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यूपी: रात में हो रहा खनन, प्रशासन और पुलिस खुद में मगन, हर थाने के रेट पहले से ही निर्धारित

Thu, 18 Feb 2021 05:36 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Thu, 18 Feb 2021 05:36 PM IST
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Illegal mining is taking place in the rural area of Meerut
खादर क्षेत्र में रात में खनन के दौरान डंपर में मिट्टी भरती जेसीबी। संवाद - फोटो : अमर उजाला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खनन माफिया पर नकेल कसने का एजेंडा मेरठ देहात क्षेत्र में फेल होता नजर आ रहा है। गंगा के खादर क्षेत्र में शामिल मवाना, हस्तिनापुर और बहसूमा थाना क्षेत्र में मिट्टी और रेत के अवैध खनन पर रोक नहीं लग पा रही है। कुछ लोगों के वरदहस्त के चलते माफिया रात में खनन करते हैं।

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बहसूमा थाना क्षेत्र के रामराज स्थित मध्य गंग नहर किनारे पूरी की पूरी रात जेसीबी, डंपर और ट्रैक्टर ट्रॉली से खनन किया जा रहा है। यहां से थोड़ी दूर मुजफ्फरनगर के रामराज थाने की पुलिस चौकी और 500 मीटर दूर बहसूमा थाना क्षेत्र की चौकी है। यही नहीं, लगभग एक किलोमीटर दूर रामराज थाना है। 
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बावजूद इसके पुलिस और खनन विभाग की नजर यहां नहीं है। ताज्जुब की बात तो यह है कि मिट्टी को अवैध रूप से खोदकर माफिया पुलिस चौकी के सामने से ही निकलते हैं। स्थानीय लोगों को भ्रम में रखने के लिए माफिया प्रशासन से 10-10 ट्रॉली खनन की अनुमति लेते हैं। बाद में यहां एक-डेढ़ मीटर के बजाय तीन से छह मीटर गहराई तक खनन किया जाता है। कई जगह तो 100-100 ट्रॉली मिट्टी खोद ली जाती है।
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मिट्टी की ट्रॉली आने-जाने से आसपास के खेतों में खड़ी फसलों को रौंदने से भी खनन माफिया को कोई हिचक नहीं होती है। ग्रामीण शिकायत भी करते हैं लेकिन कार्रवाई तो दूर, सुनवाई तक नहीं होती है।

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हर थाने के रेट पहले से ही निर्धारित
सरकारी नियमों के विपरीत सांठगांठ के खेल से खनन माफिया पूरी रात मिट्टी का खनन करते हैं और इसमें थाना पुलिस की मिलीभगत जहां प्रमुख रूप से होती है तो अब प्रशासनिक सांठगांठ भी उजागर हो रही है। इन पर कोई कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही है। हर माफिया से लगभग 20 हजार रुपये तय होते हैं।

मौके पर जांच नहीं करते जिम्मेदार विभाग
निर्धारित मानक से अधिक का खनन में खनन विभाग के साथ ही राजस्व विभाग की सांठगांठ होती है। खनन कार्य के बीच में और पूरा होने के बाद मौके की जांच की जिम्मेदारी इन्हीं दोनों विभागों की है। बावजूद इसके कोई भी विभाग मौके पर जाकर जांच नहीं करता है।

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