मायावती-मोदी और मुस्लिमों पर अखिलेश-राहुल का फोकस
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की संयुक्त रैली का पूरा एजेंडा ट्रिपल एम (मोदी, मायावती और मुस्लिम) फैक्टर के इर्द-गिर्द ही घूमता रहा। दोनों नेताओं ने युवाओं को रोजगार देने की बात कही तो यह भी याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके नाम पर छल किया है। दरअसल, लोकसभा चुनावों में भाजपा को युवाओं ने अच्छी-खासी संख्या में वोट दिया था। इसे ध्यान में रखते हुए दोनों नेता युवाओं के बीच मोदी फैक्टर को कम करने की कोशिश करते नजर आए। मोदी की रैली में मेरठ से जुड़े उद्योगों की बात कही गई तो इस रैली में खेल उद्योग के साथ बुनकरों और कैंची उद्योग को भी जोड़ दिया गया। इससे साफ है कि सपा-कांग्रेस गठबंधन की रणनीति प्रधानमंत्री मोदी को घेरकर भाजपा से सीधी लड़ाई में दिखने और मुस्लिम मतों को अपने पाले में करने की है। बसपा सुप्रीमो मायावती का जिक्र भी मुस्लिम मतों के लिहाज से ही किया गया।
मोदी पर निशाना और मुस्लिमों को रिझाया अखिलेश यादव और राहुल गांधी के निशाने पर प्रधानमंत्री ही ज्यादा रहे। इसके पीछे दोनों की मंशा मुस्लिम मतदाताओं को भाजपा से सीधी लड़ाई का संदेश देने की रही। इसके अलावा नोटबंदी, बैंक खातों में 15 लाख, किसानों की कर्ज माफी जैसे मुद्दों पर प्रधानमंत्री को ही घेरा। खास बात यह रही कि संयुक्त रैली के मंच से स्थानीय नेता भी बार-बार केंद्र की मोदी सरकार कहने के बजाय सीधे मोदी पर ही हमलावर रहे। यही नहीं, राहुल-अखिलेश के अलावा स्थानीय नेता भी इस चुनाव को प्रदेश के साथ देश का भी चुनाव बताते रहे। लोकसभा चुनावों की तरह एक तरफा ध्रुवीकरण रोकने के लिए अखिलेश यादव मतदाताओं को एकता का पाठ भी पढ़ाते रहे।
बसपा-भाजपा के रिश्तों की याद दिलाई
मेरठ सहित वेस्ट यूपी की सीटों पर बसपा ने दलित-मुस्लिम कार्ड चला है। बसपा ने मुस्लिमों को अच्छी संख्या में टिकट भी दिए हैं। अखिलेश यादव ने मुस्लिम मतों को अपने पाले में करने के लिए बसपा और भाजपा की पुरानी सरकारों की याद दिलाई। तंज कसते हुए याद दिलाया कि एक समय बसपा प्रमुख मायावती एक भाजपा नेता को राखी बांधती थीं। मवाना की रैली में यह भी कह दिया कि संभव है बसपा प्रमुख फिर से रक्षा बंधन मनाने लगें।
संयुक्त रैली में भी छाया रहा स्कैम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार फरवरी की रैली में स्कैम (समाजवादी, कांग्रेस, अखिलेश, मायावती) शब्द देकर नई चुनाव बहस खड़ी कर दी है। इसके बाद अखिलेश यादव, राहुल गांधी और मायावती ने अपने-अपने तरीके से स्कैम शब्द की व्याख्या की है। नौचंदी मैदान की संयुक्त रैली में अखिलेश ने स्कैम शब्द को अपने तरीके से परिभाषित करते हुए मोदी और अमित शाह पर निशाना साधा। साथ ही उसमें मायावती को जोड़ते हुए भाजपा और बसपा के रिश्तों के बारे में बताया।
स्थानीय उद्योग और वोट बैंक
मेरठ में चार फरवरी को हुई रैली में मोदी ने खेल उद्योग का जिक्र किया था। अब अखिलेश और राहुल ने मोेदी की ही बात को और आगे बढ़ा दिया है। अखिलेश ने कहा कि वह तो खुद भी क्रिकेट खेलते हैं। वहीं, राहुल गांधी ने बैट को लेकर मेक इन मेरठ की बात कह दी। इसके अलावा अखिलेश ने बुनकरों और कैंची उद्योग का जिक्र कर मुस्लिम मतदाताओं को अपने पाले में लाने का प्रयास किया। उन्होंने यहां तक कह दिया कि मेरठ बुनकरों का शहर है।
मोदी की तरह जोड़ा मेरठ से नाता
मोदी ने आजादी के पहले संग्राम से जोड़कर मेरठ में शुरुआत की थी तो राहुल गांधी ने भी क्रांतिवीरों को याद किया। मोदी ने स्थानीय मुद्दों को जोड़कर मेरा मेरठ कहा थो तो अखिलेश ने जनता से पूछा कि मोदी ने मेरठ को दिया क्या है। अखिलेश यादव ने स्मार्ट सिटी तक का जिक्र करके मोदी की रैली की तरह ही लोकल इंपैक्ट के साथ जाने की कोशिश की। भाजपा की विजय शंखनाद रैली में पहले चरण की शानदार शुरुआत होने की बात कही गई थी। अखिलेश ने अपने भाषण के अंत में कहा मेरठ से उनकी जीत की हवा चलेगी।
हर सीट तक पहुंचने की कोशिश
मेरठ की संयुक्त रैली के साथ अखिलेश यादव ने चार और चुनावी सभाएं मेरठ जिले में कीं। मेरठ की दो सीटें कांग्रेस गठबंधन के खाते में गई हैं। अखिलेश ने सपा की ओर से दावेदार रहे नेताओं को गठबंधन को चुनाव जिताने को कहा। इसके अलावा उन्होंने दूसरी चार सभाओं में भी स्थानीय समीकरणों का पूरा ध्यान रखा। मुलायम के खास रहे किठौर प्रत्याशी शाहिद मंजूर को अपना खास बताया तो सरधना प्रत्याशी अतुल प्रधान को सरकार आने पर बड़ी जिम्मेदारी देने की बात कही। इसके अलावा अपने विधायकों को एंटी इन्कम्बेंसी से बचाने के लिए उन्होंने गलतियों के लिए माफी भी मांगी।