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पुलिस के साथ परिवार की जिम्मेदारी में भी बेटियां आगे
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Wed, 07 Sep 2016 01:58 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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आज की बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। बिजनेस हो या सर्विस हर सेक्टर में वह बुलंदियां छू रही हैं। यही नहीं पुलिस की चुनौती भरी नौकरी कर रही कई महिला पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी के साथ अपनी फैमिली की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रही हैं। दिन भर ड्यूटी के बाद शाम को घर पर बच्चों की कोचिंग, शॉपिंग सब कुछ बेहतर तालमेल से कर रही हैं। शहर में तैनात ऐसी कई महिला पुलिसकर्मियों पर एक रिपोर्ट :
पूरे घर की जिम्मेदारी कंधों पर
परिवार परामर्श केंद्र प्रभारी रेणू सक्सेना के पति गाजियाबाद में इंजीनियर हैं। दो साल का बेटा है। जिसे रेणू मेरठ में अपने साथ रखती हैं। सुबह छह बजे नाश्ता तैयार करती हैं। पति सुबह 7:30 बजे ड्यूटी के लिए गाजियाबाद चले जाते हैं। इसके बाद बच्चे पर टाइम देने के बाद खुद 8:30 बजे ड्यूटी पर निकल जाती हैं। पीछे से बच्चे की देखभाल को एक केयर टेकर रखा है। रात को ड्यूटी से आने के बाद डिनर खुद बनाती हैं और फैमिली के साथ समय बिताती हैं।
‘मां के साथ पिता का भी फर्ज निभाया’
महिला थाने की सब इंस्पेक्टर पिंकी गोस्वामी 2012 में पुलिस सर्विस में आई। पति की पांच साल पहले सड़क हादसे में मृत्यु के बाद कंधे पर बड़ी जिम्मेदारी आ गई। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने तीन बच्चों को पिता की कमी महसूस नहीं होने दी। अपनी ड्यूटी के साथ अपनी दो बेटियों और एक बेटे को न केवल पढ़ाया बल्कि अच्छी परवरिश दी। आज बेटियां कक्षा 10 और 9 में हैं जबकि बेटा कक्षा सात में हैं। तीनों ही अपने स्कूल में होनहार हैं। रात को एक घंटा डेली तीनों बच्चों को पढ़ाती हैं।
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सास से भी बेहतर तालमेल
महिला थाने में तैनात कांस्टेबल मंजू रानी के पति अनिल कुमार भी पुलिस लाइन में कांस्टेबल हैं। दो साल की बेटी कनिष्का है। उसकी देखभाल को सास को बुलंदशहर से मेरठ बुलाया है। जो उनके ड्यूटी पर जाने के बाद बेटी का ध्यान रखती हैं। लेकिन शाम को ड्यूटी से आकर वह फैमिली का ध्यान रखती हैं। अपनी सास से उनकी खूब पटती है। दोनों के बीच अच्छे तालमेल और व्यवहार से मंजू अपनी ड्यूटी के साथ फैमिली का भी बखूबी ध्यान रखती है।
‘समय पर ड्यूटी की पाबंद रजनी’
महिला थाने की कांस्टेबल रजनी के पति भी पुलिस लाइन में ही तैनात हैं। 15 माह का बेटा कुशाग्र है। ड्यूटी पर जाने से पहले पूरा वक्त बेटे को देती हैं। ब्रेकफास्ट और लंच बनाकर जाती हैं। रात को आकर डिनर भी खुद तैयार करती हैं। समय मिलने पर फैमिली के साथ शॉपिंग करने जाती हैं। पीछे से सास कुशाग्र का ध्यान रखती हैं। रजनी की एक खासियत यह भी है कि वह ड्यूटी हमेशा वक्त पर पहुंचती हैं। रजनी की सास भी व्यवहार से खुश हैं।
पति के बाद उठाई परिवार की जिम्मेदारी
थाना कोतवाली में तैनात कांस्टेबल रविता गुप्ता 1982 में पुलिस सर्विस में आई। पति आर्मी में थे। 2002 में उनकी मौत के बाद दो बेटे दीपक और अमित की पूरी जिम्मेदारी रविता के कंधों पर आ गई थी। अपनी ड्यूटी के साथ बच्चों पर भी पूरा ध्यान दिया। उन्हें पढ़ाया लिखाया। अमित ने एलएलबी की और दीपक ने बीकॉम। दोनों आज कामयाब हैं। रविता को इसी साल प्रमोशन मिला और वह हेडकांस्टेबल बनी हैं।
मन में कुछ बड़ा करने की चाहत
