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लाखों की योजनाओं पर कुपोषण भारी

Wed, 01 Jun 2016 02:02 AM IST
Updated Wed, 01 Jun 2016 02:02 AM IST
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loko kuposhan
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
 जिले में 11650 बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। सरकार बच्चों के लिए तमाम योजनाएं चला रही हैं, लेकिन उनकी सेहत नहीं सुधर रही है। इन बच्चों को न तो आंगनबाड़ी के माध्यम से पौष्टिक आहार मिल पा रहा है और न ही एएनएम और आशाओं के माध्यम से बेहतर सुविधाएं मिल पा रही हैं।
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अप्रैल के आंकड़ों में 11650 कुपोषण और 1735 बच्चे अति कुपोषण की श्रेणी में आए हैं। दौराला, जानीखुर्द, भावनपुर और माछरा ब्लॉक में सबसे ज्यादा कुपोषण के मामले सामने आए हैं। हालांकि हस्तिनापुर और परीक्षितगढ़ ब्लॉक में एक भी कुपोषण का मामला नहीं है।
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लेकिन बाकी ब्लॉकों की स्थिति पूरी व्यवस्था को आइना दिखा रही है। करीब छह माह पहले पंडित प्यारे लाल जिला चिकित्सालय में पोषण पुनर्वास केंद्र खोला गया था, जिसका काम बच्चों की सेहत सुधारना था। यह केंद्र 24 घंटे संचालित होना था, लेकिन स्टाफ की लापरवाही के कारण यह दस से पांच का सरकारी दफ्तर बनकर रह गया है। योजनाएं चलाने में भी लापरवाही की जा रही है।
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बच्चों के लिए पौष्टिक आहार नहीं  
एक दशक से सरकार ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन चला रही है। इसमें गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती को पौष्टिक आहार देने की व्यवस्था है। लेकिन कुपोषण के आंकड़ों के हिसाब से सारी व्यवस्था कागजों तक सिमट कर रह गई है।
क्योंकि स्वास्थ्य विभाग की जांच में ही छह माह से 5 वर्ष की आयु के बच्चे कुपोषण के शिकार पाए गए हैं। सरकारी योजनाएं विकास भवन और स्वास्थ्य विभाग के दफ्तरों तक ही सीमित होकर रह गई हैं। गर्भवती को न पौष्टिक  आहार मिल पा रहा है और न ही नवजात शिशुओं की बेहतर स्वास्थ्य देखभाल हो पा रही है।


अप्रैल के आंकड़े
ब्लॉक                कुपोषण          अति कुपोषण
जानीखुर्द              2636           967
दौराला                2412            614
भावनपुर              1938             0
माछरा                 2340             119
भूड़बराल              205                 1
खरखौदा                23                  7
रोहटा                    106                0
सरूरपुर                   172               15
मवाना                      46                 2
सरधना                     37                 10

ऐसे होती है कुपोषण की जांच
एक फीते के माध्यम से बच्चे के हाथ की गोलाई नापकर उसकी स्थिति तय की जाती है। अगर फीता गोलाई में लाल निशान तक पहुंच जाता है तो उस बच्चे को अतिकुपोषण की श्रेणी में रखा जाता है। पीले भाग में रहने पर बच्चे को कुपोषण की श्रेणी में रख दिया जाता है।

इस जांच प्रक्रिया को ‘मिड अपर आर्म सरकमफरेंस’ कहा जाता है। जांच में उम्र के हिसाब से बच्चे के वजन को भी देखा जाता है। कुपोषण की श्रेणी में आए बच्चों की देखभाल करने की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य विभाग की होती है।
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