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दूध नहीं ‘जहर’ पी रहे शहरवासी 

अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ Updated Fri, 29 Apr 2016 02:32 AM IST
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 दूध।
दूध। - फोटो : फाइल
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शहरवासी दूध नहीं, ‘जहर’ पी रहे हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आंकड़े दूध की मिलावट की सच्चाई बता रहे हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में दूध के 90 सैंपल लिए गए हैं। 40 में से 26 सैंपल फेल हो गए हैं, जबकि 50 की रिपोर्ट आना अभी बाकी है।
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वित्तीय वर्ष 2015-16 के आंकड़ों पर गौर करेंगे तो आपके होश उड़ जाएंगे। फैट बढ़ाने के लिए दूध में यूरिया, डिटर्जेंट और रासायनिक पदार्थ तक मिलाए जा रहे हैं। रिपोर्ट आने पर विभाग ने कोर्ट में केस डाल दिया है। उधर खोया के 33 सैंपल भरे गए, जिनमें से 19 फेल हो गए। पांच की रिपोर्ट आनी अभी बाकी है। मैदा व अन्य पदार्थ की मिलावट मिली है।

इसी तरह से मिठाई के 44 सैंपल भरे गए, 13 फेल हो गए। कई की अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। कलरयुक्त मिठाई के सैंपल सबसे ज्यादा फेल हुए हैं। मिठाई को चमकदार बनाने के लिए सिंथेटिक कलर मिलाए जा रहे हैं, जो पूर्णरूप से प्रतिबंधित हैं।

फास्ट फूड भी खतरनाक 
फास्ट व जंक फूड को स्वादिष्ट बनाने के लिए अधिकांश कारोबारी सिंथेटिक कलर व अन्य केमिकल का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे फूड के साथ में दी जाने वाले रेसिपी में सबसे ज्यादा मिलावट है। जैम, जेली व तमाम तरह की सॉस खतरनाक हैं। रिपोर्ट बताती है कि बीते साल एफडीए ने 24 सैंपल फास्ट फूड और उसके साथ बेचे जाने वाले खाद्य पदार्थों के भरे। इनमें से 17 फेल हो गए।

ये हो सकती हैं बीमारियां 
पेट में जलन और गैस की शिकायत रहना।  
लंबे समय तक खाने पर भूख न लगना व बेचैनी होना। 
पेट में इंफैक्शन के साथ ही उल्टी, दस्त और बुखार आना।  
किडनी से लेकर लीवर व आंतों को नुकसान पहुंचाना।  
लंबे समय तक सेवन करने पर नींद न आना, कमजोरी होना।  
स्कीन से लेकर आंखों में जलन का लगातार बने रहना।  

विभाग की आय बढ़ी 
बीते वित्तीय वर्ष में एफडीए ने 317 छापे मारे, जिनसे 397 सैंपल भरे गए। 169 के खिलाफ वाद दाखिल किया गया। बाकी के खिलाफ कार्रवाई लंबित है। इसी बीच 54 लोगों पर जुर्माना लगाया गया, जबकि एक मामले में जुर्माना व सजा भी हुई। जुर्माने के जरिये विभाग को 25 लाख 31 हजार की आय हुई। 

वित्तीय वर्ष का रिपोर्ट कार्ड बताता है कि दूध, मावा, मिठाई और जंक फूड से जुड़े आइटमों में सबसे ज्यादा मिलावट हो रही है। कुछ लोग जनता की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। अब लगातार अभियान चलाया जाएगा। 
- जेपी सिंह, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, एफडीए


सिंथेटिक दूध की पहचान
सिंथेटिक दूध की स्वाद थोड़ा खट्टा या कड़वा होता है। अगर दूध को आप अंगुली पर रगड़ेंगे तो साबुन जैसे झाग आ सकते हैं। गर्म करने पर रंग पीला या हल्का हरा हो सकता है। 

स्टार्ज की मिलावट
अगर 100 ग्राम दूध में 5 से 6 बूंद आयोडीन डालते हैं और उससे उसका रंग नीला पड़ जाता है तो समझ सकते हैं कि उसमें स्टार्च मिलाया गया है।

यूरिया की मिलावट
अगर दूध स्वाद में ज्यादा मिठा है या फिर खट्टा मिठा सा स्वाद आ रहे है तो आप समझ जाये कि उसके अंदर यूरिया या डिटर्जेंट मिलाया गया है। फैट बढ़ाने के लिए इन्हें मिलाया जाता है। 
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