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हड़ताल से बिगड़ गई मेडिकल में इलाज की ताल
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sat, 27 Feb 2016 02:28 AM IST
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मेडिकल कॉलेज में अब हंगामा और हड़ताल आम बात हो गई हैं, लेकिन इस व्यवस्था के बीच खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। शुक्रवार को आल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन की तरफ से हड़ताल का आह्वान किया गया था। जिसके चलते पैरा मेडिकल स्टाफ हड़ताल पर रहा। इससे मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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हड़तालों की भेंट चढ़े मेडिकल कॉलेज में ट्रीटमेंट की व्यवस्था गड़बड़ा रही है और निजी अस्पताल इसका फायदा उठा रहे हैं। कॉलेज में जनवरी के अंतिम सप्ताह में शुरू हुआ हंगामे और हड़ताल का सिलसिला चलता आ रहा है। नर्सिंग स्टाफ भले ही ऑल इंडिया स्तर से किये गए आह्वान पर हड़ताल पर रहा हो लेकिन इससे पहले जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से लंबे समय तक ट्रीटमेंट प्रभावित रहा है।
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ऐसे में ट्रीटमेंट को बेहतर करने और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं को बढ़ाने की बात होनी चाहिए। संस्थान में अब आपसी खींचतान इतनी हावी है कि करीब तीन चार माह तक मेडिकल कॉलेज से बाहर रहने वाली निजी अस्पतालों की एंबुलेंस अब सीधे वार्ड के बाहर से मरीजों को ले जा रही है। जिन्हें रोकने वाला कोई नहीं है।
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तीमादार ही कर रहे केयर
यदि कोई इमरजेंसी में भर्ती होता है तो उसकी जांच कराने से वार्ड तक में शिफ्ट किए जाने का काम वार्ड ब्वाय के हाथों में होता है। उसकी ड्यूटी ही इस बात की होती है कि मरीज की पूरी केयर की जाए, लेकिन मेडिकल में तीमारदारों को ही दौड़ना पड़ रहा है।
केस-एकः बीमारी के चलने फिरने में असमर्थ महसूस कर रही अंकिता के लिए व्हीलचेयर ही एक मात्र सहारा है। सर्जरी वार्ड में भर्ती अंकिता को जांच के लिए कई वार्डों में जाना पड़ा, लेकिन कोई वार्ड ब्वाय नहीं मिला। परिजनों को उसे व्हीलचेयर पर लेकर चक्कर काटने पड़ें। ऐसे में अंकिता के एक हाथ में ड्रिप और दूसरे हाथ में बोतल से साफ अंदाजा लगाया जा सकता था कि कॉलेज में इलाज कराना आसान नहीं है।
केस-दोः लालकुर्ती निवासी बानो को आनन फानन में इमरजेंसी में भर्ती कराया तो चिकित्सक ने एक्सरे समेत तमाम जांच लिख दीं। जांच कराने के लिए कोई वार्ड ब्वाय उनके साथ नहीं गया। किसी ने एक्सरे जांच फर्स्ट फ्लोर पर बता दिया तो परिजन मरीज को लेकर पहले फ्लोर पर चले गए। चक्कर काटने के बाद पता चला कि एक्सरे नीचे होते हैं, जिसके बाद स्ट्रेचर पर लेटे मरीज को लेकर ग्राउंड फ्लोर की तरफ दौड़े।
केस-तीनः नर्सिंग स्टाफ हड़ताल पर था और बाकी कॉलेज प्रशासन दूसरे कामों में व्यस्त। इसी बीच शुक्रवार को इमरजेंसी के सामने और अस्पताल के पीछे के रास्ते से धड़ल्ले से मरीज निजी अस्पतालों में शिफ्ट होते रहे, वो भी कॉलेज की तरफ से लगाए गए सिक्योरिटी के सामने ही। वार्ड के पिछले रास्ते पर निजी एंबुलेंस की लाइन लगी थी। कैमरे से फोटो खींचने शुरू हुई तो एंबुलेंस संचालक गाड़ी को लेकर चलते बने।