थाना कोतवाली में तैनात बुलंदशहर निवासी सुमन 2011 में पुलिस सर्विस में आई। परिवार में भाई और भाभी भी सरकारी नौकरी में थे, तो उन्होंने भी मेहनत की और पुलिस में भर्ती हो गईं। सुमन बोलीं कि कभी घर से बाहर नहीं निकले थे, इसलिए शुरू में कुछ अजीब लगा। लेकिन धीरे धीरे सब मैनेज हो गया। इसी साल जुलाई में शादी हुई। पति सहारनपुर में पुलिस महकमे में ही हैं। सुमन कहती हैं कि पुलिस की जॉब चुनौतीपूर्ण है। वह इसमें रहकर कुछ कर दिखाना चाहती हैं।
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पूरे घर की जिम्मेदारी कंधों पर
परिवार परामर्श केंद्र प्रभारी रेणू सक्सेना के पति गाजियाबाद में इंजीनियर हैं। दो साल का बेटा है। जिसे रेणू मेरठ में अपने साथ रखती हैं। सुबह छह बजे नाश्ता तैयार करती हैं। पति सुबह 7:30 बजे ड्यूटी के लिए गाजियाबाद चले जाते हैं। इसके बाद बच्चे पर टाइम देने के बाद खुद 8:30 बजे ड्यूटी पर निकल जाती हैं। पीछे से बच्चे की देखभाल को एक केयर टेकर रखा है। रात को ड्यूटी से आने के बाद डिनर खुद बनाती हैं और फैमिली के साथ समय बिताती हैं।
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‘मां के साथ पिता का भी फर्ज निभाया’
महिला थाने की सब इंस्पेक्टर पिंकी गोस्वामी 2012 में पुलिस सर्विस में आई। पति की पांच साल पहले सड़क हादसे में मृत्यु के बाद कंधे पर बड़ी जिम्मेदारी आ गई। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने तीन बच्चों को पिता की कमी महसूस नहीं होने दी। अपनी ड्यूटी के साथ अपनी दो बेटियों और एक बेटे को न केवल पढ़ाया बल्कि अच्छी परवरिश दी। आज बेटियां कक्षा 10 और 9 में हैं जबकि बेटा कक्षा सात में हैं। तीनों ही अपने स्कूल में होनहार हैं। रात को एक घंटा डेली तीनों बच्चों को पढ़ाती हैं।
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सास से भी बेहतर तालमेल
महिला थाने में तैनात कांस्टेबल मंजू रानी के पति अनिल कुमार भी पुलिस लाइन में कांस्टेबल हैं। दो साल की बेटी कनिष्का है। उसकी देखभाल को सास को बुलंदशहर से मेरठ बुलाया है। जो उनके ड्यूटी पर जाने के बाद बेटी का ध्यान रखती हैं। लेकिन शाम को ड्यूटी से आकर वह फैमिली का ध्यान रखती हैं। अपनी सास से उनकी खूब पटती है। दोनों के बीच अच्छे तालमेल और व्यवहार से मंजू अपनी ड्यूटी के साथ फैमिली का भी बखूबी ध्यान रखती है।
‘समय पर ड्यूटी की पाबंद रजनी’
महिला थाने की कांस्टेबल रजनी के पति भी पुलिस लाइन में ही तैनात हैं। 15 माह का बेटा कुशाग्र है। ड्यूटी पर जाने से पहले पूरा वक्त बेटे को देती हैं। ब्रेकफास्ट और लंच बनाकर जाती हैं। रात को आकर डिनर भी खुद तैयार करती हैं। समय मिलने पर फैमिली के साथ शॉपिंग करने जाती हैं। पीछे से सास कुशाग्र का ध्यान रखती हैं। रजनी की एक खासियत यह भी है कि वह ड्यूटी हमेशा वक्त पर पहुंचती हैं। रजनी की सास भी व्यवहार से खुश हैं।
पति के बाद उठाई परिवार की जिम्मेदारी
थाना कोतवाली में तैनात कांस्टेबल रविता गुप्ता 1982 में पुलिस सर्विस में आई। पति आर्मी में थे। 2002 में उनकी मौत के बाद दो बेटे दीपक और अमित की पूरी जिम्मेदारी रविता के कंधों पर आ गई थी। अपनी ड्यूटी के साथ बच्चों पर भी पूरा ध्यान दिया। उन्हें पढ़ाया लिखाया। अमित ने एलएलबी की और दीपक ने बीकॉम। दोनों आज कामयाब हैं। रविता को इसी साल प्रमोशन मिला और वह हेडकांस्टेबल बनी हैं।
मन में कुछ बड़ा करने की चाहत
थाना कोतवाली में तैनात बुलंदशहर निवासी सुमन 2011 में पुलिस सर्विस में आई। परिवार में भाई और भाभी भी सरकारी नौकरी में थे, तो उन्होंने भी मेहनत की और पुलिस में भर्ती हो गईं। सुमन बोलीं कि कभी घर से बाहर नहीं निकले थे, इसलिए शुरू में कुछ अजीब लगा। लेकिन धीरे धीरे सब मैनेज हो गया। इसी साल जुलाई में शादी हुई। पति सहारनपुर में पुलिस महकमे में ही हैं। सुमन कहती हैं कि पुलिस की जॉब चुनौतीपूर्ण है। वह इसमें रहकर कुछ कर दिखाना चाहती हैं।