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निगम के जलकल विभाग में भ्रष्टाचार का रिबोर
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Sat, 23 Jul 2016 02:18 AM IST
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नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला
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नगर निगम के जलकल विभाग में भ्रष्टाचार का रिबोर हो रहा है। सबमर्सिबल से लेकर हैंडपंप लगाने, उनकी रिपेयरिंग और रिबोरिंग में अधिकारी और ठेकेदार साठगांठ की ऐसी पटकथा लिखते हैं कि दोनों की चांदी हो जाए। सालाना सवा करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करने के बावजूद 30 प्रतिशत से ज्यादा हैंडपंप खराब ही मिलते हैं। अब साल में एक ही हैंडपंप चार बार रिपेयर होगा तो 20 से 24 लाख का बिल तो बनेगा ही। वैसे भी जब निगम के अधिकारी और लिपिक ही अपने रिश्तेदारों के नाम पर फर्म खोले हुए हैं तो फिर दिक्कत किस बात की।
आंकड़ों में हैंडपंप, बजट
निगम रिकॉर्ड के मुताबिक 80 वार्डों में करीब 8500 हैंडपंप लगे हैं। शहर में प्रतिवर्ष 500-600 हैंडपंप लगते हैं। जिनमें 200 से 300 हैंडपंप अकेला जल निगम लगाता है। हैंडपंपों की मरम्मत के नाम पर सालाना सवा करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होता है।
मरम्मत के खेल में भ्रष्टाचार की छूट
मरम्मत के दौरान मौके पर यह देखने कोई नहीं जाता कि हैंडपंप किस कारण से खराब हुआ। बस ठेकेदार को मरम्मत का निर्देश मिलते ही खेल शुरू हो जाता है। कई हैंडपंप वॉल खराब होने, डोलची निकलने या चेन उतरने पर पानी नहीं देते। इस मरम्मत पर कितना खर्च आएगा। इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। लेकिन ठेकेदार तो वह खराबी बताते हैं जो सबसे ज्यादा खर्चीली हो। हैंडपंप में या तो पाइप डाला दर्शाते हैं या फिर मशीन आदि।
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नगरायुक्त ने नहीं किए बिल पास
निगम प्रशासन ने भले ही जलकल के ठेकेदारों को हैंडपंप रिपेयर का कार्य आदेश जारी नहीं किया हो। लेकिन ठेकेदारों ने 20-24 लाख रुपये के बिल तैयार कर लिए हैं। जिन्हें पास कराने के लिए जलकल अधिकारी और ठेकेदारों ने खूब जोर लगा रखे हैं। लेकिन नगरायुक्त ने अभी एक भी बिल पास नहीं किया है। दरअसल, ठेकेदार किसी एक हैंडपंप को ठीक करने के लिए 500 रुपये लेबर और सामान की कीमत दर्शाता है। अगर ठेकेदारों द्वारा पेश बिलों पर गौर करें तो एक हैंडपंप रिपेयर पर 600-3500 रुपये तक के बिल लगाए हैं। चार माह में दो हजार हैंडपंप रिपेयर की संख्या सही है तो 20-24 लाख रुपये तक के बिल बन चुके हैं।
कहां बह रहे सवा करोड़ रुपये
निगम रिकॉर्ड के अनुसार साल में एक हैंडपंप 3-4 बार रिपेयर होता है। जो सीधे-सीधे सरकारी धन की बंदरबांट की ओर इशारा करता है। यह गड़बड़झाला काफी वर्षों से चल रहा है। कई खुलासे होने पर भी निगम प्रशासन इसे रोकने के बजाय फाइलों पर पर्दा डाल देता है। वर्ष 2014 में 1.25 करोड़ रुपये हैंडपंप की मरम्मत और रिबोर पर खर्च होने के बावजूद सैकड़ों हैंडपंपों का हलक सूखा ही मिलता है।
कैसे लग रही रिपोर्ट
अगर ठेकेदारों के बिलों पर जेई और एई की रिपोर्ट पर गौर करें तो खराब हैंडपंप को अपने सामने खुलना स्वीकार किया जाता है। सवाल है कि अधिकारी अपने सामने हैंडपंप खुलवाते तो इतनी बड़ी संख्या में हैंडपंप खराब नहीं निकलते।
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आंकड़ों में हैंडपंप, बजट
निगम रिकॉर्ड के मुताबिक 80 वार्डों में करीब 8500 हैंडपंप लगे हैं। शहर में प्रतिवर्ष 500-600 हैंडपंप लगते हैं। जिनमें 200 से 300 हैंडपंप अकेला जल निगम लगाता है। हैंडपंपों की मरम्मत के नाम पर सालाना सवा करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होता है।
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मरम्मत के खेल में भ्रष्टाचार की छूट
मरम्मत के दौरान मौके पर यह देखने कोई नहीं जाता कि हैंडपंप किस कारण से खराब हुआ। बस ठेकेदार को मरम्मत का निर्देश मिलते ही खेल शुरू हो जाता है। कई हैंडपंप वॉल खराब होने, डोलची निकलने या चेन उतरने पर पानी नहीं देते। इस मरम्मत पर कितना खर्च आएगा। इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। लेकिन ठेकेदार तो वह खराबी बताते हैं जो सबसे ज्यादा खर्चीली हो। हैंडपंप में या तो पाइप डाला दर्शाते हैं या फिर मशीन आदि।
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नगरायुक्त ने नहीं किए बिल पास
निगम प्रशासन ने भले ही जलकल के ठेकेदारों को हैंडपंप रिपेयर का कार्य आदेश जारी नहीं किया हो। लेकिन ठेकेदारों ने 20-24 लाख रुपये के बिल तैयार कर लिए हैं। जिन्हें पास कराने के लिए जलकल अधिकारी और ठेकेदारों ने खूब जोर लगा रखे हैं। लेकिन नगरायुक्त ने अभी एक भी बिल पास नहीं किया है। दरअसल, ठेकेदार किसी एक हैंडपंप को ठीक करने के लिए 500 रुपये लेबर और सामान की कीमत दर्शाता है। अगर ठेकेदारों द्वारा पेश बिलों पर गौर करें तो एक हैंडपंप रिपेयर पर 600-3500 रुपये तक के बिल लगाए हैं। चार माह में दो हजार हैंडपंप रिपेयर की संख्या सही है तो 20-24 लाख रुपये तक के बिल बन चुके हैं।
कहां बह रहे सवा करोड़ रुपये
निगम रिकॉर्ड के अनुसार साल में एक हैंडपंप 3-4 बार रिपेयर होता है। जो सीधे-सीधे सरकारी धन की बंदरबांट की ओर इशारा करता है। यह गड़बड़झाला काफी वर्षों से चल रहा है। कई खुलासे होने पर भी निगम प्रशासन इसे रोकने के बजाय फाइलों पर पर्दा डाल देता है। वर्ष 2014 में 1.25 करोड़ रुपये हैंडपंप की मरम्मत और रिबोर पर खर्च होने के बावजूद सैकड़ों हैंडपंपों का हलक सूखा ही मिलता है।
कैसे लग रही रिपोर्ट
अगर ठेकेदारों के बिलों पर जेई और एई की रिपोर्ट पर गौर करें तो खराब हैंडपंप को अपने सामने खुलना स्वीकार किया जाता है। सवाल है कि अधिकारी अपने सामने हैंडपंप खुलवाते तो इतनी बड़ी संख्या में हैंडपंप खराब नहीं निकलते।