निकाय चुनाव 2023: मेरठ मे BJP के लिए जीत आसान नहीं, BSP का मजबूत प्रत्याशी बिगाड़ सकता है विपक्षियों का खेल
महापौर सीट इस बार ओबीसी के लिए आरक्षित होने के बाद भाजपा में टिकट के दावेदारों की संख्या बढ़ने लगी है। वहीं भाजपा के लिए जीत की राह इतनी आसान नहीं होगी। बसपा भी मजबूत प्रत्याशी को मैदान में उतारकर विपक्षी दलों को पटखनी देने की रणनीति बना रही है।
विस्तार
महापौर के चुनाव में भाजपा के लिए जीत की राह इतनी आसान नहीं है। पार्टी को फूंक-फूंककर कदम रखना होगा। प्रत्याशी पर भी जीत और हार का गणित काफी हद तक तय करेगा। वर्ष 2017 में महापौर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। भाजपा ने कांता कर्दम को प्रत्याशी बनाया था लेकिन उन्हें बसपा की प्रत्याशी सुनीता वर्मा ने 15 हजार से अधिक वोटों से हरा दिया था। इस बार भी स्थिति में ज्यादा बदलाव नहीं है। जिस तरह से सपा-रालोद गठबंधन से यहां प्रत्याशी उतारे जाने की अटकलें हैं, उसको देखते हुए भाजपा को मजबूत प्रत्याशी उतारना होगा। पार्टी के नेताओं का भी कहना है कि प्रत्याशी दमदार होगा, तभी जीत की राह आसान हो सकती है।
टिकट के दावेदारों की बढ़ने लगी संख्या
महापौर सीट इस बार ओबीसी के लिए आरक्षित होने के बाद भाजपा में टिकट के दावेदारों की संख्या बढ़ने लगी है। शुक्रवार को समय सिंह सैनी, डॉ. जेवी चिकारा, उमाशंकर पाल और विनोद चौधरी ने टिकट के लिए महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल को आवेदन दे दिया है। महापौर के दावेदारों में डीएन कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अंकित चौधरी मजबूत दावेदारी जता रहे हैं। इनके अलावा राहुल चौधरी, पूर्व पार्षद रविंद्र तेवतिया और सचिन सिरोही ने भी दावेदारी जताई है।
सैनी समाज को मिले प्रतिनिधित्व
पूर्व एमएलसी हरपाल सैनी का कहना है कि सैनी समाज हमेशा से भाजपा के साथ रहा है। ऐसे में इस बार महापौर पद पर सैनी समाज को प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने अपने छोटे भाई समय सिंह सैनी के लिए दावेदारी जताई है। उनका कहना है कि दूसरे समाज के लोगों को पार्टी ने कई जगह प्रतिनिधित्व दिया हुआ है, ऐसे में इस बार सैनी समाज को मौका दिया जाए।
कोर कमेटी तय करेगी तीन नाम
भाजपा की कोर कमेटी तीन नाम तय करके लखनऊ भेजेगी, इसके बाद टिकट फाइनल होगा। कोर कमेटी में दो सांसद, तीन विधायक, तीन एमएलसी, महानगर अध्यक्ष, चार महामंत्री और तीन महानगर के क्षेत्रीय पदाधिकारी शामिल रहेंगे।
बसपा का मजबूत प्रत्याशी बिगाड़ सकता है विपक्षियों का खेल
महापौर की कुर्सी पर बसपा, भाजपा, कांग्रेस, सपा-रालोद गठबंधन और आप आदि सभी की दावेदारी है। बसपा इस बार भी महापौर सीट के लिए मजबूत प्रत्याशी उतारकर विपक्षी दलों को पटकनी की मजबूत रणनीति बना रही है। बसपा हाईकमान ने मंडल कोआर्डिनेटर और जिला अध्यक्ष को लखनऊ में बुलाया हुआ है। शुक्रवार को दिनभर गाजियाबाद में भी बसपाइयों का जमावड़ा रहा।
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नगर महापालिका बनने के बाद 1989 में अरुण जैन पार्षदों के मतों से पहले नगर प्रमुख चुने गए थे। नगर महापालिका के नगर प्रमुख पद की शुरूआत जरूर सामान्य वर्ग से हुई थी लेकिन इसके बाद शहर की जनता ने चार बार ओबीसी और एक बार एससी वर्ग का महापौर चुना। नगर निगम बनने पर 1995 में महापौर की सीट अनारक्षित रही, जिसमें शहर की जनता ने ओबीसी वर्ग से बसपा के अयूब अंसारी को महापौर चुना। वर्ष 2000 में भी महापौर की सीट अनारक्षित रही। यहां बसपा के प्रत्याशी हाजी शाहिद अखलाक जीते।
वर्ष 2006 में महापौर की सीट पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित की गई, जिसपर पहली बार भाजपा की मधु गुर्जर महापौर चुनी गईं। वर्ष 2012 में एक बार फिर महापौर सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हुई। भाजपा ने हरिकांत अहलुवालिया को चुनाव में उतारा और वह भारी मतों से जीतकर महापौर निर्वाचित हुए। चक्रानुक्रम में 2017 में निगम महापौर सीट एससी महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुई। बसपा से सुनीता वर्मा और भाजपा से कांता कर्दम चुनाव मैदान में चुनाव लड़ीं। मुस्लिम, दलित समीकरण ने भाजपा को हरा दिया और सुनीता वर्मा को महापौर बना दिया। 2017 से 2022 तक बसपा के चुनाव चिह्न पर जीती सुनीता वर्मा का कार्यकाल रहा है। हालांकि बाद में वह अपने पति योगेश वर्मा के साथ सपा की साइकिल पर सवार हो गई थीं।
34 साल में निगम में ओबीसी वर्ग से ही सर्वाधिक महापौर निर्वाचित हुए हैं। इस बार फिर महापौर सीट को पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। जहां बसपा फिर निगम में इतिहास दोहराने की तैयारी में जुटी है। भाजपा इस बार किसी भी कीमत पर महापौर की कुर्सी गंवाना नहीं चाहती है।
सपा की दावेदारी भी अन्य दलों से कमजोर नहीं है। कारण है कि सपा-रालोद का गठबंधन भी नए समीकरण तैयार कर रहा है। सपा-रालोद गठबंधन का अस्तित्व जाट, मुस्लिम के साथ दोनों पार्टियों के समर्थक मतदाताओं का समीकरण तय करेगा। शहर में सपा के विधायक रफीक अंसारी की मौजूदगी भी सपा गठबंधन के लिए अच्छे समीकरण की तरफ इशारा कर रही है।
रालोद पदाधिकारी आज से लेंगे आवेदन
मेरठ। नगर निकाय चुनाव को लेकर राष्ट्रीय लोकदल की ओर से तैयारी शुरू कर दी गई है। आज से पार्टी के महानगर कार्यालय पर संभावित उम्मीदवार अपने आवेदन कर सकते हैं। पार्टी की ओर से समिति का गठन कर दिया गया है। रालोद के जिलाध्यक्ष मतलूब गौड़ यह जानकारी दी।