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सियासत: मेरठ दक्षिण में सपा के टिकट पर घमासान, दावेदारों की लंबी लिस्ट, भितरघात और गुटबाजी से निपटने की चुनौती

Mon, 26 Oct 2026 02:35 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 26 Oct 2026 02:35 PM IST
सार

मेरठ दक्षिण विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी में टिकट के कई दावेदार सामने हैं। आदिल चौधरी का दावा मजबूत माना जा रहा है, लेकिन टिकट वितरण के बाद गुटबाजी और असंतोष पार्टी के लिए चुनौती बन सकते हैं।

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Meerut South Assembly Seat Emerges as a Key Battleground for SP Amid Ticket Race and Factional Tensions
अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में मेरठ दक्षिण विधानसभा सीट समाजवादी पार्टी के लिए अहम बनती दिख रही है। यहां टिकट के दावेदारों की लंबी सूची और पार्टी के भीतर संभावित गुटबाजी को लेकर चर्चा तेज है। कई दावेदार टिकट की कोशिश में लखनऊ तक दौड़ लगा रहे हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने उम्मीदवार चुनने के साथ सभी दावेदारों को साथ रखने की चुनौती भी होगी। महानगर अध्यक्ष आदिल चौधरी का नाम प्रमुख दावेदारों में शामिल है।

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मेरठ दक्षिण में टिकट के लिए दावेदारों की दौड़
मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में मेरठ दक्षिण विधानसभा सीट समाजवादी पार्टी के लिए चर्चा का केंद्र बनी हुई है। जिले की सातों विधानसभा सीटों में सपा के टिकट के लिए सबसे लंबी दावेदारों की फेहरिस्त इसी सीट पर बताई जा रही है। टिकट पाने की कोशिश में दावेदार लखनऊ तक दौड़ लगा रहे हैं।
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दावेदारों की बढ़ती संख्या के बीच पार्टी नेतृत्व के सामने यह तय करने की चुनौती है कि किस चेहरे पर भरोसा जताया जाए। टिकट का फैसला केवल उम्मीदवार की व्यक्तिगत दावेदारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसके बाद संगठन को एकजुट रखने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।

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टिकट के बाद भितरघात का खतरा
मेरठ दक्षिण में टिकट की प्रतिस्पर्धा के बीच गुटबाजी और भितरघात की आशंका भी चर्चा में है। राजनीतिक विश्लेषण के मुताबिक, बड़ी संख्या में दावेदार होना पार्टी की स्थानीय सक्रियता का संकेत हो सकता है, लेकिन टिकट से वंचित नेताओं और उनके समर्थकों की नाराजगी संगठन के लिए चुनौती बन सकती है।

यदि टिकट वितरण के बाद असंतोष बढ़ता है और समय रहते उसे दूर नहीं किया जाता, तो इसका असर चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के लिए उम्मीदवार चयन के साथ-साथ सभी दावेदारों और उनके समर्थकों को साथ लेकर चलना भी अहम होगा।

जातीय समीकरण भी रहेंगे अहम
मेरठ दक्षिण सीट पर मुस्लिम और दलित मतदाताओं के साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के मतदाताओं का समीकरण चुनावी मुकाबले में अहम भूमिका निभा सकता है। ऐसे में पार्टी के लिए ऐसा उम्मीदवार चुनना महत्वपूर्ण होगा, जो विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच स्वीकार्यता बना सके और संगठन को साथ लेकर चलने में सक्षम हो।

हालांकि, चुनावी नतीजों पर उम्मीदवार के अलावा स्थानीय मुद्दों, प्रचार, गठबंधन और मतदाताओं के रुख का भी असर पड़ेगा।
 

आदिल चौधरी का नाम प्रमुख दावेदारों में
समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष आदिल चौधरी का नाम मेरठ दक्षिण सीट से प्रमुख दावेदारों में शामिल है। वह पहले दो बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के सोमेंद्र सिंह तोमर को चुनौती दी थी और 7,942 मतों के अंतर से हार गए थे। उन्हें कुल 1,21,725 वोट मिले थे।

पिछले चुनाव में मिले मतों के आधार पर आदिल चौधरी की दावेदारी को मजबूत माना जा रहा है। हालांकि, अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान को करना है। टिकट वितरण के बाद पार्टी अपने संभावित उम्मीदवार के पक्ष में संगठन को कितना एकजुट रख पाती है, यह भी मेरठ दक्षिण की चुनावी रणनीति का अहम पहलू होगा।

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