{"_id":"5bfc4f1cbdec22418b5fdcfc","slug":"phle-din-37022-bachho-ko-lge-teeke","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"मीजल्स रूबेला अभियान के तहत पहले दिन 37 हजार 22 बच्चों को लगे टीके","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मीजल्स रूबेला अभियान के तहत पहले दिन 37 हजार 22 बच्चों को लगे टीके
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Updated Tue, 27 Nov 2018 01:23 AM IST
विज्ञापन
meerut
- फोटो : meerut
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वास्थ्य विभाग का मीजल्स रूबेला अभियान की सोमवार को शुरुआत कर दी गई। पहले दिन कुल 334 स्कूलों में 398 सत्र आयोजित कर 37 हजार 22 बच्चों एमआर वैक्सीन दी गई। इससे पहले दो स्कूलों वर्धमान एकेडमी जैन नगर और सेंट थॉमस इंटर कॉलेज से शुरू किया गया। इसकी शुरुआत विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल ने की। पहले दिन विधायक ने शिक्षकों से इस अभियान में ज्यादा से ज्यादा सहयोग करने की अपील की।
विज्ञापन
एमओ डॉ. राजकुमार ने बताया कि यह अभियान दो सप्ताह तक चलेगा। इसमें नौ माह से 15 साल तक के 13 लाख 16 हजार 852 बच्चों और किशोरों का टीकाकरण किया जाएगा। इसके लिए सभी सरकारी और निजी 4599 स्कूलों में 5963 सत्र चलाए जाएंगे।
विज्ञापन
सेंट थॉमस और वर्धमान एकेडमी के अलावा आदर्श इंटर कॉलेज, इस्माईल इंटर कॉलेज, आरडी पब्लिक स्कूल, आरपीएम पब्लिक स्कूल, खालसा गर्ल्स इंटर कॉलेज आदि में भी यह अभियान चलाया गया। इस दौरान डॉ. विश्वास चौधरी, डॉ. रजत गर्ग, प्रवीण कौशिक, नजमुनिशा, सचिन, चक्रवीर, नितिन मौजूद रहे।
विज्ञापन
ये है रूबेला
रूबेला एक संक्रमण से होने वाली बीमारी है। इसमें हल्का वायरल संक्रमण होता है। हालांकि रूबेला को कभी कभी जर्मन खसरा भी कहते हैं। हालांकि रूबेला वायरस खसरा वायरस से कोई संबंध नहीं है। रूबेला का कोई प्रत्यक्ष इलाज नहीं है। रूबेला की जटिलताएं बच्चों की तुलना में वयस्कों में अधिक होती हैं।
ऐसे फैलती है यह बीमारी
वायरस वायुजनित श्वसन के छींटों द्वारा फैलता है। संक्रमित व्यक्ति रूबेला के चकत्तों के निकलने के एक हफ्ते पहले भी और इसके पहली बार चकत्ते निकलने के एक हफ्ते बाद तक संक्रामक हो सकते हैं।
पूरी तरह सुरक्षित है रूबेला का टीका
लालीपन, बुखार और शरीर में चकत्ता का होना जैसे लक्षण टीकाकरण के बाद देखने में आ सकता है। लेकिन इन लक्षणों से घबराएं नहीं, रूबेला का टीका पूरी तरह से सुरक्षित है। टीकाकरण अभियान की तैयारी चल रही है। - डॉ. राजकुमार, सीएमओ
रूबेला एक संक्रमण से होने वाली बीमारी है। इसमें हल्का वायरल संक्रमण होता है। हालांकि रूबेला को कभी कभी जर्मन खसरा भी कहते हैं। हालांकि रूबेला वायरस खसरा वायरस से कोई संबंध नहीं है। रूबेला का कोई प्रत्यक्ष इलाज नहीं है। रूबेला की जटिलताएं बच्चों की तुलना में वयस्कों में अधिक होती हैं।
ऐसे फैलती है यह बीमारी
वायरस वायुजनित श्वसन के छींटों द्वारा फैलता है। संक्रमित व्यक्ति रूबेला के चकत्तों के निकलने के एक हफ्ते पहले भी और इसके पहली बार चकत्ते निकलने के एक हफ्ते बाद तक संक्रामक हो सकते हैं।
पूरी तरह सुरक्षित है रूबेला का टीका
लालीपन, बुखार और शरीर में चकत्ता का होना जैसे लक्षण टीकाकरण के बाद देखने में आ सकता है। लेकिन इन लक्षणों से घबराएं नहीं, रूबेला का टीका पूरी तरह से सुरक्षित है। टीकाकरण अभियान की तैयारी चल रही है। - डॉ. राजकुमार, सीएमओ