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97 प्रतिशत वाले फेल, साठ वाले पास
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Thu, 04 Feb 2016 02:02 AM IST
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लगभग तीस करोड़ के टेंडरों को लेकर चली रही तकनीकी बिड की जांच के अजीब परिणाम सामने आ रहे हैं। टेंडर के मूल्यांकन में जिसके 97 प्रतिशत से ज्यादा अंक आए, उनकी निविदाएं फेल कर दी गईं। साठ प्रतिशत अंक वालों को टेंडर देने के लिए हरी झंडी दे दी कई। ऐसे में इस बार टेंडर पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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मंगलवार रात टेंडरों को लेकर एमडीए में हड़कंप मचा रहा। साइकिल ट्रैक, लोहियानगर, गंगानगर तथा डिफेंस एंकलेव में समाजवादी आवास बनाने, डीएम आवास के सामने सड़क के चौड़ीकरण में खंभे शिफ्टिंग आदि लगभग 30 करोड़ के टेंडरों पर अचानक टेंडर कमेटी की मीटिंग शुरू हो गई। इन टेंडरों की जांच की जाने लगी। आरोप लगा कि रात को गुपचुप तरीके से अपने चहेतों को टेंडर जारी किए जा रहे हैं।
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ठेकेदारों ने इस बाबत आला अधिकारियों के फोन मिलाने शुरू कर दिए। कहा गया कि एमएलसी चुनाव की अधिसूचना लग चुकी है, जिससे बैक डेट में टेंडर जारी कर खेल किया जा रहा है। हालांकि सचिव एमडीए तथा अन्य अधिकारियों ने दावा किया कि 15 जनवरी को टेंडर डाले थे और उसी दिन तकनीकी बिड खोल दी गई थी।
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मूल्यांकन का बना मखौल
टेंडर डालने के बाद ही उनका मूल्यांकन कर दिया गया। उधर टेंडर कमेटी ने जांच की तो मूल्यांकन पद्घति का मखौल बना डाला गया। जिस टेंडर पर 97 प्रतिशत से ज्यादा अंक थे उसे कैंसिल कर दिया गया और 60 प्रतिशत वाले पास हो गए। कहा गया कि जो शर्त अलग से लगाई गई थी, उसका पालन जिसने नहीं किया, उसका टेंडर निरस्त किया गया है।
नया नियम लगाया बाद में
ये टेंडर 6 जनवरी को जारी किए गए थे। बाद में इनमें संशोधन करते हुए कुछ शर्तें और लगाई गईं। 15 जनवरी को टेंडर खोले गए। मसलन बैंक लिक्विडिटी इसमें सबसे महत्वपूर्ण रही। यानि बैंक से लिक्विडिटी एसेट्स के प्रमाण पत्र पर सवाल खड़े किए गए। तीन माह तक यह प्रमाण पत्र मान्य रहता है, पर शर्त यह भी लगी कि इसी लिक्विडिटी से अधिक से अधिक काम करने वालों की निविदाएं अमान्य होंगी। यह आरोप भी ठेकेदारों ने कमिश्नर को दिए पत्र में लगाया। बुधवार को भी जांच काम चलता रहा।