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मेरठ के कारोबारी ने नोटबंदी में खपाए 20 करोड़
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Wed, 15 Feb 2017 07:20 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी में कालेधन को ठिकाने लगाने का एक नया मामला सामने आया है। कई लोगों ने ऑनलाइन ट्रेडिंग करा रही कंपनियों में अपना पैसा लगाकर बड़ा खेल कर दिया। एक व्यापारी ने तो 20 करोड़ रुपया इसमें लगा दिया और ऐसे ही कई कारोबारी अब जांच एजेंसियों की निशाने पर हैं।
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यह मामला एब्लेज इंफो सॉल्यूशंस के बाद वेबवर्क ट्रेड लिंक लिमिट की जांच में सामने आया है। एफआईआर दर्ज कराने वाले गाजियाबाद निवासी अमित किशोर जैन द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों के आधार पर कई चौंकाने वाले तथ्य समाने आ रहे हैं। वहीं, यूपी एसटीएफ के साथ ही जांच में लगी एजेंसियों को साक्ष्य मिले हैं कि नोटबंदी के दौरान भारी मात्रा में 500 और 1000 के पुराने नोट सोशल ट्रेडिंग से जुड़ी महाठगी में खपाए गए हैं। ऐसे में जल्द ही उन सभी से पूछताछ करने की तैयारी है।
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बैंकों की भूमिका भी संदिग्ध
जांच एजेंसियां अभी तक सारे नाम गोपनीय रख रही हैं। उन्हें शक है कि पुराने नोटों को ऑनलाइन ट्रेडिंग में लगाने में बैंकों की भूमिका भी संदिग्ध है। पुराने नोट खपाने में कारोबारियों और ऑनलाइन ट्रेडिंग से जुड़ी तमाम कंपनियों को इसलिए आसानी रही, क्योंकि उनके पास लाखों लोगों की आईडी थी। लाइक पैक खरीदने से पहले हर व्यक्ति को अपना एकाउंट नंबर, पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड से लेकर आधार नंबर देने होता था। ऐसे में इन सभी लोगों की आईडी लगाकर भारी संख्या में पैक खरीदे गए। साथ ही हर दिन ग्राहक को होने वाले भुगतान में भी पुराने नोटों का इस्तेमाल किया है। इस काम में बैंकों की भूमिका भी संदिग्ध है। अधिकारियों का मानना है कि बैंकों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा पैसा लगाना आसान नहीं था। एजेंसियों को आशंका है कि लाखों आईडी का इस्तेमाल कर इन कंपनियों ने बैंकों से कई सौ करोड़ रुपया बदला भी है। इसलिए यूपी एसटीएफ के साथ आयकर विभाग बैंकों की भी जांच कर रहा है।
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हर प्वाइंट पर पुख्ता जांच
इस पूरे मामले में हाथ डालने से पहले एजेंसियां हर प्वाइंट पर पुख्ता जांच कर रही हैं। साथ की सारे रिकॉर्ड भी तैयार किए जा रहे हैं। जांच एजेंसी से जुड़े लोगों का कहना है कि इस तरह की कंपनियों में पैसा लगाने वालों की आठ नवंबर के बाद संख्या बढ़ी है। इनमें मेरठ के सोने के कारोबार से जुड़े कई कारोबारी भी हैं। यही नहीं, कई विभागों में सेवारत अधिकारियों और प्रॉपर्टी डीलरों ने भी पैसा लगाया है।
कई साक्ष्य होने का दावा
वेबवर्क ट्रेड लिंक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वाले एके जैन का भी दावा है कि उनके पास कई साक्ष्य हैं। इन साक्ष्यों से पता चलता है कि ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर बड़ी संख्या में पुराने नोट खपाए गए हैं। 20 करोड़ से अधिक की धनराशि मेरठ से जुड़े एक कारोबारी की ओर से लगाए जाने के साक्ष्य भी जांच के दौरान एजेंसियों को मिले हैं।
नोटबंदी के बाद धड़ल्ले से खुली कंपनियां
नोटबंदी के साथ ही ऑनलाइन ट्रेडिंग के कारोबार में काफी उछाल आ गया। करीब 42 कंपनियों ने सेंट्रल एक्साइज विभाग से 10 नवंबर से 31 दिसंबर के बीच दिल्ली व एनसीआर क्षेत्र में पंजीकरण लिया। इनमें से जिन कंपनियों ने जिन बैंकों में अपना खाता दिखाया है, उनमें से 90 फीसदी खाते निजी बैंक में खोले गए। ऐसे में इनकी भूमिका से एजेंसियां इंकार नहीं कर रही हैं।