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मेरठ में घट सकते हैं जमीनों के दाम
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Sat, 20 Aug 2016 02:08 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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आने वाले समय में मेरठ में जमीनों के रेट कम हो सकते हैं। शासन ने लगातार बढ़ रहे सर्किल रेट के कारण घट रहीं रजिस्ट्री की शिकायत का संज्ञान लिया है। प्रमुख सचिव अनिल कुमार ने डीएम को लिखे पत्र में कहा है कि सर्किल रेट रिवाइज करने का मतलब सिर्फ बढ़ाना नहीं होता है, समय के अनुसार इसे कम भी किया जा सकता है। ऐसे में मेरठ जनपद के सर्किल रेट इस बार कम हो सकते हैं।
वर्ष 2010 से 2015 के बीच मेरठ के सर्किल रेट लगातार बढ़े हैं, जिस पर हर बार शिकायत आने के बावजूद जिला प्रशासन बढ़ी दरों को जारी कर देता है। लेकिन इस बार दस्तावेज लेखक संघ के साथ ही बिल्डरों ने तीखा विरोध दर्ज कराया था। दस्तावेज लेखकों ने उत्तराखंड और हरियाणा का उदाहरण देते हुए कहा था कि वहां पर सर्किल रेट रिवाइज करते हुए बढ़ाने के बजाए इस बार कम किया गया है। इसी तरह मेरठ में भी लगातार गिरते प्रॉपर्टी के बूम को देखते हुए रेट कम करने चाहिए।
आयकर विभाग की नजर से भी अटकी है रजिस्ट्री
दरअसल, आयकर विभाग सर्किल रेट को आधार मानकर संपत्ति की कीमत तय करता है। संपत्ति खरीदने के लिए भुगतान की जांच करता है। 30 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली संपत्ति का ब्योरा हर माह रजिस्ट्री विभाग से आयकर को जाता है। अब तो इससे कम कीमत की संपत्ति की भी आयकर जांच करने लगा है। भुगतान में जरा सी गड़बड़ी दिखने पर नोटिस जारी कर देता है। उसका जवाब देने में लोगों के पसीने छूट जाते हैं। इस डर से तमाम लोग संपत्ति खरीदकर भी रजिस्ट्री नहीं करा रहे हैं। खुद प्राधिकरणों की संपत्तियों की भी खरीदार नहीं मिल रहे। लांच होने वाली स्कीमों में संपत्तियों की संख्या से भी कम आवेदन आ रहे हैं।
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हजारों खरीदारों को होगा फायदा
अगर सर्किल रेट घटा या वर्तमान दर पर रह जाता है तो एमडीए और आवास विकास सहित तमाम अन्य योजनाओं के हजारों खरीदारों को फायदा होगा। इसमें विशेष रूप से उद्यमियों को सहूलियत मिल सकेगी।
अभी तक नहीं अपलोड
मेरठ में प्रस्तावित सूची पर आयी आपत्तियों का निस्तारण कर जिला प्रशासन ने अंतिम सूची जारी कर दी है। लेकिन दस्तावेज लेखक संघ के दबाव में अभी तक उसे सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में अब उम्मीद जतायी जा रही है कि आयी आपत्तियों को दोबारा से निरीक्षण कर सर्किल रेट कई जगह पर कम हो सकते हैं।
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वर्ष 2010 से 2015 के बीच मेरठ के सर्किल रेट लगातार बढ़े हैं, जिस पर हर बार शिकायत आने के बावजूद जिला प्रशासन बढ़ी दरों को जारी कर देता है। लेकिन इस बार दस्तावेज लेखक संघ के साथ ही बिल्डरों ने तीखा विरोध दर्ज कराया था। दस्तावेज लेखकों ने उत्तराखंड और हरियाणा का उदाहरण देते हुए कहा था कि वहां पर सर्किल रेट रिवाइज करते हुए बढ़ाने के बजाए इस बार कम किया गया है। इसी तरह मेरठ में भी लगातार गिरते प्रॉपर्टी के बूम को देखते हुए रेट कम करने चाहिए।
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आयकर विभाग की नजर से भी अटकी है रजिस्ट्री
दरअसल, आयकर विभाग सर्किल रेट को आधार मानकर संपत्ति की कीमत तय करता है। संपत्ति खरीदने के लिए भुगतान की जांच करता है। 30 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली संपत्ति का ब्योरा हर माह रजिस्ट्री विभाग से आयकर को जाता है। अब तो इससे कम कीमत की संपत्ति की भी आयकर जांच करने लगा है। भुगतान में जरा सी गड़बड़ी दिखने पर नोटिस जारी कर देता है। उसका जवाब देने में लोगों के पसीने छूट जाते हैं। इस डर से तमाम लोग संपत्ति खरीदकर भी रजिस्ट्री नहीं करा रहे हैं। खुद प्राधिकरणों की संपत्तियों की भी खरीदार नहीं मिल रहे। लांच होने वाली स्कीमों में संपत्तियों की संख्या से भी कम आवेदन आ रहे हैं।
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हजारों खरीदारों को होगा फायदा
अगर सर्किल रेट घटा या वर्तमान दर पर रह जाता है तो एमडीए और आवास विकास सहित तमाम अन्य योजनाओं के हजारों खरीदारों को फायदा होगा। इसमें विशेष रूप से उद्यमियों को सहूलियत मिल सकेगी।
अभी तक नहीं अपलोड
मेरठ में प्रस्तावित सूची पर आयी आपत्तियों का निस्तारण कर जिला प्रशासन ने अंतिम सूची जारी कर दी है। लेकिन दस्तावेज लेखक संघ के दबाव में अभी तक उसे सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में अब उम्मीद जतायी जा रही है कि आयी आपत्तियों को दोबारा से निरीक्षण कर सर्किल रेट कई जगह पर कम हो सकते हैं।