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अधूरी सूचना देना, न देने के बराबर : राजकेश्वर सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
Updated Wed, 19 Apr 2017 03:38 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मंडल की 300 लंबित अपीलों की सुनवाई करने पहुंचे राज्य सूचना आयुक्त राजकेश्वर सिंह ने पहले दिन 100 अपीलों की सुनवाई की। मंडलायुक्त कार्यालय में अपील सुनते हुए उन्होंने जन सूचना अधिकारियों से कहा कि यदि कोई अधूरी या भ्रामक सूचना देता है तो वह सूचना न देने की श्रेणी में माना जाएगी। उन्होंने कहा कि सूचना न देने पर 250 रुपये प्रतिदिन या 25000 रुपये तक का अर्थ दंड लग सकता है।
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राज्य सूचना आयोग में लंबित अपीलों के त्वरित व समयबद्ध निस्तारण के उद्देश्य से राज्य सूचना आयुक्त द्वारा अपने-अपने आवंटित मंडलों में स्वयं जाकर अपीलों के निस्तारण की पहल की गई है। जिस पर राज्य सूचना आयुक्त राजकेश्वर सिंह मेरठ मंडल की 300 लंबित अपीलों की सुनवाई करने मेरठ आए हुए हैं। मंगलवार को सुनवाई के पहले दिन उन्होंने आयुक्त कार्यालय में 100 अपीलों की सुनवाई की। उन्होंने बताया कि वह 20 अप्रैल तक मेरठ में रहकर सुनवाई करेंगे।
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राजकेश्वर सिंह ने कहा कि जन सूचना अधिकारी को 30 दिन में आवेदक को सूचना उपलब्ध करानी होती है। यदि सूचना कार्यालय अभिलेख में मौजूद नहीं हैं, तो उत्तर प्रदेश सूचना के अधिकार नियमावली 2015 की धारा 4 (2)(क) का उल्लेख कर स्पष्ट रूप से आवेदक को बताया जाना चाहिए कि उक्त सूचना कार्यालय अभिलेखों में मौजूद नहीं है। लेकिन अधूरी या भ्रामक सूचना देना गलत है, वह सूचना न देने की श्रेणी में आएगा।
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राज्य सूचना आयुक्त ने बताया कि सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 19 के अंतर्गत प्रथम अपील जन सूचना अधिकारी के उच्चाधिकारियों को 30 दिन में तथा द्वितीय अपील आयोग में 90 दिनों में दी जा सकती है। यदि सूचना व्यक्ति के जीवन व स्वतंत्रता से संबंधित है, तो ऐसी सूचनाएं 48 घंटे के अंदर उपलब्ध करानी होती है। इस दौरान जन सूचना अधिकारियों में जिला पूर्ति अधिकारी, एआरटीओ, जिला समाज कल्याण अधिकारी व शोभित विवि के प्रतिनिधि अनुपस्थित रहे। जिस पर राजकेश्वर सिंह ने नाराजगी जताई। इस दौरान अपर आयुक्त व नोडल अधिकारी आरएन धामा मौजूद रहे।