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मेरठ में पंचायत अध्यक्ष पद के लिए चार दावेदार सामने
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Tue, 03 Nov 2015 01:25 AM IST
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चुनाव परिणाम आने के बाद अध्यक्ष पद के दावेदारों की तस्वीर भी साफ हो गयी है। निर्वाचित होकर आये 34 सदस्यों में अब अध्यक्ष पद के लिए चार दावेदारों पर सबकी नजर टिकी है। अहम बात ये है कि इनमें दो सपा से और दो भाजपा से हैं। लेकिन एक बात साफ है कि भाजपा को जहां अध्यक्ष पद के लिए कम मेहनत करनी होगी, वहीं सपा को काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है। हालांकि सत्ता पक्ष से होना उसके पक्ष में जा रहा है।
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अध्यक्ष पद की दावेदारी से सपा के अजय अग्रवाल हार के बाद बाहर हो चुके हैं। अब कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर के पुत्र नवाजिश मंजूर और समाजवादी छात्र सभा के प्रदेश अध्यक्ष अतुल प्रधान की पत्नी सीमा प्रधान सपा की तरफ से दावेदार हैं। इनमें जिसे भी हाईकमान से हरी झंडी मिलेगी, वही अध्यक्ष पद का दावेदार होगा।
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लेकिन नवाजिश मंजूर के पक्ष में एक बात सबसे कमजोर जा रही है। सपा के जहां मात्र पांच ही प्रत्याशी जीतकर आये हैं, वहीं मुस्लिमों की संख्या भी बहुत कम हैं। सपा से अलग अगर मुस्लिम सदस्यों की बात करें तो एक ही मुस्लिम सदस्य निर्वाचित होकर आया है। जबकि अतुल प्रधान के पक्ष में सबसे मजबूत पक्ष गुर्जर वोट बैंक का जा रहा है।
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क्योंकि जिला पंचायत के नवनिर्वाचित बोर्ड में गुर्जर बिरादरी के करीब छह सदस्य जीतकर आए हैं। ऐसे में वह जीत के आंकड़े को ज्यादा मजबूत बनाते हैं। लेकिन सपा के दावेदारों को अध्यक्ष पद की जीत के लिए सपा सदस्यों से अलग कम से कम 13 सदस्य जुटाने होंगे।
जबकि भाजपा यहां मजबूत स्थिति में नजर आती है। भाजपा से दावेदारों में डॉ. मीनाक्षी भराला और कुलविंदर का नाम है। डॉ. मीनाक्षी भराला का मजबूत पक्ष का उनका लगातार दूसरी बार निर्वाचित होने के साथ ही पार्टी की पुरानी कार्यकर्ता होना और तेजतर्रार नेता की छवि के रूप में स्थापित होना है। जबकि कुलविंदर के पक्ष में धन और बाहुबल की स्थिति आती है। लेकिन एक बात जरूर है कि भाजपा के दस प्रत्याशी जीतकर आए हैं।
ऐसे में उसे जरूरी बहुमत के लिए सिर्फ आठ सदस्याें को जुटाना है। जिसमें निर्दलियों के साथ ही कुछ बसपा समर्थित सदस्य भी समर्थन दे सकते हैं। हालांकि आठ सदस्यों के साथ बसपा भी मजबूत स्थिति में है, लेकिन फिलहाल उसके पास अध्यक्ष पद का चेहरा नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में बसपा यहां चुप रह सकती है। जबकि निर्दलीय में भी दावेदार इस स्थिति में नजर नहीं आ रहा है।