट वैक्सीन दी जाती थी। इसमें तीनों तरह के वायरस के बचाव के एंटीजन मौजूद थे। उन्होंने बताया कि 1999 से 2015 तक ट्रायवेलेंट वैक्सीन दी गई है, इसका कोई विपरीत प्रभाव प्रकाश में नहीं आया है। यह सुरक्षित है, एहतियातन इस वैक्सीन को हटाया गया था।
3000 डोज हो चुकी वापस
गाजियाबाद की जिस कंपनी की पोलियो वैक्सीन में प्रतिबंधित तत्व पाए जाने का मामला सामने आया है। मेरठ में भी उसी कंपनी की 150 वायल यानी तीन हजार डोज पोलियो वैक्सीन निकली हैं। मामला सामने आने के बाद इन वैक्सीन के इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए वायल को जिले के 33 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) से स्वास्थ्य विभाग ने वापस मंगा लिया था।
अन्य कंपनियों की 52 हजार डोज हैं
डिप्टी सीएमओ डॉ. विश्वास चौधरी ने बताया कि गाजियाबाद की कंपनी के अलावा मेरठ में अन्य कंपनियों की करीब 2600 वायल यानी करीब 52 हजार डोज पोलियो वैक्सीन हैं, जो पूरी तरह से सुरक्षित हैं। यानी वैक्सीन का तीन माह तक का पर्याप्त स्टॉक है। लिहाजा टीकाकरण में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।
यह है मामला
केंद्र सरकार को पोलियो की दवा आपूर्ति करने वाली गाजियाबाद की एक दवा कंपनी की पोलियो वैक्सीन की जांच में प्रतिबंधित पी-2 के एंटीजन पाए जाने का दावा किया गया था। इस संबंध में 27 सितंबर को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने कविनगर थाने में कंपनी के खिलाफ तहरीर दी थी। यह कंपनी इंडोनेशिया से पोलियो की दवा मंगाती है। यहां 10 से 15 सितंबर के बीच वैक्सीन के सैंपल लिए गए थे।
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