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नौकरी से निकाले जाएंगे नकारा सफाईकर्मी

Wed, 05 Jun 2019 04:13 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Gaurav sharma Updated Wed, 05 Jun 2019 04:13 AM IST
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Neutral cleaners will be removed from the job
नगर निगम - फोटो : अमर उजाला
सीएम की सख्ती के बाद नगर निगम प्रशासन शहर की सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने में जुट गया है। नगरायुक्त ने सोमवार को सिविल लाइन क्षेत्र का निरीक्षण किया तो 27 सफाई कर्मचारी नदारद मिले। नगरायुक्त ने सभी कर्मचारियों को बर्खास्त कर नए सफाई कर्मचारी तैनात करने के निर्देश कंपनी को दिए हैं। इतना ही नहीं सफाई निरीक्षक को प्रतिकूल प्रविष्टि और सूरज कुंड डिपो प्रभारी को चेतावनी भी दी। अगर 12 घंटे के अंदर वार्ड की सफाई नहीं की गई तो कार्रवाई की जाएगी।
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 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लखनऊ में सभी नगरायुक्तों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाया था। जिसका असर मंगलवार को शहर में दिखा। नगरायुक्त मनोज चौहान सुबह साढ़े आठ बजे सिविल लाइन क्षेत्र का निरीक्षण करने निकल पड़े। उन्हें कचहरी परिसर में कोई सफाई कर्मचारी नहीं मिला। सुबह दस बजे तक 27 आउट सोर्स सफाईकर्मी काम से नदारद मिले। जगह-जगह गंदगी के ढेर मिलने पर नगरायुक्त ने कार्रवाई की। सफाई निरीक्षक रवि कुमार को प्रतिकूल प्रविष्टि और एक का वेतन काटने का आदेश दिया। रोड पटरी पर गंदगी मिलने पर सूरजकुंड वाहन डिपो प्रभारी को चेतावनी दी।
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दो माह पहले देनी होगी छुट्टी की अर्जी
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सफाई कर्मियों की लगातार चार दिन तक बायोमेट्रिक हजारी नहीं होगी, उन पर कड़ी कार्रवाई होगी। इतना ही नहीं छुट्टी पर जाने के लिए दो माह पहले नगरायुक्त कार्यालय में अर्जी देनी होगी। शासन और प्रशासन की सख्ती से माना जा रहा है कि अब ऐसे सभी सफाई कर्मचारियों को नौकरी गंवानी पड़ सकती है, जो काम की जगह नेतागिरी करते हैं। उन सफाई कर्मियों पर भी कार्रवाई हो सकती है शहर या दूसरे शहरों में प्राइवेट नौकरी कर रहे हैं। जबकि निगम रिकार्ड में भी नौकरी करते दर्शाए गए हैं।
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स्थाई और आउट सोर्सिंग के सफाई कर्मचारियों को अपने क्षेत्र में सफाई, प्रतिदिन बायोमेट्रिक हाजिरी और आठ घंटे काम करना ही होगा। जो कर्मचारी काम नहीं करेगा, उसे नौकरी से निकाला जाएगा। नौकरी पर रखने और उनको निकालने की पूरी जिम्मेदारी आउट सोर्स कंपनियों की है। हम ऐसे सफाई कर्मचारियों की सूची कंपनियों को भेजेंगे। 27 आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों की सूची कंपनी को भेज दी गई है। काम करने वाले सफाई कर्मचारियों को हम सम्मानित भी करेंगे। -मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त।

चूने की खरीद में नगर निगम को लग रहा चूना!
मेरठ।
नगर निगम में एक बार फिर चूना घोटाले की सुगबुगाहट है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी की जुबानी से साफ हो गया है कि चूना घोटाला हो रहा है। यह मामला मंगलवार को नगर निगम में महापौर सुनीता वर्मा के सामने उठा। जिसमें नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने महापौर के सामने स्पष्ट किया कि विभागाध्यक्ष होने के बाद भी उन्हें नहीं पता कि कौन चूना खरीद कर रहा है। उनके इस बयान ने सभी को चौंका दिया। महापौर ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेजने की बात कही है।
 ईद के त्योहार पर ही नहीं बल्कि शहर में प्रतिदिन चूना लगाया जाता है। नगर स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष के रूप में नगर स्वास्थ्य अधिकारी की तैनाती है। विभाग में चूना, रिक्शा, सफाई के अन्य सामान आदि की खरीद विभागाध्यक्ष की संस्तुति पर होती है। ईद के मौके पर अधिक चूने की खरीद की जा रही है। इसके बाद भी पार्षदों ने पर्याप्त चूना न मिलने के आरोप लगाए हैं। मंगलवार को पार्षद गफ्फार अहमद अन्य पार्षदों के साथ नगर निगम में महापौर सुनीता वर्मा से मिलने पहुंचे। उनकी शिकायत पर महापौर ने अपर नगरायुक्त अमित सिंह और नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. गजेन्द्र कुमार को बुलवाया।
शासन से की जाएगी शिकायत
इस दौरान नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि चूना कितना खरीदा जा रहा है। कौन खरीद रहा है और कहां से खरीदा जा रहा है। उसकी न तो उनसे संस्तुति ली गई है और न ही जानकारी दी जा रही है। चूना खरीद में क्या घोटाला है, वह खरीद करने वालों को ही पता है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी की इतनी बात सुनकर महापौर ने कहा कि इसकी शिकायत शासन से की जाएगी।

सीवर जेटिंग मशीनों के पाइप, बर्नल खराब  
मेरठ।
पौने दो करोड़ रुपये में खरीदी गईं छह सीवर जेटिंग मशीनों के पाइप और बर्नल चलने से पहले ही खराब हो गए। इसका खुलासा मंगलवार को मशीन के ट्रायल के समय हो गया। अपर नगरायुक्त ने सभी मशीनों का ट्रायल लेने के बाद ही भुगतान करने की चेतावनी दी है।  
नगर निगम ने मार्च 2018 में छह सीवर जेटिंग मशीनें खरीदी थीं। गाड़ी के चेचिस खरीदने के बाद जलकल विभाग के अधिकारियों ने चेचिस पर टैंकर लगाने के लिए सहारनपुर भेज दिया था। गाड़ी इंजन की फ्री सर्विस सहारनपुर में ही खत्म हो गई। आरोप तो यह भी रहे कि जलकल विभाग ने पुराने मॉडल की गाड़ी के चेसिस खरीदे, जिनको छुपाने के लिए सहारनपुर भेज दिया। छह गाड़ियों के ऊपर सीवर टैंक बनाने में एक साल से अधिक समय लगाया गया। अब मशीनों को सीवर सफाई के लिए धरातल पर उतारा गया तो पोल खुलनी शुरू हो गयी। मशीनों ने काम करना ही बंद कर दिया। मंगलवार के अंक में अमर उजाला ने खुलासा किया तो जलकल विभाग ने सहारनपुर से कंपनी के लोगों को बुलाया। साथ ही सीवर जेटिंग मशीन का ट्रायल अपने सामने कराया। मशीन ने काम नहीं किया। जिसके कारण मशीन के पाइप और बर्नल बदलने पड़े।

सभी मशीनों का ट्रायल होगा
हमने सहारनपुर की कंपनी के मैकेनिकों को बुलवाकर सीवर जेटिंग मशीनों का ट्रायल शुरू कराया है। एक मशीन का ट्रायल हो पाया है। उसके पाइप और बर्नल में खराबी थी। जो ठीक कर दी गयी है। अन्य मशीनों का भी ट्रायल किया जाएगा। -सुनील कुमार, सहायक अभियंता

 
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