संकट गहराया : कोरोना मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा, ऑक्सीजन की खपत बढ़ी, मेरठ में यह है स्थिति
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यहां साढे पांच टन का लिक्विड ऑक्सीजन टैंक है, जिसमें 48 घंटे का बैकअप रहता है। एक सप्ताह पहले तक यहां रोजाना डेढ़ से 2 टन ऑक्सीजन का इस्तेमाल हो रहा था, लेकिन अब यह खपत 7 से 8 टन प्रतिदिन हो गई है। मेडिकल कॉलेज में 260 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं।
फिलहाल, पश्चिमी उतर प्रदेश में ऑक्सीजन की सप्लाई मुख्यत: गाजियाबाद, रुड़की, पानीपत, नोएडा, देहरादून, काशीपुर और गुरुग्राम से होती है। मेडिकल कॉलेज के एनस्थीसिया विभाग के प्रभारी डॉ. विपिन धामा ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में छह टन का लिक्विड ऑक्सीजन टैंक अगले सप्ताह शुरू हो सकता है। इसकी तैयारी पूरी हो गई है।
कोविड-19 अस्पताल में सिर्फ लिक्विड ऑक्सीजन का इस्तेमाल हो रहा है। जहां तक ऑक्सीजन सिलिंडर की बात है तो 7 क्यूबिक मीटर के 80 से 90 सिलिंडर कोविड-19 से पहले और इस दौरान भी इस्तेमाल होते थे, जबकि सितंबर माह में इमरजेंसी में 125 से 150 सिलिंडर तक भी हर रोज प्रयोग किए जा रहे थे।
अब यह संख्या भी 300 के करीब पहुंच गई है। दरअसल, अब नॉन कोविड मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इसके अलावा चिकित्सकों की कोशिश रहती है कि मरीजों में ऑक्सीजन की थोड़ी भी कमी न होने पाए। 40 से 50 सिलिंडर का बैकअप रखना पड़ता है।
एनटीपीसी और टाटा से भी लेंगे ऑक्सीजन
कमिश्नर सुरेंद्र सिंह ने बताया कि एनटीपीसी ने दादरी में स्थापित ऑक्सीजन यूनिट ने मेरठ मंडल को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने का वादा किया है। गाजियाबाद स्थित टाटा की यूनिट में पाइपलाइन से ऑक्सीजन आती है। यह यहां से भी उपलब्ध होगी।
ऑक्सीजन की कमी कहीं नहीं
अभी मेरठ के किसी अस्पताल में भी ऑक्सीजन की कमी नहीं है। सुभारती अस्पताल में लिक्विड ऑक्सीजन टैंक से सप्लाई होती है। उनके पास ऑक्सीजन बनाने के संयंत्र भी हैं। मुलायम सिंह यादव मेडिकल कॉलेज, आनंद, लोकप्रिय आदि सभी में भी पर्याप्त व्यवस्था है। - डॉ अखिलेश मोहन, सीएमओ