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पुलिस की चाल, हुस्न का जाल, और बदमाश हो गए ढेर

Sun, 30 Jul 2017 12:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ शामली
अमर उजाला ब्यूरो/ शामली Updated Sun, 30 Jul 2017 12:51 PM IST
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Police move, Husseins trap, police killed criminals
पुलिस की गाड़ी पर फायरिंग

एक बार फिर बदमाशों की धरपकड़ और एनकाउंटर में महिला मित्र की भूमिका सामने आ रही है। नौशाद उर्फ डैनी तथा सरवर भी महिला मित्र के जाल में फंस चुके थे। पुलिस को इस संबंध में पक्की जानकारी थी। यही वजह है कि पुलिस ने लोकेशन ट्रेस करके उन दोनों को मुठभेड़ में मार गिराया। उधर, देर रात दोनों बदमाशों के शवों को भूरा गांव में दफना दिया गया।

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इससे पूर्व भी महिला मित्र के कारण बदमाशों के मारे जाने और गिरफ्तार होने के मामले सामने आ चुके हैं। डेढ़ साल पूर्व कैराना क्षेत्र के बदमाश कुरबान की बागपत में हत्या कर दी गई थी, तो उसमें एक महिला की भूमिका थी। इसके बाद कैराना क्षेत्र में ही मुरसीन की हत्या भी महिला मित्र की वजह से हुई। अब शनिवार सुबह पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान नौशाद उर्फ डैनी तथा सरवर को मार गिराया, तो उसमें भी एक महिला मित्र की भूमिका सामने आ रही है। 
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नौशाद उर्फ डैनी एक महिला मित्र के संपर्क में था। पुलिस महकमे को इस बात की जानकारी थी कि नौशाद अपनी महिला मित्र से मिलने अक्सर आता है। दोनों बदमाशों की धरपकड़ के लिए पुलिस ने पहले से ही जाल बिछा रखा था। इस सटीक सूचना मिलने पर शनिवार सुबह कोतवाली पुलिस ने घेराबंदी कर दी, जिसके चलते मुठभेड़ में नौशाद और सरवर मारे गए।

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भूरा गांव में दबिश देना भी था महाभारत

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पुलिस ने दोनों बदमाशों किया ढेर

गौरतलब है कि पांच साल पूर्व सहारनपुर और शामली में सिपाही की हत्या करके सुर्खियों में आए कुख्यात मुस्तफा उर्फ कग्गा को भी महिला मित्र के जरिये ही पुलिस ने एनकाउंटर में मार दिया था। ऐसे अन्य भी मामले पूर्व में हो चुके हैं।  
 
एक दौर में कैराना क्षेत्र के गांव भूरा में किसी भी बदमाश अथवा मादक पदार्थों के तस्कर को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस टीम के लिए दबिश देना आसान नहीं होता था। दबिश के दौरान विरोध होने तथा पुलिस पर हमले की घटनाएं होती थीं, जिसके चलते पुलिस दबिश देने से हिचकती थी। अब पुलिस का हौसला बढ़ा है। तो बदमाशों को संरक्षण देने वालों में खलबली मची है।

चिकित्सकों के पैनल ने किया शवों का पोस्टमार्टम

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मुठभेड़ में घायल सिपाही

शनिवार सुबह करीब 4:15 बजे गांव भूरा में मुठभेड़ में नौशाद उर्फ डैनी तथा सरवर मार गिराये गए थे। दोनों के शव झिंझाना सीएचसी से पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए थे। पोस्टमार्टम कराने के लिए प्रशासनिक अनुमति के बाद पैनल का गठन किया गया। पैनल में शामिल दो चिकित्सकों ने दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया। मालूम चला है कि नौशाद के शरीर में छह गोलियां लगी, जिनमें से चार गोलियों के मैटल शरीर में मिले, जबकि दो गोलियां पार निकल गई। नौशाद को पेट, छाती और कलाई में गोली लगी। वहीं, सरवर के सिर में एक गोली लगी, जो भेजा उड़ाती हुई पार निकल गई। उधर, पोस्टमार्टम होने के बाद पुलिस ने नौशाद और सरवर का शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। पोस्टमार्टम हाउस से दोनों के शव गांव भूरा ले जाने के दौरान सुरक्षा के लिहाज से पुलिसकर्मी भी मौजूद रहे। 

नौशाद का आपराधिक इतिहास
2007 में कैराना में मारपीट व रंगदारी मांगने, 2009 में हरिद्वार में चोरी, 2010 में भी कैराना में चोरी व माल बरामदगी, 2012 में कैराना में डकैती, अवैध हथियार व गुंडा एक्ट, 2015 में ड्रग्स सप्लाई, अवैध हथियार, सहारनपुर में डकैती, 2016 में कैराना के परचून व्यापारी सचिन से 5 लाख की रंगदारी मांगने और हरियाणा के करनाल में ट्रिपल मर्डर, 2017 में कैराना में तीन चोरियां, कैराना क्षेत्र में एक डकैती, शामली कोतवाली में जानलेवा हमले के मुकदमे दर्ज हैं।

नौशाद के पिता ने मुठभेड़ को बताया फर्जी

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मुठभेड़ में ढेर बदमाशों को देखने पहुंचे ग्रामीण

नौशाद के पिता जमील तथा सरवर की मां हमीदा ने केंद्रीय गृह मंत्री, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, मुख्यमंत्री, डीजीपी, आईजी, डीआईजी और एसपी को पत्र भेजकर मुठभेड़ को फर्जी बताया है। पत्र में अवगत कराया गया है कि शुक्रवार रात करीब आठ बजे भूरा गांव की एक महिला और उसका भाई नौशाद और सरवर को घर से बुलाकर अपने साथ ले गए थे। जमील ने कहा कि देर रात तक जब नौशाद घर नहीं लौटा, तो वह महिला के घर पहुंचा, तब वहां कोई नहीं मिला। वहीं, सरवर की मां हमीदा ने बताया कि रात में सरवर घर नहीं लौटा। शनिवार सुबह करीब पांच बजे उसका छोटा बेटा अनवर और वासिल अपने भाई को तलाशते हुए महिला के मकान के पास पहुंचे, तब तक पुलिस ने नौशाद और सरवर को गोली मार दी थी। मौके पर खून के निशान तो मिले, लेकिन दोनों के शवों को हटा दिया गया था। पत्र में जमील और हमीदा ने पुलिस मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए आरोपी महिला और उसके भाई तथा मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। 

सरवर का आपराधिक इतिहास
2011 में मुजफ्फरनगर के छपार क्षेत्र में बस में लूट, 2012 में छपार में जानलेवा हमला, अवैध हथियार, छपार में गैंगेस्टर, 2017 में कैराना में दो चोरी व एक लूट का मुकदमा दर्ज है। सरवर पर पांच हजार का इनाम घोषित किया गया था।

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