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कालका इंस्टीट्यूट पर ढाई लाख का जुर्माना, सात साल से चल रहा विवाद

Fri, 14 Apr 2017 10:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Fri, 14 Apr 2017 10:30 AM IST
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kaalka institute levied 2.5 lakh panelty
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

बाईपास स्थित कालका इंस्टीट्यूट के कब्जे में करीब 4100 वर्गमीटर सरकारी जमीन मानते हुए तहसीलदार सदर ने ढाई लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही जमीन को कब्जा मुक्त कराने के आदेश दिए हैं। यह कानूनी लड़ाई करीब सात साल से चल रही थी।

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नगर निगम की परतापुर के बराल गांव में काफी जमीन थी। जिसमें अधिकांश पर कब्जे हो चुके हैं। नगर निगम ने अपनी 42820 वर्गमीटर जमीन पर कब्जा होने का आरोप लगाते हुए कालका इंस्टीट्यूट के संचालकों को नोटिस जारी किया था। वर्ष 2010 में यह मामला कोर्ट में चला गया। इंस्टीट्यूट संचालकों ने अपने पक्ष में एमडीए द्वारा स्वीकृत नक्शे और उसके ऊपर निगम द्वारा दी गयी एनओसी आदि तमाम साक्ष्य रखे। लेकिन कोर्ट के कई बार आदेश के बावजूद तहसील और निगम की साठगांठ के चलते पैमाइश नहीं हुई। 
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आधी जमीन पर नक्शा पास 
इंस्टीट्यूट संचालकों ने एमडीए से स्वीकृत जो नक्शे प्रस्तुत किए, वह 22641 वर्गमीटर जमीन पर निर्माण के लिए स्वीकृत थे। इस स्वीकृत नक्शे की जमीन पर दोनों ही पक्षों का कोई विवाद भी नहीं था। 
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केवल जुबानी कार्यवाही
विवाद के बीच एक बार परतापुर पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट में 6830 वर्ग मीटर पर कब्जा माना था। लेकिन बाद में नगर निगम ने दोबारा नोटिस जारी कर कहा कि पैमाइश में 42820 वर्गमीटर नहीं, 21000 वर्ग मीटर पर कब्जा है। इससे तय हो गया कि इस दौरान कोई नापतौल नहीं हुई और पुलिस, तहसील व निगम के अधिकारी जुबानी कार्यवाही करते रहे। 

हस्ताक्षर से इंकार
मामला ज्यादा बढ़ने पर 2014 में तत्कालीन तहसीलदार ने नायब तहसीलदार के नेतृत्व में टीम गठित कर पैमाइश करायी। जिसके लिए कालका इंस्टीट्यूट संचालकों को भी मौके पर रहने का नोटिस जारी हुआ। लेकिन वहां केवल उनका स्टाफ ही मौजूद रहा। सरकारी पैमाइश के बाद इस स्टाफ ने भी पैमाइश की। लेकिन पत्रावली पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया। इस पैमाइश में कालका इंस्टीट्यूट के कब्जे में करीब 4100 वर्ग मीटर जमीन पायी गयी। 


जुर्माना और बेदखली के आदेश
इस वाद का निस्तारण करते हुए तहसीलदार सदर भगत सिंह ने कालका इंस्टीट्यूट पर ढाई लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए इस कब्जे की जमीन से बेदखल करने के आदेश जारी कर दिए।

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