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जख्म आज भी ताजा, मलाल कोई मदद न मिलने का

Thu, 16 Jun 2016 02:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 16 Jun 2016 02:34 AM IST
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jakhm bhi taaja
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
 तीन साल पहले केदारनाथ में आए जल प्रलय को याद कर सुनील शर्मा आज भी सिहर उठते हैं। उस त्रासदी में उन्होंने अपने जवान बेटे और बेटी को खो दिया था। जिसके जख्म उनके परिवार के दिलों में आज भी ताजा हैं। मलाल यह है कि उस समय तो कोई मदद नहीं मिल पायी थी। उसके बाद सरकार ने भी कोई मदद नहीं दी।
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पल्लवपुरम फेस दो के सीएस-38 निवासी सुनील कुमार शर्मा पत्नी उपमा शर्मा, बेटी अनुराधा, मोनिका, निकिता और बेटे शिवांग के साथ भगवान केदारनाथ के दर्शन करने गए थे। 15 जून 2013 को वह गौरी कुंड पहुंच गए थे। वहां से चढ़ाई कर केदारनाथ के दर्शन करने के बाद वापस लौट रहे थे। 16 जून को भैरो चट्टी के पास पहुंचे तो अचानक रात में ही पहाड़ों से जल प्रलय आ गई। पूरा परिवार इसमें फंस गया। सैकड़ों वाहन बह गए और रास्ते टूट गए। दूर-दूर तक तबाही के सिवा कुछ नहीं दिख रहा था।
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यह मंजर देख सुनील अपने परिवार को लेकर पहाड़ों पर चढ़ गए। तीन दिन तक वह पहाड़ों पर ही रहे। 18 जून की सुबह भूख से तड़पकर अनुराधा (21) की मौत हो गई। उसी रात इकलौते बेटे शिवांग (18) भी दुनिया को छोड़कर चला गया। 24 जून 2013 को वह जैसे-तैसे कर मेरठ लौटे।
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सुनील ने बताया कि तीन साल बाद भी उनके परिवार को सरकार से कोई मदद नहीं मिली है। आज भी उस मनहूस रात को याद कर रूह कांप जाती है। पूरा परिवार केदारनाथ में आयी जल प्रलय को नहीं भूल पा रहा है। परिवार के लोग अनुराधा और शिवांग को याद कर रोते हैं। सुनील अपने परिवार के साथ वर्तमान में रुड़की में रह रहे हैं। जबकि मोदीपुरम में उनके माता-पिता रहते है। वह भी उस मंजर को अब याद करना नहीं चाहते।

प्रलय ने बुझाया इकलौता चिराग
सुनील के अनुसार वह पहली बार ही भगवान केदारनाथ के दर्शन करने गए थे। जहां भगवान ने उनसे उनका सब कुछ छीन लिया। तीन बहनों में शिवांग इकलौता था। वह तो बड़ी आस्था के साथ वहां गए थे। लेकिन जवान बेटी के साथ ही घर का इकलौता चिराग भी उस जल प्रलय में बुझ गया।


तीन दिन तक रहना पड़ा था भूखा
सुनील ने बताया कि जल प्रलय के बाद वहां भयानक मंजर था। उनके परिवार को तीन दिन तक भूूखा रहना पड़ा था। भूख के कारण ही शिवांग और अनुुराधा की जान चली गई थी। अगर वहां पर कुछ खाने के लिए मिल जाता तो दोनों की जान बच सकती थी। त्रासदी इतनी भयावह थी कि लोगों की जान पर बन रही थी। कोई भूख से मर रहा था तो कोई तबाही की चपेट में आकर दम तोड़ रहा था।
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