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मेरठ अग्निकांड: 'पापा जल्दी आओ, नहीं तो हमें जिंदा नहीं देख पाओगे', आग और धुएं के गुबार में घुट रहा था दम
Mon, 04 May 2026 10:39 PM IST
Mohd Mustakim
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
Published by: Mohd Mustakim
Updated Mon, 04 May 2026 10:39 PM IST
सार
Meerut News: कृष्णा नगर डौरली में आग लगने से सागर और उनकी बेटी शिवानी की मौत हो गई, जबकि 10 लोग घायल हो गए। अस्पताल में भर्ती ज्योति पूरी घटना के बारे में आराम से बात कर रही है, जबकि उसे नहीं पता कि पति व बेटी अब इस दुनिया में नहीं हैं।
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टेंट की दुकान और घर में लगी आग।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
डौरली में मकान और दुकानों में आग लगने के दौरान संजय कश्यप घर पर नहीं थे। वह अपनी 14 साल की बेटी जनक के साथ शास्त्रीनगर गए हुए थे। मकान में आग लगने पर परिवार के साथ फंसे उनके सबसे बड़े बेटे आशु ने रात 1:29 बजे उनके मोबाइल पर कॉल की। आशु ने फोन पर कहा कि पापा घर में आग लग गई है, जल्दी आ जाओ... हमें बचा लो नहीं तो जिंदा नहीं देख पाओगे।
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आशंका है कि आग लगभग रात सवा बजे लगी। आशु ने बताया कि कांता आंटी के शोर मचाने की आवाज सुनकर उनके परिवार की नींद खुली। बाहर देखा तो आग और धुएं का गुबार था। बाहर जाने और जीने के रास्ते में आग की लपटें दिखाई दे रहीं थीं। कुछ देर तो उन्हें समझ नहीं आया लेकिन फिर उन्होंने पिता संजय कश्यप को कॉल कर दिया।
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संजय की पत्नी सरिता, आशु के भाई प्रिंस और बहन भावना ने भी इसी तरह से आपबीती सुनाई। सभी घर में बेहोश हो गए और अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें होश आया। संजय कश्यप ने बताया कि बेटे का कॉल आते ही उन्होंने कंट्रोल रूम पर कॉल की। इसके बाद वह बेटी को स्कूटी पर लेकर दौड़ पड़े। तेज रफ्तार से स्कूटी चलाकर लगभग दो बजे मौके पर पहुंचे। पड़ोस के घर के रास्ते वह किसी तरह अपने घर की छत पर गए। यहां पड़ोसी पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश कर रहे थे। इसके लगभग पांच मिनट बाद पुलिस और कुछ देर बाद दमकलकर्मी मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोगों को बाहर निकाला और आग बुझाई।
गूंजी चीख-पुकार, बेहोशी के बाद खामोशी
कांता ने बताया कि आग की तपिश और धुएं के कारण उनकी नींद खुल गई। उनके शोर मचाने पर सभी लोग उनके बेटे-बहू के कमरे में दाखिल हो गए। दोनों परिवार के लोग जान बचाने के लिए चीख-पुकार करने लगे। बच्चे रो-रोकर जान बचाने के लिए चिल्ला रहे थे। कुछ देर तक उनके कमरे में चीख-पुकार गूंजती रही। लोगों का कहना है कि कुछ देर बाद अंदर से आवाजें आनी बंद हो गईं और लोगों के बेहोश होने के बाद खामोशी छा गई।
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कांता ने बताया कि आग की तपिश और धुएं के कारण उनकी नींद खुल गई। उनके शोर मचाने पर सभी लोग उनके बेटे-बहू के कमरे में दाखिल हो गए। दोनों परिवार के लोग जान बचाने के लिए चीख-पुकार करने लगे। बच्चे रो-रोकर जान बचाने के लिए चिल्ला रहे थे। कुछ देर तक उनके कमरे में चीख-पुकार गूंजती रही। लोगों का कहना है कि कुछ देर बाद अंदर से आवाजें आनी बंद हो गईं और लोगों के बेहोश होने के बाद खामोशी छा गई।
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